Bharat Devotion
Embroidered Khanda emblem with a saffron Nishan Sahib flag and marigolds at sunrise

सिख धर्म

ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ

सिख धर्म

पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह

आज के पावन पाठ

दैनिक नितनेम व सिमरन

पूजित देव: श्री वाहेगुरु (गुरबाणी) · शुक्ल पक्ष अष्टमी

आत्मिक शांति, सिमरन एवं ईश्वरीय कृपा हेतु दैनिक नितनेम की पावन बाणियाँ।

आज का प्रमुख पाठ
जपजी साहिब
ਜਪੁ ਜੀ ਸਾਹਿਬ

आत्मिक शांति, सिमरन एवं ईश्वरीय कृपा हेतु दैनिक नितनेम की पावन बाणियाँ।

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज गुरु साहिबान की अमृतमयी वाणी, जिसका नित्य पाठ (नितनेम) मन को निर्मल और अकाल पुरख से जोड़ता है।

⭐प्रातःकालीन अमृत वाणी
जपजी साहिब
ਜਪੁ ਜੀ ਸਾਹਿਬ

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा उच्चरित प्रातःकाल की पहली वाणी, जो सत्य, हुकम और प्रभु-सिमरन का मार्ग प्रशस्त करती है।

रागों में निबद्ध वे पावन शबद जो मन की व्यथा मिटाकर परमात्मा के चरणों में अटूट विश्वास और प्रेम जगाते हैं।

⭐रक्षक परमात्मा का शबद
राखे राखनहार आपि उबारेनि
ਰਾਖੇ ਰਾਖਨਹਾਰੁ ਆਪਿ ਉਬਾਰਿਅਨੁ

पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी का यह शबद प्रभु के सर्व-रक्षक स्वरूप का विश्वास दिलाता है।

सिख धर्म की आधारशिला, जो एक ओंकार (सच्चे परमात्मा) के निर्भय, निर्वैर और अकाल स्वरूप का साक्षात्कार कराती है।

⭐सिख धर्म का मूलमंत्र
मूल मंतर (ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ)
ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ

गुरु नानक देव जी का आदि वचन, जो सृष्टि के एकमात्र रचयिता अकाल पुरख की महिमा का प्रथम उद्घोष है।

सिख गुरु साहिबान एवं अमर शहीदों के जीवन के पावन प्रेरक प्रसंग (साखियां), जो सत्य, सेवा, निर्भयता और सर्वोच्च बलिदान की अमर प्रेरणा देते हैं।

⭐सर्वोच्च बलिदान एवं निष्ठा
बाबा दीप सिंह जी: शीश हथेली पर रख सचखंड हरिमंदिर साहिब की रक्षा
ਬਾਬਾ ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ ਸ਼ਹੀਦ

अमृतसर धाम की पावन मर्यादा की रक्षा हेतु अपने शीश की भेंट देने वाले महान ज्ञानी और योद्धा बाबा दीप सिंह जी की पावन अमर गाथा।

दस गुरु साहिबान के चरण-चिह्नों और तपस्या से पावन हुए ऐतिहासिक गुरुद्वारे, जहाँ अखंड गुरबाणी कीर्तन और पवित्र सरोवर जन-जन को शांति प्रदान करते हैं।

⭐प्रथम पातशाह का पावन जन्मस्थान
गुरुद्वारा जन्म स्थान ननकाना साहिब: गुरु नानक देव जी का पावन प्राकट्य स्थल
ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਜਨਮ ਅਸਥਾਨ ਸ੍ਰੀ ਨਨਕਾਣਾ ਸਾਹਿਬ

जगत गुरु श्री गुरु नानक देव जी का पावन प्राकट्य धाम, जहाँ से संपूर्ण मानवता के लिए सत्य, नाम-सिमरन और प्रेम का दिव्य प्रकाश प्रस्फुटित हुआ।

सिख जीवन पद्धति के आधारस्तंभ: अमृत वेला साधना, निष्काम सेवा, पवित्र लंगर परंपरा और सत्य के मार्ग पर चलने की मर्यादा का विस्तृत विवेचन।

⭐निःस्वार्थ सेवा का पावन स्तम्भ
सेवा एवं लंगर: निःस्वार्थ सेवा ही प्रभु भक्ति
ਸੇਵਾ ਕਰਤ ਹੋਇ ਨਿਹਕਾਮੀ

गुरु नानक देव जी द्वारा स्थापित लंगर और सेवा की पावन परंपरा, जो सामाजिक समता और ईश्वरीय प्रेम का जीवंत प्रमाण है।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन दार्शनिक चिंतन: एक ओंकार का शाश्वत सत्य, हुकम की रज़ा में जीवन जीना और नाम-सिमरन से मुक्ति की प्राप्ति।

⭐परम सत्य का मूल स्वरूप
एक ओंकार: एक अद्वितीय निराकार परमात्मा का परम सत्य
ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ

गुरमत का पहला महामंत्र जो उद्घोष करता है कि परमात्मा एक है, सर्वव्यापी, निर्भय, निर्वैर और काल से परे है।

गुरसिख के दैनिक जीवन की पावन साधना: अमृत वेले से लेकर शयन काल तक पंच बाणियों का नितनेम पाठ एवं अरदास की शास्त्रोक्त मर्यादा।

⭐दैनिक अमृत साधना
नितनेम: दैनिक सिख प्रार्थना और आध्यात्मिक साधना की मर्यादा
ਨਿਤਨੇਮ ਗੁਰਬਾਣੀ ਮਰਯਾਦਾ

अमृत वेले की पावन बाणियों (जपजी, जाप साहिब, तव-प्रसाद सवैये) से लेकर रहिरास और सोहिला तक का क्रमबद्ध आध्यात्मिक विधान।