जैन धर्म
चालीसा
हनुमान चालीसा, शिव चालीसा सहित 40+ प्रामाणिक चालीसाएँ — मूल अवधी/हिंदी लिपि, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
चालीस (४०)अवधी / मध्यकालीन हिंदी (संस्कृत 'चत्वारिंशत्' से)
चालीस चौपाइयों का भक्तिमय स्तोत्र — संत तुलसीदास जैसे भक्त कवियों द्वारा रचित जनसुलभ प्रार्थना, जिसे सामान्य जन कंठस्थ कर बिना किसी जटिल कर्मकांड के ईश्वरीय अनुग्रह, आत्मबल और सुरक्षा प्राप्त कर सकें।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
दोहा एवं चौपाई (१६ मात्राओं का छंद)
प्रारंभ में हृदय को पवित्र करने हेतु एक या दो दोहे, मध्य में प्रभु के दिव्य गुण और लीलाओं का गान करती चालीस चौपाइयाँ, और अंत में हृदय-कमल में प्रभु के वास की मंगलकामना करता समापन दोहा।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
पाश्चात्य लोक-प्रार्थना एवं धार्मिक गीतिकाव्यजनसामान्य का पावन स्तुति-गान
यूरोपीय इतिहास के उन लोक-गीतों के समान, जिन्होंने धर्मग्रंथों को क्लिष्ट लैटिन भाषा के घेरे से बाहर निकाल कर सामान्य जन की सहज भाषा में सुलभ कराया ताकि हर कोई एक स्वर में गा सके।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:प्रतिदिन प्रातः अथवा संध्याकाल में, विशेषतः विशिष्ट दिनों में (जैसे हनुमान जी हेतु मंगलवार व शनिवार), भय निवारण, मानसिक शांति और दृढ़ आत्मविश्वास की प्राप्ति हेतु सस्वर पाठ।