हिन्दू धर्म
आरती
हिंदू पूजा के समापन पर दीप अर्पण के साथ गाए जाने वाले आरती गीत — मूल लिपि, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
आरात्रिक (आ + रात्रि = जो अंधकार का नाश करे)संस्कृत 'आरात्रिक' से प्राकृत व हिंदी
अंधकार को हरने वाली मंगल आरती — दीप-प्रज्वलन और कर्पूर-आरती का मंगलमय अनुष्ठान। जैसे कर्पूर जलकर बिना भस्म छोड़े विलीन हो जाता है, वैसे ही भक्त का अहंकार प्रभु के दिव्य प्रकाश में पूर्णतः समर्पित हो जाता है।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
तालयुक्त लोकभाषा गीत, घंटी, शंख और करताल की संगीतमय ध्वनि
एक गूँजते हुए मुखड़े से आरंभ जिसे सब मिलकर दोहराते हैं, मध्य में प्रभु की कृपा और सौंदर्य का गान, और अंत में 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' जैसे मंत्रों के साथ पुष्पांजलि और चरणामृत ग्रहण।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
ईसाई वेस्पर्स (Vespers) एवं ल्यूसरनेरियम (Service of Light)संध्याकालीन दीप-अर्चन
प्राचीन ईसाई मठों की 'ल्यूसरनेरियम' परंपरा के समान, जहाँ गोधूलि वेला में दीपक जलाकर 'दिव्य प्रकाश' का गान किया जाता है ताकि रात का अंधकार आत्मा को न छू सके।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:प्रातः (मंगला) और संध्या (संध्या आरती) में दिनभर की पूजा के मंगल समापन, घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार और दीप-ज्योत के वंदन हेतु।