हिन्दू धर्म
भगवद्गीता
श्रीमद्भगवद्गीता के १८ अध्यायों के समस्त पावन श्लोक — मूल संस्कृत पाठ, सस्वर उच्चारण एवं संपूर्ण हिंदी भावार्थ सहित।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
गै (गाना) → गीत (जो गाया गया हो)महाभारतकालीन शास्त्रीय संस्कृत
परमात्मा द्वारा गाया गया पावन दिव्य उपदेश — कुरुक्षेत्र के धर्मक्षेत्र में मोहग्रस्त अर्जुन को दिया गया निष्काम कर्म, ज्ञान और भक्तियोग का शाश्वत संदेश, जो जीवन-संग्राम में जूझते हर मनुष्य को सत्य और कर्तव्य का बोध कराता है।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
अनुष्टुप् छंद एवं विशिष्ट त्रिष्टुप् छंद
अठारह अध्याय, जो षट्क-त्रयी में विभाजित हैं: कर्मयोग (निःस्वार्थ कर्तव्य), भक्तियोग (अनन्य प्रेम व विश्वरूप दर्शन), और ज्ञानयोग (प्रकृति-पुरुष विवेक व मोक्ष)।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
प्लेटो के दार्शनिक संवाद एवं बोएथियस का 'कंसोलेशन'संकट में जीवन-दर्शन का संवाद
प्लेटो के अमर संवादों अथवा बोएथियस के 'कंसोलेशन ऑफ फिलॉसफी' की भांति, जो किसी पुस्तकालय के बजाय वास्तविक जीवन-संकट के क्षणों में मनुष्य को जीने का मार्ग दिखाते हैं।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:मानसिक द्वंद्व, अवसाद और मोह के निवारण हेतु नित्य स्वाध्याय; यह दैनिक जीवन में समत्व और अनासक्ति से कर्म करने की मार्गदर्शिका है।