कबीर पंथ
पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह
| पावन वर्ग एवं संख्या | आध्यात्मिक उद्देश्य एवं भावार्थ | प्रमुख प्रतिनिधि पाठ | संग्रह देखें |
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आज के पावन पाठ दैनिक साखी एवं सिमरन पूजित देव: सतगुरु एवं निर्गुण राम शुक्ल पक्ष अष्टमी | सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन। | आज का प्रमुख पाठ गुरु गोविंद दोऊ खड़ेगुरु गोबिंद दोऊ खड़े सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन। | आज के 5 पाठ → |
कबीर साखी एवं दोहावली (सत्य के साक्षी)9 पावन रचनाएं | पाखंड निवारक एवं आत्म-जागृति उत्पन्न करने वाले संत कबीर के अमर दोहे जो सीधे अंतःकरण को स्पर्श करते हैं। | ⭐सद्गुरु की महिमा गुरु गोविंद दोऊ खड़ेगुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागूं पांय सद्गुरु की महिमा का अमर दोहा, जो ईश्वर से भी पहले गुरु के चरणों में शीश नवाने की प्रेरणा देता है। | सभी देखें |
रहस्यवादी शबद एवं पद (आत्मा का गान)1 पावन रचनाएं | मानव देह और चेतना के ताने-बाने को आध्यात्मिक रूपकों के माध्यम से समझाने वाले कबीर के रहस्यवादी पद। | ⭐चदरिया का रहस्य झीनी झीनी बीनी चदरियाझीनी झीनी बीनी चदरिया कर्म और साधना के धागों से बुनी इस देह रूपी चादर को निर्मल रखने का अमर संदेश। | सभी देखें |
कबीर दर्शन एवं शिक्षाएं (निर्गुण राम एवं सत्संग)10 पावन रचनाएं | संत कबीर का निर्भीक एवं ज्ञानमयी दर्शन: घट-घट वासी निर्गुण राम की उपासना, अंतर-साधना, पाखंड-मुक्ति और सतगुरु की शरण का महत्व। | ⭐निर्गुण भक्ति का स्वरूप निर्गुण भक्ति: संत कबीर का निरंकार राम और आत्म-ज्ञानघट घट में वह सांई रमता परमात्मा को किसी मंदिर या तीर्थ में नहीं, बल्कि अपने ही अंतःकरण में खोजने का कबीर का अमर आध्यात्मिक संदेश। | सभी देखें |
पावन कबीर धाम (कबीर चौरा मठ एवं मगहर)2 पावन रचनाएं | वाराणसी में संत कबीर की साधना स्थली कबीर चौरा मठ तथा मगहर स्थित पावन समाधि-मज़ार, जो सांप्रदायिक सद्भाव का अनुपम प्रतीक है। | ⭐कबीर की पावन तपोभूमि कबीर चौरा मठ: वाराणसी में संत कबीर का निवास तथा उपदेश स्थलकबीर चौरा मठ, काशी काशी का वह पावन मठ जहाँ कबीर ने ताना-बाना बुनते हुए जन-साधारण को सहज समाधि और निर्गुण भक्ति की अमर वाणी सुनाई। | सभी देखें |
दैनिक साखी एवं सिमरन
पूजित देव: सतगुरु एवं निर्गुण राम · शुक्ल पक्ष अष्टमी
सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन।
सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन।
पाखंड निवारक एवं आत्म-जागृति उत्पन्न करने वाले संत कबीर के अमर दोहे जो सीधे अंतःकरण को स्पर्श करते हैं।
सद्गुरु की महिमा का अमर दोहा, जो ईश्वर से भी पहले गुरु के चरणों में शीश नवाने की प्रेरणा देता है।
मानव देह और चेतना के ताने-बाने को आध्यात्मिक रूपकों के माध्यम से समझाने वाले कबीर के रहस्यवादी पद।
कर्म और साधना के धागों से बुनी इस देह रूपी चादर को निर्मल रखने का अमर संदेश।
संत कबीर का निर्भीक एवं ज्ञानमयी दर्शन: घट-घट वासी निर्गुण राम की उपासना, अंतर-साधना, पाखंड-मुक्ति और सतगुरु की शरण का महत्व।
परमात्मा को किसी मंदिर या तीर्थ में नहीं, बल्कि अपने ही अंतःकरण में खोजने का कबीर का अमर आध्यात्मिक संदेश।
वाराणसी में संत कबीर की साधना स्थली कबीर चौरा मठ तथा मगहर स्थित पावन समाधि-मज़ार, जो सांप्रदायिक सद्भाव का अनुपम प्रतीक है।
काशी का वह पावन मठ जहाँ कबीर ने ताना-बाना बुनते हुए जन-साधारण को सहज समाधि और निर्गुण भक्ति की अमर वाणी सुनाई।
