बौद्ध धर्म
सुत्त
पालि त्रिपिटक से भगवान बुद्ध के उपदेश — धम्मपद, रत्न सूत्र सहित — मूल पालि पाठ और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
सुत्त (पालि) / सूत्र (संस्कृत / धागा, नियम, धर्मोपदेश)पालि (त्रिपिटक का सुत्तपिटक)
भगवान बुद्ध का प्रामाणिक धर्मोपदेश — भगवान बुद्ध के श्रीमुख से निसृत वास्तविक उपदेश, जो चार आर्य सत्य, आर्य अष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्यसमुत्पाद और सतिपठ्ठान (सजगता) द्वारा निर्वाण का प्रत्यक्ष मार्ग दिखाते हैं।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
पालि गद्य एवं छंदबद्ध गाथाएँ
आनंद स्थविर द्वारा उद्धृत पारंपरिक साक्षी-वाक्य 'एवं मे सुतं' (मैंने ऐसा सुना है), स्थान व सभा का परिचय, धर्म-संवाद, और श्रोताओं द्वारा शरण-गमन।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
पहाड़ी उपदेश (Sermon on the Mount) एवं संतों के वचनप्रत्यक्षदर्शी का पवित्र उपदेश
ईसाई गॉस्पेल के 'पहाड़ी उपदेश' (Sermon on the Mount) के समान, जहाँ किसी तीसरे व्यक्ति की व्याख्या के बजाय सीधे महापुरुष के मूल वचनों का साक्षी-रूप में संकलन होता है।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:परित्त (सुरक्षा व शांति पाठ) हेतु सस्वर पाठ तथा विपश्यना ध्यान में प्रज्ञा और समता जाग्रत करने हेतु नित्य स्वाध्याय।