Bharat Devotion
Embroidered artwork for मंगल सूत्र (महामंगल सूत्र): Embroidered Buddha seated in meditation on a pink lotus, with a golden dharma wheel and a white stupa in the mountains

मंगल सूत्र (महामंगल सूत्र)

मंगल सूत्र (महामंगल सूत्र)

यह एक प्राचीन बौद्ध सूत्र है जिसमें भगवान बुद्ध ने एक देवता के प्रश्न पर जीवन के सबसे उत्तम मंगल (शुभ) कार्यों और गुणों को सरल शब्दों में समझाया है।

श्लोक

एवं मे सुतं: एकं समयं भगवा सावत्थियं विहरति जेतवने अनाथपिण्डिकस्स आरामे। अथ खो अञ्ञतरा देवता अभिक्कन्ताय रत्तिया अभिक्कन्तवण्णा केवलकप्पं जेतवनं ओभासेत्वा येन भगवा तेनुपसङ्कमि; उपसङ्कमित्वा भगवन्तं अभिवादेत्वा एकमन्तं अट्ठासि। एकमन्तं ठिता खो सा देवता भगवन्तं गाथाय अज्झभासि:
Evam me sutam: Ekam samayam bhagava savatthiyam viharati jetavane anathapindikassa arame. Atha kho anyatara devata abhikkantaya rattiya abhikkantavanna kevalakappam jetavanam obhasetva yena bhagava tenupasankami; Upasankamitva bhagavantam abhivadetva ekamantam atthasi. Ekamantam thita kho sa devata bhagavantam gathaya ajjhabhasi:

श्लोक 1

"बहू देवा मनुस्सा च, मङ्गलानि अचिन्तयुं; आकङ्खमाना सोत्थानं, ब्रूहि मङ्गलमुत्तमं।"
Bahu deva manussa cha, mangalani achintayum; Akankhamana sotthanam, bruhi mangalamuttamam.

श्लोक 2

असेवना च बालानं, पण्डितानञ्च सेवना; पूजा च पूजनीयानं, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Asevana cha balanam, panditanancha sevana; Puja cha pujaniyanam, etam mangalamuttamam.

श्लोक 3

पतिरूपदेसवासो च, पुब्बे च कतपुञ्ञता; अत्तसम्मापणिधि च, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Patirupadesavaso cha, pubbe cha katapunyata; Attasammapanidhi cha, etam mangalamuttamam.

श्लोक 4

बाहुसच्चञ्च सिप्पञ्च, विनयो च सुसिक्खितो; सुभासिता च या वाचा, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Bahusaccancha sippancha, vinayo cha susikkhito; Subhasita cha ya vacha, etam mangalamuttamam.

श्लोक 5

मातापितु उपट्ठानं, पुत्तदारस्स सङ्गहो; अनाकुला च कम्मन्ता, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Matapitu upatthanam, puttadarassa sangaho; Anakula cha kammanta, etam mangalamuttamam.

श्लोक 6

दानञ्च धम्मचरिया च, ञातकानञ्च सङ्गहो; अनवज्जानि कम्मानि, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Danancha dhammachariya cha, nyatakanancha sangaho; Anavajjani kammani, etam mangalamuttamam.

श्लोक 7

आरती विरती पापा, मज्जपाना च संयमो; अप्पमादो च धम्मेसु, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Arati virati papa, majjapana cha samyamo; Appamado cha dhammesu, etam mangalamuttamam.

श्लोक 8

गारवो च निवातो च, सन्तुट्ठि च कतञ्ञुता; कालेन धम्मस्सवनं, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Garavo cha nivato cha, santutthi cha katanyuta; Kalena dhammassavanam, etam mangalamuttamam.

श्लोक 9

खन्ती च सोवचस्सता, समणानञ्च दस्सनं; कालेन धम्मसाकच्छा, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Khanti cha sovacassata, samanannancha dassanam; Kalena dhammasakaccha, etam mangalamuttamam.

श्लोक 10

तपो च ब्रह्मचरियञ्च, अरियसच्चान दस्सनं; निब्बानसच्छिकिरिया च, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Tapo cha brahmacariyancha, ariyasaccana dassanam; Nibbanasacchikiriya cha, etam mangalamuttamam.

श्लोक 11

फुट्ठस्स लोकधम्मेहि, चित्तं यस्स न कम्पति; असोकं विरजं खेमं, एतं मङ्गलमुत्तमं।
Phutthassa lokadhammehi, chittam yassa na kampati; Asokam virajam khemam, etam mangalamuttamam.

श्लोक 12

एतादिसानि कत्वान, सब्बत्थमपराजिता; सब्बत्थ सोत्थिं गच्छन्ति, तं तेसं मङ्गलमुत्तमन्"ति।
Etadisani katvana, sabbatthamaparajita; Sabbattha sotthim gacchanti, tam tesam mangalamuttamam.

श्लोक 13

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह पाठ 'मंगल सूत्र' (Maṅgala Sutta) के नाम से जाना जाता है, जो बौद्ध धर्म के सबसे लोकप्रिय और प्रिय सूत्रों में से एक है। यह पालि भाषा के 'खुद्दक निकाय' (लघु संग्रह) के अंतर्गत आता है और पारंपरिक रूप से बौद्ध देशों जैसे श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार आदि में घरों, मंदिरों और धार्मिक समारोहों में शांति, समृद्धि और आशीर्वाद के लिए पढ़ा जाता है। इसकी रचना का श्रेय स्वयं भगवान बुद्ध को दिया जाता है, और यह सभी बौद्ध परंपराओं में समान रूप से पूजनीय है।

इस पाठ के विषय में

क्या आप जानते हैं?

रचना का स्रोत

यह गाथा बौद्ध धर्म के सबसे प्रसिद्ध सूत्रों में से एक, 'मंगल सूत्र' (महामंगल सूत्र) का हिस्सा है। यह सूत्र भगवान बुद्ध द्वारा सावत्थी नगर के जेतवन विहार में एक देवता के प्रश्न के उत्तर में दिया गया था।

संरचना और शैली

इसमें 12 गाथाएँ हैं, जिनमें से पहली देवता का प्रश्न है और बाकी 11 बुद्ध के उत्तर। प्रत्येक गाथा में 'एतं मंगलमुत्तमं' (यह सर्वोच्च मंगल है) का समापन वाक्य है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को शुभ बताता है।

शिक्षा का क्रम

बुद्ध ने मंगल को बाहरी रीति-रिवाजों या पूजा में नहीं, बल्कि 38 आंतरिक और सामाजिक गुणों में बांटा है। इनमें मूर्खों का साथ न करना, विद्वानों का संग, आज्ञाकारिता, दान, धर्माचरण, शील, संयम, क्षमा, और अंत में निर्वाण की प्राप्ति शामिल हैं।

ऐतिहासिक महत्व

यह सूत्र थेरवाद बौद्ध धर्म में अत्यंत पूजनीय है और इसे अक्सर घरों, मंदिरों और समारोहों में पाठ किया जाता है। इसे 'रतन सूत्र' और 'मेत्ता सूत्र' के साथ तीन सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा सूत्रों (परित्त) में गिना जाता है।

अंतिम गाथा का सार

अंतिम गाथा बताती है कि जो इन मंगलों का पालन करता है, वह संसार की आठ अनिश्चितताओं (लाभ-हानि, यश-अपयश, निंदा-प्रशंसा, सुख-दुख) से विचलित नहीं होता और सर्वत्र निर्भय व कुशल रहता है। यही सर्वोच्च मंगल है।

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