Bharat Devotion
Sant Kabir seated at his weaving loom with an ektara, in an embroidered riverside scene

कबीर पंथ

कबीर पंथ

पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह

आज के पावन पाठ

दैनिक साखी एवं सिमरन

पूजित देव: सतगुरु एवं निर्गुण राम · शुक्ल पक्ष अष्टमी

सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन।

आज का प्रमुख पाठ
गुरु गोविंद दोऊ खड़े
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े

सहज समाधि, सत्य वचन और आंतरिक शुद्धि हेतु कबीर वाणी का चिंतन।

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पाखंड निवारक एवं आत्म-जागृति उत्पन्न करने वाले संत कबीर के अमर दोहे जो सीधे अंतःकरण को स्पर्श करते हैं।

⭐सद्गुरु की महिमा
गुरु गोविंद दोऊ खड़े
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागूं पांय

सद्गुरु की महिमा का अमर दोहा, जो ईश्वर से भी पहले गुरु के चरणों में शीश नवाने की प्रेरणा देता है।

मानव देह और चेतना के ताने-बाने को आध्यात्मिक रूपकों के माध्यम से समझाने वाले कबीर के रहस्यवादी पद।

⭐चदरिया का रहस्य
झीनी झीनी बीनी चदरिया
झीनी झीनी बीनी चदरिया

कर्म और साधना के धागों से बुनी इस देह रूपी चादर को निर्मल रखने का अमर संदेश।

संत कबीर का निर्भीक एवं ज्ञानमयी दर्शन: घट-घट वासी निर्गुण राम की उपासना, अंतर-साधना, पाखंड-मुक्ति और सतगुरु की शरण का महत्व।

⭐निर्गुण भक्ति का स्वरूप
निर्गुण भक्ति: संत कबीर का निरंकार राम और आत्म-ज्ञान
घट घट में वह सांई रमता

परमात्मा को किसी मंदिर या तीर्थ में नहीं, बल्कि अपने ही अंतःकरण में खोजने का कबीर का अमर आध्यात्मिक संदेश।

वाराणसी में संत कबीर की साधना स्थली कबीर चौरा मठ तथा मगहर स्थित पावन समाधि-मज़ार, जो सांप्रदायिक सद्भाव का अनुपम प्रतीक है।

⭐कबीर की पावन तपोभूमि
कबीर चौरा मठ: वाराणसी में संत कबीर का निवास तथा उपदेश स्थल
कबीर चौरा मठ, काशी

काशी का वह पावन मठ जहाँ कबीर ने ताना-बाना बुनते हुए जन-साधारण को सहज समाधि और निर्गुण भक्ति की अमर वाणी सुनाई।