Bharat Devotion
Embroidered silver ishtalinga, a seated Nandi bull and bilva leaves beside a stone shrine

लिंगायत धर्म

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पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह

आज के पावन पाठ

दैनिक वचन एवं इष्टलिंग आराधना

पूजित देव: कूडलसंगमदेव (इष्टलिंग) · शुक्ल पक्ष अष्टमी

कर्म ही पूजा (कायकवे कैलास) एवं देह ही देवालय के भाव से इष्टलिंग का ध्यान।

आज का प्रमुख पाठ
कायकवे कैलास
ಕಾಯಕವೇ ಕೈಲಾಸ

कर्म ही पूजा (कायकवे कैलास) एवं देह ही देवालय के भाव से इष्टलिंग का ध्यान।

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जगद्गुरु बसवेश्वर, अक्क महादेवी और शरण संतों द्वारा रचित अमर वचन जो कायक (सत्कर्म) को ही कैलास और अंतरात्मा को साक्षात देवालय मानते हैं।

⭐कायक ही कैलास
कायकवे कैलास (कर्म ही पूजा)
ಕಾಯಕವೇ ಕೈಲಾಸ

सच्चे श्रम और निष्काम सेवा को ही मोक्ष का साक्षात द्वार बताने वाला जगद्गुरु बसवण्णा का अमर वचन।

१२वीं सदी के शरण आंदोलन के क्रांतिकारी सिद्धांत: 'कायकवे कैलास' (परिश्रम ही पूजा), दासोह (निस्वार्थ सामाजिक समर्पण) और षट्स्थल साधना।

⭐परिश्रम ही पूजा
कायक: 'कायकवे कैलास' — परिश्रम ही पूजा और आत्म-मुक्ति की पवित्र साधना
ಕಾಯಕವೇ ಕೈಲಾಸ

जगद्गुरु बसवेश्वर का अमर उपदेश कि ईमानदारी का परिश्रम ही कैलास (मोक्ष) है, जिससे समाज में स्वावलंबन और समता की स्थापना होती है।

कृष्णा और मलप्रभा नदी के पावन संगम पर स्थित कूडलसंगम तथा अनुभव मंटप की ऐतिहासिक भूमि बसवकल्याण, जहाँ शरण क्रांति का सूत्रपात हुआ।

⭐पावन ऐक्य स्थल
कूडलसंगम: वह पवित्र नदी संगम जहाँ बसवण्णा ने परमात्मा से ऐक्य प्राप्त किया
ಕೂಡಲಸಂಗಮ ಕ್ಷೇತ್ರ

बसवण्णा के आराध्य देव कूडलसंगमदेव का पावन मंदिर, जहाँ शरण साहित्य और भक्ति का अमृतमय प्रवाह आज भी स्पंदित होता है।