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Embroidered artwork for श्री चित्रगुप्त जी की आरती: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

चित्रगुप्त जी की आरती: कर्मों का लेखा रखने वाले देवता की स्तुति, उनके स्वरूप का वर्णन और उनकी कृपा की प्रार्थना।

श्लोक

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Om Jai Chitragupt Hare, Swami Jai Chitragupt Hare. Bhaktjanon Ke Ichchhit, Phal Ko Poorn Kare. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 1

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यशछायी ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Vighn Vinashak Mangalkarta, Santan Sukhdayi. Bhaktan Ke Pratipalak, Tribhuvan Yashchhayi. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 2

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत, पीताम्बर राजै मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अंग साजै ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Roop Chaturbhuj, Shyamal Moorat, Peetambar Raajai. Maatu Iraavati, Dakshina, Vaam Ang Saajai. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 3

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक, प्रभु अंतर्यामी सृष्टि सम्हारन, जन दुःखहारन, प्रकट भये स्वामी ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Kasht Nivaarak, Dusht Samhaarak, Prabhu Antaryaami. Srishti Samhaaran, Jan Dukhhaaran, Prakat Bhaye Swami. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 4

कलम, दवात, शंख, पत्रिका, कर में अति सोहै वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मनमोहै ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Kalam, Davaat, Shankh, Patrika, Kar Mein Ati Sohai. Vaijayanti Vanmaala, Tribhuvan Manmohai. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 5

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये तैंतीस कोटि देवी देवता, तुम्हारे चरणन में धाये ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Vishwa Nyaay Ka Kaary Sambhaala, Brahma Harshaaye. Taintis Koti Devi Devta, Tumhaare Charnan Mein Dhaaye. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 6

नृप सुदास अरू भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा वेग विलम्ब न कीन्हौं, इच्छित फल दीन्हा ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Nrip Sudaas Aru Bheeshma Pitaamah, Yaad Tumhein Keenha. Veg Vilamb Na Keenhon, Ichchhit Phal Deenha. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 7

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Daara, Sut, Bhagini, Sab Apne Swaasth Ke Karta. Jaaoon Kahan Sharan Mein Kiski, Tum Taj Main Bharta. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 8

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Bandhu, Pita Tum Swami, Sharan Gahoon Kiski. Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karoon Jiski. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 9

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Jo Jan Chitragupt Ji Ki Aarti, Prem Sahit Gaavain. Chaurasi Se Nishchit Chhootain, Ichchhit Phal Paavain. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 10

न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी, पाप पुण्य लिखते हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते
Nyaayaadheesh Baikunth Nivaasi, Paap Punya Likhte. Ham Hain Sharan Tihaari, Aas Na Dooji Karte.

श्लोक 11

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे ॐ जय चित्रगुप्त हरे
Om Jai Chitragupt Hare, Swami Jai Chitragupt Hare. Bhaktjanon Ke Ichchhit, Phal Ko Poorn Kare. Om Jai Chitragupt Hare.

श्लोक 12

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

यह आरती चित्रगुप्त जी की स्तुति है, जिन्हें हिंदू परंपरा में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा रखने वाला और धर्मराज यमराज का सहायक माना जाता है। इसे घरों और मंदिरों में गाया जाता है, विशेष रूप से यम द्वितीया (भाई दूज) पर होने वाली चित्रगुप्त पूजा में, जो दीपावली के दो दिन बाद आती है; कायस्थ परिवारों में उनकी आराधना का विशेष प्रचलन है। 'ॐ जय ... हरे' की परिचित आरती-शैली में रची यह स्तुति सरल और गेय है, जिसे दीपक के साथ भक्त सुख-शांति और मनोकामना की प्रार्थना के रूप में गाते हैं।

क्या आप जानते हैं?

कौन हैं चित्रगुप्त?

चित्रगुप्त हिंदू परंपरा में देवताओं के लेखाकार माने जाते हैं, जो प्रत्येक प्राणी के पाप-पुण्य का विवरण रखते हैं और उसे यमराज को सौंपते हैं। पद्म पुराण जैसे पौराणिक वर्णनों में उन्हें ब्रह्मा के शरीर से उत्पन्न बताया गया है, इसी कारण कायस्थ समाज उन्हें अपना आराध्य मानता है।

आरती का उद्देश्य

यह आरती शरणागति की प्रार्थना है, जिसमें विघ्न दूर करने और मनोकामना पूरी करने की याचना है। पद 10 में कहा गया है कि जो प्रेम से इसे गाता है, वह चौरासी लाख योनियों के चक्र से छूटता और इच्छित फल पाता है।

स्वरूप और पत्नियाँ

पद 3 और 5 में वे चतुर्भुज, श्यामल वर्ण और पीताम्बरधारी हैं; उनके हाथों में कलम, दवात, शंख और पत्रिका शोभित हैं और गले में वैजयन्ती वनमाला है। पद 3 में माता इरावती और दक्षिणा, जिन्हें उनकी दो पत्नियाँ माना जाता है, उनके वाम अंग में सुशोभित बताई गई हैं।

स्मरण करने वाले भक्त

पद 7 में नृप सुदास और भीष्म पितामह का उल्लेख है, जिन्होंने चित्रगुप्त को याद किया तो बिना विलंब इच्छित फल पाया। पद 6 में ब्रह्मा के हर्षित होने और तैंतीस कोटि देवी-देवताओं के उनके चरणों में आने का वर्णन है।

कब गाई जाती है

यम द्वितीया (भाई दूज) पर होने वाली चित्रगुप्त पूजा में कलम-दवात और बही-खातों का पूजन करके यह आरती गाने की परंपरा है, जो हर कर्म के लिखे और तौले जाने की भावना का स्मरण कराती है।

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