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Embroidered artwork for वज्रसत्त्व मंत्र – शुद्धि और सिद्धि का पवित्र मंत्र: Embroidered Buddha seated in meditation on a pink lotus, with a golden dharma wheel and a white stupa in the mountains

वज्रसत्त्व मंत्र – शुद्धि और सिद्धि का पवित्र मंत्र

वज्रसत्त्व मंत्र – शुद्धि और सिद्धि का पवित्र मंत्र

यह मंत्र भगवान वज्रसत्त्व (एक बुद्ध-स्वरूप, जो अटल चेतना और शुद्धि के प्रतीक हैं) से प्रार्थना है। इसके जाप से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं, सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

श्लोक

ॐ वज्रसत्त्व समयमनुपालय समयस्त्वोपियोतिष्ठदृढो मे भव सुतोष्यो मे भव अनुरक्तो मे भव सुपोष्यो मे भव सर्वसिद्धिं प्रयच्छ मे सर्वकर्मसु च मे चित्तं श्रीयः कुरु हुं ह ह ह ह होः भगवन् सर्वतथागत वज्र मा मे मुञ्च वज्रि भव महासमयसत्त्व आः
Om Vajrasattva Samayam Anupalaya Samayastvopiyotishtha Dridho Me Bhava Sutoshyo Me Bhava Anurakto Me Bhava Suposhyo Me Bhava Sarva Siddhim Prayachha Me Sarva Karmasu Cha Me Chittam Shriyah Kuru Hum Ha Ha Ha Ha Hoh Bhagavan Sarva Tathagata Vajra Ma Me Muncha Vajri Bhava Maha Samaya Sattva Ah

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह मंत्र वज्रयान बौद्ध परंपरा का एक प्रमुख मंत्र है, जिसे प्रायः 'सौ अक्षरों का मंत्र' (हालाँकि यहाँ पूरा रूप नहीं दिया गया) कहा जाता है। इसका प्रयोग ध्यान और जप में विशेष रूप से नकारात्मक कर्मों को शुद्ध करने तथा मन को एकाग्र करने के लिए किया जाता है। यह मंत्र प्राचीन बौद्ध तंत्र ग्रंथों में मिलता है और तिब्बती बौद्ध धर्म में अत्यंत लोकप्रिय है, जहाँ इसे गुरु से दीक्षा लेने के बाद ही जपने की परंपरा है।

क्या आप जानते हैं?

मूल मंत्र

यह वज्रसत्त्व का प्रसिद्ध 'सौ-अक्षर मंत्र' है, जिसे बौद्ध परंपरा में सर्वाधिक पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। इसमें 'वज्र' का अर्थ है वज्र के समान अटल और अभेद्य ज्ञान, और 'सत्त्व' का अर्थ है सत्व या सार।

शुद्धिकरण का मंत्र

यह मंत्र मुख्यतः मन, वाणी और शरीर की सभी नकारात्मकताओं, पापों और बाधाओं को शुद्ध करने के लिए जपा जाता है। माना जाता है कि इसके जप से आत्मा शुद्ध होती है और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।

संरचना

मंत्र में 'समय' शब्द का अर्थ है पवित्र प्रतिज्ञा या व्रत। इसमें भगवान वज्रसत्त्व से प्रार्थना की गई है कि वे अपनी प्रतिज्ञा का पालन करें, भक्त को दृढ़ बनाएं, उसे संतुष्ट करें और उसके प्रति अनुरक्त रहें।

बीज अक्षर

मंत्र के अंत में 'हुं', 'ह ह ह ह होः' और 'आः' जैसे बीज अक्षर (मूल ध्वनियाँ) हैं, जिन्हें ब्रह्मांड की मौलिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इन ध्वनियों के उच्चारण से मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत करने में सहायता मिलती है।

तिब्बती परंपरा

यह मंत्र तिब्बती बौद्ध धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ इसे 'डोरजे सेम्पा' का मंत्र कहा जाता है। इसे विशेष रूप से ध्यान और साधना के दौरान जपा जाता है ताकि मन की गहराइयों में छिपी अशुद्धियों को दूर किया जा सके।

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