Bharat Devotion
बौद्ध धर्म

मंत्र

गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र सहित 20+ पावन मंत्र — वैदिक, तांत्रिक और बौद्ध परंपराओं से — मूल लिपि, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।

व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
मन् (मनन करना) + त्रै (त्राण, रक्षा व मुक्ति)वैदिक संस्कृत

मनन करने पर जो रक्षा और मुक्ति प्रदान करे — अलौकिक ध्वनि-तरंगों से युक्त पावन सूत्र। एकाग्र चित्त से जप करने पर यह मन की चंचलता को शांत करता है, अंतःकरण को शुद्ध करता है और सुप्त आत्म-चेतना को जाग्रत करता है।

छंद एवं शास्त्रीय संरचना
गायत्री, अनुष्टुप् आदि वैदिक छंद एवं बीजाक्षर

प्रायः ओंकार से प्रारंभ, विशिष्ट ऊर्जा-बीज (ह्रीं, क्लीं, श्रीं आदि), अभीष्ट देव का नाम, और अंत में समर्पण-मुद्रा (नमः, स्वाहा या वषट्)।

वैश्विक साहित्यिक तुलना
सूफी ज़िक्र (Dhikr) एवं ईसाई हेसीकैस्ट प्रार्थना

निरंतर पवित्र ध्वनि-स्मरण

सूफी संतों के 'ज़िक्र' (अल्लाह के नाम की सतत ध्वनि) और पूर्वी ईसाई संतों की 'हेसीकैस्ट' जप-पद्धति के समान, जहाँ सांस-सांस पर पवित्र शब्द दोहराकर मन को शून्य में लीन किया जाता है।

साधना एवं व्यावहारिक पाठ:नित्य ध्यान, जप-साधना, गुरु-दीक्षा और मानसिक एकाग्रता की मूल धुरी; यह अंतर्मन के विकारों को नष्ट कर आत्म-शांति देता है।

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