हिन्दू धर्म
अष्टकम्
बिल्वाष्टकम, लिंगाष्टकम सहित 30+ प्रामाणिक अष्टकम — आठ छंदों के संस्कृत स्तुति गीत — मूल लिपि और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
अष्ट (८)शास्त्रीय संस्कृत
आठ पद्यों (छंदों) का पावन स्तोत्र — आठ श्लोकों में निबद्ध शास्त्रीय संस्कृत काव्य, जो ईश्वर के सौंदर्य, परात्पर स्वरूप और अद्वैत दर्शन को द्रुत और संगीतमय गति से अभिव्यक्त करता है।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
भुजंगप्रयात, तोटक अथवा शार्दूलविक्रीड़ित छंद
आठ छंदबद्ध श्लोक जिनके अंतिम चरण में प्रायः एक आवर्ती गूँजती हुई टेक (जैसे 'नमः शिवाय' या 'भजे व्रजैक-मण्डनम्') होती है, जिसके उपरांत पाठ के फल का वर्णन करने वाला फलश्रुति श्लोक आता है।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
पाश्चात्य शास्त्रीय अष्टक एवं स्तुति-गीत (Octave Odes)अष्ट-पदीय शास्त्रीय कसीदा / गीत
प्राचीन ग्रीक एवं लैटिन काव्य की 'होरेसियन ओड' (Horatian Ode) या अष्टक संरचना के सदृश, जहाँ निर्धारित छंदबद्ध लय पाठक को आध्यात्मिक चरम की ओर ले जाती है।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:आदिशंकराचार्य द्वारा प्रतिष्ठित यह विधा प्रातः वंदन, शिवलिंग अभिषेक और ध्यान में आनंद, लयबद्धता और भक्ति-रस के संचार हेतु गाई जाती है।