योग
पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह
| पावन वर्ग एवं संख्या | आध्यात्मिक उद्देश्य एवं भावार्थ | प्रमुख प्रतिनिधि पाठ | संग्रह देखें |
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आज के पावन पाठ दैनिक योग साधना एवं स्वाध्याय पूजित देव: ईश्वर प्रणिधान शुक्ल पक्ष अष्टमी | चित्त की वृत्तियों के निरोध, आसन, प्राणायाम एवं आत्म-साक्षात्कार का अभ्यास। | आज का प्रमुख पाठ योगसूत्र — साधनपादयोगसूत्रम् चित्त की वृत्तियों के निरोध, आसन, प्राणायाम एवं आत्म-साक्षात्कार का अभ्यास। | आज के 4 पाठ → |
महर्षि पतंजलि कृत योगसूत्र2 पावन रचनाएं | चित्त की वृत्तियों के निरोध, अष्टांग योग और कैवल्य प्राप्ति का प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक दार्शनिक शास्त्र। | ⭐साधन पाद पतंजलि योगसूत्र — साधनपादयोगसाधनपादः तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान रूप क्रियायोग तथा यम-नियमादि अष्टांग योग का सविस्तार वर्णन। | सभी देखें |
हठयोग ग्रंथ (प्रदीपिका एवं घेरंड संहिता)2 पावन रचनाएं | शरीर शुद्धि (षट्कर्म), आसन, प्राणायाम और नाड़ी शोधन के मूल शास्त्रोक्त श्लोक। | ⭐हठयोग आधार हठयोग प्रदीपिका — प्रथमोपदेशःहठयोगप्रदीपिका शारीरिक स्थिरता और आरोग्य के लिए आसनों का विधान करने वाला हठयोग का सुप्रसिद्ध ग्रंथ। | सभी देखें |
मानव चेतना और प्राण ऊर्जा के सूक्ष्म विज्ञान का अध्ययन: महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग मार्ग, षट्चक्र-सप्तचक्र साधना और सत्त्व-रज-तम का संतुलन। | ⭐योग का अष्टविध मार्ग अष्टांग योग: महर्षि पतंजलि का योग दर्शन एवं आत्म-साक्षात्कार का अष्टविध मार्गयमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — आत्म-कल्याण और कैवल्य प्राप्ति का संपूर्ण शास्त्रोक्त सोपान। | सभी देखें | |
कैलाश मानसरोवर, ऋषिकेश, वसिष्ठ गुफा जैसे वे पावन हिमालयी तपोवन जहाँ प्राचीन काल से सिद्ध योगियों और ऋषियों ने मौन साधना और ध्यान सिद्ध किया। | ⭐आदि योगी का परम धाम कैलाश पर्वत एवं मानसरोवर: आदि योगी का परम धाम एवं विश्व की आध्यात्मिक धुरीकैलास पर्वत एवं मानसरोवर समस्त योग परंपराओं की सर्वोच्च आध्यात्मिक धुरी, जहाँ की नीरवता और पावनता साधक को समाधि की गहनतम अवस्था का अनुभव कराती है। | सभी देखें |
दैनिक योग साधना एवं स्वाध्याय
पूजित देव: ईश्वर प्रणिधान · शुक्ल पक्ष अष्टमी
चित्त की वृत्तियों के निरोध, आसन, प्राणायाम एवं आत्म-साक्षात्कार का अभ्यास।
चित्त की वृत्तियों के निरोध, आसन, प्राणायाम एवं आत्म-साक्षात्कार का अभ्यास।
चित्त की वृत्तियों के निरोध, अष्टांग योग और कैवल्य प्राप्ति का प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक दार्शनिक शास्त्र।
तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान रूप क्रियायोग तथा यम-नियमादि अष्टांग योग का सविस्तार वर्णन।
शरीर शुद्धि (षट्कर्म), आसन, प्राणायाम और नाड़ी शोधन के मूल शास्त्रोक्त श्लोक।
शारीरिक स्थिरता और आरोग्य के लिए आसनों का विधान करने वाला हठयोग का सुप्रसिद्ध ग्रंथ।
मानव चेतना और प्राण ऊर्जा के सूक्ष्म विज्ञान का अध्ययन: महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग मार्ग, षट्चक्र-सप्तचक्र साधना और सत्त्व-रज-तम का संतुलन।
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — आत्म-कल्याण और कैवल्य प्राप्ति का संपूर्ण शास्त्रोक्त सोपान।
कैलाश मानसरोवर, ऋषिकेश, वसिष्ठ गुफा जैसे वे पावन हिमालयी तपोवन जहाँ प्राचीन काल से सिद्ध योगियों और ऋषियों ने मौन साधना और ध्यान सिद्ध किया।
समस्त योग परंपराओं की सर्वोच्च आध्यात्मिक धुरी, जहाँ की नीरवता और पावनता साधक को समाधि की गहनतम अवस्था का अनुभव कराती है।
