Bharat Devotion
Embroidered Buddha seated in meditation on a pink lotus, with a golden dharma wheel and a white stupa in the mountains

बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म

📜 कैनोनिकल त्रिपिटक संग्रह

धम्मपद — 26 वर्ग एवं 423 पालि गाथाएँ

भगवान बुद्ध के अमर उपदेशों का संपूर्ण संकलन। सभी 26 वर्गों की 423 गाथाओं का मूल पालि पाठ (IAST), अर्थ, उच्चारण एवं पृष्ठभूमि सहित अध्ययन करें।

धम्मपद अध्ययन केंद्र खोलें →

पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह

आज के पावन पाठ

दैनिक परित्त व वंदना

पूजित देव: त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) · शुक्ल पक्ष अष्टमी

मैत्री भाव, मंगल कामना, सत्य एवं निर्वाण मार्ग के चिंतन हेतु पावन परित्त सूत्र।

आज का प्रमुख पाठ
महामंगल सुत्त
मङ्गलसुत्तं

मैत्री भाव, मंगल कामना, सत्य एवं निर्वाण मार्ग के चिंतन हेतु पावन परित्त सूत्र।

आज के सभी 6 पाठ करें →

पालि त्रिपिटक में संरक्षित तथागत बुद्ध के मूल उपदेश, जो सचेतनता, करुणा और निर्वाण प्राप्ति का व्यावहारिक मार्ग दिखाते हैं।

⭐सर्वोच्च मंगलकारी उपदेश
महामंगल सुत्त
मङ्गलसुत्तं

भगवान बुद्ध द्वारा प्रतिपादित जीवन के ३८ सर्वश्रेष्ठ मंगल, जो मनुष्य को सुखी और शांत जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

बुद्ध धर्म की शिक्षाओं को सरल एवं हृदयस्पर्शी छंदों में प्रस्तुत करने वाली गाथाएं, जो नित्य चिंतन और मन की शुद्धि के लिए उपयोगी हैं।

⭐मन और कर्म के द्वैध श्लोक
धम्मपद — यमकवग्ग
मनोपुब्बङ्गमा धम्मा

धम्मपद का वह अमर उपदेश जो बताता है कि मन ही सभी विचारों का अगुवा है, और वैर से कभी वैर शांत नहीं होता, केवल प्रेम से शांत होता है।

महायान एवं वज्रयान परंपरा के पवित्र मंत्र, जो मन में असीम करुणा जगाते हैं और आध्यात्मिक बाधाओं का शमन करते हैं।

⭐अवलोकितेश्वर का षडक्षरी मंत्र
ॐ मणि पद्मे हूँ (षडक्षरी महामंत्र)
ཨོཾ་མ་ཎི་པདྨེ་ཧཱུྃ

बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का पावन मंत्र, जो सभी प्राणियों के प्रति असीम मैत्री, करुणा और ज्ञान का संचार करता है।

त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) की शरण ग्रहण करने और मन की शांति हेतु शील धारण करने के पावन पाठ।

⭐त्रिशरण एवं पंचशील
त्रिशरण एवं पंचशील वंदना
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स

तथागत बुद्ध, पावन धम्म और संघ के चरणों में नतमस्तक होकर आत्म-कल्याण का संकल्प।

बोधिसत्व के पूर्व जन्मों की प्रेरक कथाएं, जो दान, शील, क्षमा और करुणा जैसी दस पारमिताओं का जीवन में महत्व समझाती हैं।

⭐साहस और निष्ठा की कथा
अब्भन्तर जातक: सुवर्ण आम्र और निष्ठावान शुक
अब्भन्तर जातक

सच्ची निष्ठा, त्याग और धर्म-पालन की प्रेरणा देने वाली तथागत की अमर पूर्व-जन्म गाथा।

तथागत शाक्यमुनि बुद्ध के जीवन की ऐतिहासिक गाथाएं: महाभिनिष्क्रमण, बोधिवृक्ष तले ज्ञानोदय, धर्मचक्र प्रवर्तन और अंगुलिमाल जैसे शिष्यों का हृदय परिवर्तन।

⭐परम संबोधि का प्राकट्य
बुद्ध का ज्ञानोदय: बोधगया में मार-विजय और सत्य का साक्षात्कार
सम्मासम्बुद्ध बोधि ज्ञान

बोधगया के पावन बोधिवृक्ष तले मार की सेना पर विजय प्राप्त कर तथागत द्वारा दुःखों के अंत और निर्वाण का मार्ग खोजने की अमर गाथा।

तथागत बुद्ध द्वारा निर्दिष्ट चार परम पावन तीर्थ: लुम्बिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान), सारनाथ (प्रथम उपदेश) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण) का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परिचय।

⭐चार पावन बौद्ध तीर्थ
बुद्ध के चार पवित्र तीर्थ: लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर
चत्तारि इमानि आनन्द सद्धास्स कुलपुत्तस्स दस्सनीयानि

महापरिनिर्वाण सुत्त में भगवान बुद्ध द्वारा आनंद को उपदिष्ट चार पवित्र स्थल, जहाँ दर्शन मात्र से मन में संवेग और श्रद्धा उत्पन्न होती है।

बुद्ध की व्यावहारिक साधना पद्धति: आनापानसति (श्वास-सजगता), विपश्यना ध्यान, मैत्री साधना और दैनिक जीवन में आर्य अष्टांगिक मार्ग का आचरण।

⭐आत्म-दर्शन की प्राचीन विद्या
विपश्यना ध्यान: वास्तविकता को उसके यथार्थ रूप में देखने की साधना
विपस्सना भावनावली

चित्त की एकाग्रता और संवेदनाओं के प्रति समता भाव रख मन के विकारों को समूल नष्ट करने वाली तथागत की अमर ध्यान परंपरा।

बौद्ध प्रज्ञा के गूढ़ सिद्धांत: कार्य-कारण का शाश्वत चक्र (प्रतीत्यसमुत्पाद), आत्मा का अनित्यता सिद्धांत (अनात्त) और महायान की परम सत्य शून्यता दृष्टि।

⭐कार्य-कारण का सार्वभौमिक नियम
प्रतीत्यसमुत्पाद: अन्योन्याश्रित अस्तित्व का शाश्वत नियम
यः प्रतीत्यसमुत्पादं पश्यति स धर्मं पश्यति

'जो प्रतीत्यसमुत्पाद को देखता है, वह धम्म को देखता है' — समस्त सृष्टि के कार्य-कारण संबंध और दुःख-मुक्ति का मूल रहस्य।

भगवान बुद्ध के सम्मुख दीप, पुष्प, जल और धूप अर्पण की पारंपरिक विधि, त्रिशरण-पंचशील ग्रहण और वेसाक (बुद्ध पूर्णिमा) पूजन का क्रम।

⭐दैनिक श्रद्धा अर्पण
बुद्ध पूजा: पारंपरिक श्रद्धा, अर्पण एवं वंदना की संपूर्ण विधि
बुद्ध पूजा गाथा एवं विधि

तथागत के पावन गुणों का स्मरण करते हुए निष्कपट भाव से दीप, जल और सुगंधित द्रव्य अर्पण करने का सुंदर शास्त्रोक्त मार्ग।