Bharat Devotion
हिन्दू धर्म

कवच

देवी कवच, हनुमान कवच सहित दिव्य सुरक्षा का आह्वान करने वाली प्रामाणिक कवच प्रार्थनाएँ — मूल पाठ, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।

व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
कवच (ढाल, बख्तर, अभेद्य सुरक्षा)तांत्रिक एवं पौराणिक संस्कृत

दिव्य सुरक्षात्मक आध्यात्मिक कवच — एक गूढ़ सुरक्षात्मक अनुष्ठान जिसमें साधक अपने शरीर के प्रत्येक अंग, इंद्रिय, अंतःकरण और दसों दिशाओं में प्रभु की चैतन्य ऊर्जा को स्थापित कर भय और नकारात्मकता से मुक्त हो जाता है।

छंद एवं शास्त्रीय संरचना
अनुष्टुप् छंद एवं शरीर-न्यास पद्धति

कर-न्यास एवं अंग-न्यास से प्रारंभ, मस्तक से पैरों तक प्रत्येक अंग और दसों दिशाओं में देव-शक्तियों का आह्वान, और अंत में सुरक्षा-मुद्राओं का विधान।

वैश्विक साहित्यिक तुलना
सेल्टिक ईसाई लोरिका (सेंट पैट्रिक का कवच)

अभेद्य आध्यात्मिक ढाल

प्राचीन सेल्टिक ईसाई 'लोरिका' (जैसे सेंट पैट्रिक का कवच — 'ईसा मेरे आगे, ईसा मेरे पीछे, ईसा मेरे भीतर') के पूर्णतः सदृश, जहाँ परमात्मा की शक्ति को स्वयं के चारों ओर अभेद्य ढाल की तरह धारण किया जाता है।

साधना एवं व्यावहारिक पाठ:प्रातःकाल, यात्रा से पूर्व, रोग अथवा संकट काल में भय और ग्रह-दोषों के निवारण तथा असीम आत्मबल की प्राप्ति हेतु पठनीय।

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