भारत भक्ति — सत्य की खोज में भारत के पवित्र ग्रंथ
भारत की पावन परम्पराएं
सर्वे भवन्तु सुखिनः
sarve bhavantu sukhinaḥ · सभी प्राणी सुखी रहें, रोगमुक्त रहें एवं सबका परम कल्याण हो।
ऋषियों, वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता एवं पावन भक्ति परम्पराओं का शाश्वत आध्यात्मिक प्रवाह।
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ
ik oankar satgur prasad · परमात्मा एक है, जो सच्चे गुरु की असीम कृपा से प्राप्त होता है।
दस गुरु साहिबान एवं संतों की पावन गुरबाणी — नाम सिमरन, समता एवं सेवा का अमर मार्ग।
परस्परोपग्रहो जीवानाम्
parasparopagraho jīvānām · जीवों का परस्पर उपकार और रक्षा ही जीवन का वास्तविक धर्म है।
परम अहिंसा, आत्म-संयम, समता भाव एवं २४ तीर्थंकरों के वंदन का पावन मोक्ष मार्ग।
भवतु सब्ब मङ्गलं
bhavatu sabba maṅgalaṃ · समस्त जीवों का कल्याण, मंगल एवं दुःख से परम मुक्ति हो।
बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग, मैत्री भावना, सत्य दर्शन एवं त्रिपिटक के पावन परित्त सूत्र।
ಕಾಯಕವೇ ಕೈಲಾಸ
kāyakavē kailāsa · सत्कर्म ही ईश्वर का पावन धाम (कैलास) है।
जगद्गुरु बसवेश्वर एवं शरणों का पावन वचन साहित्य — सामाजिक समता, कर्म-पूजा ('कायकावे कैलास') एवं इष्टलिंग भक्ति।
सतनाम साहिब
satnam sahib · सत्य ही परमात्मा का शाश्वत नाम है।
संत कबीरदास जी की अमर साखी, दोहे एवं पद — निर्गुण भक्ति, आत्म-ज्ञान एवं सत्य की स्पष्ट अनुभूति।
बेगमपुरा सहर को नाउ
begampura sahar ko nau · बेगमपुरा — दुःख, भय और भेद-भाव से रहित पावन धाम।
श्री गुरु रविदास जी की पावन वाणी — बेगमपुरा का दिव्य दर्शन, सामाजिक समरसता एवं अनन्य प्रभु भक्ति।
योगः कर्मसु कौशलम्
yogaḥ karmasu kauśalam · कर्मों में कुशलता और समत्व ही योग है।
महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग एवं हठयोग परम्परा — चित्त की स्थिरता, प्राणायाम एवं आत्म-साक्षात्कार का विज्ञान।







