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चालीसा

हनुमान चालीसा — दोहा

यह भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और पूजनीय स्तोत्र, हनुमान चालीसा का आरंभिक दोहा है। यह हनुमान जी की महिमा का गान करने से पहले गुरु का स्मरण और भगवान राम की स्तुति करता है।

पृष्ठभूमि

हनुमान चालीसा पारंपरिक रूप से कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित मानी जाती है और हिंदू परंपरा में यह सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रार्थनाओं में से एक है। यह शुरुआती दोहा एक प्रारंभिक प्रार्थना के रूप में कार्य करता है, जो गुरु की कृपा के माध्यम से मन की शुद्धि पर जोर देता है। भक्त इसे शक्ति, साहस और सुरक्षा की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन पढ़ते हैं, और हनुमान जयंती तथा मंगलवार की पूजा में इसका विशेष महत्व होता है।

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Cleansing the mirror of my mind with the dust of my Guru's lotus feet, I narrate the pure fame of Raghubar (Rama), which bestows the four fruits of life.