हिन्दू धर्म
पावन वर्ग एवं सम्पूर्ण संग्रह
| पावन वर्ग एवं संख्या | आध्यात्मिक उद्देश्य एवं भावार्थ | प्रमुख प्रतिनिधि पाठ | संग्रह देखें |
|---|---|---|---|
आज के पावन पाठ रविवार पूजित देव: सूर्य देव एवं गायत्री माता शुक्ल पक्ष अष्टमी | आरोग्य, आत्मबल, तेज एवं गायत्री ध्यान हेतु भगवान सूर्य देव को समर्पित पावन दिन। | आज का प्रमुख पाठ गायत्री महामन्त्रॐ भूर्भुवः स्वः आरोग्य, आत्मबल, तेज एवं गायत्री ध्यान हेतु भगवान सूर्य देव को समर्पित पावन दिन। | आज के 3 पाठ → |
चालीसा (४० चौपाइयों का पावन स्तुति पाठ)12 पावन रचनाएं | मधुर अवधी एवं सरल हिंदी चौपाइयों में रचित चालीस छंदों का पावन स्तुति संग्रह। भक्तजन संकट-निवारण, आत्मबल और भगवत्कृपा की प्राप्ति हेतु इनका नित्य पाठ करते हैं। | ⭐सर्वाधिक कंठस्थ एवं लोकप्रिय पाठ श्री हनुमान चालीसाश्री हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह पावन चालीसा भय, संकट एवं विघ्नों को दूर कर भक्तों में असीम साहस, निष्ठा और आत्मबल का संचार करती है। | सभी देखें |
स्तोत्र (पावन संस्कृत स्तुति संग्रह)48 पावन रचनाएं | प्राचीन ऋषियों, महाकवियों एवं आदि शंकराचार्य द्वारा रचित दिव्य संस्कृत स्तुतियां। ये छंद परमात्मा के दिव्य स्वरूप, करुणा एवं महिमा का सस्वर गुणगान करते हैं। | ⭐दिव्य ताण्डव स्तुति शिव ताण्डव स्तोत्रम्शिवताण्डवस्तोत्रम् भगवान सदाशिव के नटराज स्वरूप और आनंद ताण्डव का सजीव, छंदोबद्ध एवं शक्तिवर्धक संस्कृत गान। | सभी देखें |
श्लोक एवं मंत्र (वैदिक प्रार्थनाएं एवं ध्वनियां)28 पावन रचनाएं | पवित्र वैदिक ऋचाएं और बीज मंत्र जो मन को शांत करते हैं, बुद्धि को प्रखर बनाते हैं और साधक को आत्म-चेतना से जोड़ते हैं। | ⭐सर्वश्रेष्ठ वैदिक महामंत्र गायत्री महामन्त्रॐ भूर्भुवः स्वः ऋग्वेद का शिरोमणि मंत्र, जो सविता (परम प्रकाश) का ध्यान कर हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करने की दिव्य प्रार्थना करता है। | सभी देखें |
आरती (दीपोत्सव एवं समर्पण के पावन गान)19 पावन रचनाएं | पूजा-अर्चना के अंत में कपूर और घी की ज्योति से आरती उतारते हुए गाए जाने वाले उल्लासपूर्ण भक्ति गीत, जो हृदय को कृतज्ञता से भर देते हैं। | ⭐सार्वभौमिक संध्या आरती ॐ जय जगदीश हरेॐ जय जगदीश हरे समस्त भारतवर्ष और विश्वभर में गूंजने वाली सर्वप्रिय आरती, जो प्रभु के शरणागत होकर जीवन के संताप हरने की करुण पुकार है। | सभी देखें |
अष्टकम् (आठ छंदों की मधुर काव्यात्मक स्तुति)17 पावन रचनाएं | आठ पावन श्लोकों में निबद्ध मधुर संस्कृत रचनाएं, जिनकी संगीतमय लय और भाव-प्रवणता मन को सहज ही भक्ति-रस में डुबो देती है। | ⭐परमानंद मधुर स्तुति मधुराष्टकम्अधरं मधुरं वदनं मधुरं महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा विरचित यह अनुपम स्तुति भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और स्वरूप को परम मधुर बताती है। | सभी देखें |
शास्त्र एवं अमर उपदेश (श्रीमद्भगवद्गीता एवं उपनिषद्)6 पावन रचनाएं | सत्य, निष्काम कर्म और आत्म-साक्षात्कार के अमर उपदेश, जो जीवन के द्वंद्वों में मनुष्य को कर्तव्य-निष्ठा और आत्म-शांति की राह दिखाते हैं। | ⭐निष्काम कर्मयोग का मूलमंत्र श्रीमद्भगवद्गीता (२.४७: कर्मण्येवाधिकारस्ते)कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन भगवान श्रीकृष्ण का वह अमर संदेश जो कर्म को ही पूजा मानकर फल की चिंता से मुक्त रहने की परम सीख देता है। | सभी देखें |
भजन एवं अभंग (संतों की प्रेममयी वाणी)73 पावन रचनाएं | मीराबाई, सूरदास, कबीर और वारकरी संतों की वह रसपूर्ण वाणी, जो शास्त्रीय नियमों से परे सीधे हृदय के प्रेम से परमात्मा को पुकारती है। | ⭐नाम-संकीर्तन का पावन संकल्प नाचू कीर्तनाचे रंगी — संत नामदेवनाचू कीर्तनाचे रंगी జ్ఞానదీપ లావూ జగీ संत नामदेव जी का वह पावन उद्घोष जिसमें कीर्तन के रंग में रंगकर संपूर्ण जगत में ज्ञान की ज्योति जलाने का संकल्प है। | सभी देखें |
पूजा विधि (प्रामाणिक पूजन एवं अनुष्ठान क्रम)7 पावन रचनाएं | पारंपरिक पूजा का प्रामाणिक एवं सुगम मार्गदर्शन — सामग्री सूची से लेकर आचमन, दीप प्रज्ज्वलन, षोडशोपचार पूजन और आरती तक। | ⭐सत्यनारायण गृह पूजन श्री सत्यनारायण पूजन विधिश्री सत्यनारायण व्रत पूजन सत्यस्वरूप भगवान श्री सत्यनारायण की गृह-पूजा की सरल एवं शास्त्रोक्त विधि, जो परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। | सभी देखें |
व्रत कथा (पवित्र उपवास एवं पौराणिक कथाएं)32 पावन रचनाएं | एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा और तीज-त्योहारों पर पढ़ी जाने वाली पावन कथाएं, जो व्रत के आध्यात्मिक महत्व और निष्ठा का बोध कराती हैं। | ⭐एकादशी व्रत माहात्म्य एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्वएकादशी व्रत महात्म्य प्रत्येक पक्ष की एकादशी को उपवास और हरि-स्मरण करने की विधि, महत्व और आत्म-शुद्धि का आध्यात्मिक रहस्य। | सभी देखें |
कवच (दिव्य रक्षा-स्तोत्र एवं सुरक्षा कवच)4 पावन रचनाएं | शरीर के प्रत्येक अंग, इंद्रिय और दिशा की रक्षा हेतु ईश्वरीय कृपा का आवाहन करने वाले प्राचीन एवं सिद्ध रक्षा-स्तोत्र। | ⭐देवी का अभेद्य कवच श्री चण्डी कवच (दुर्गा कवच)अथ श्री चण्डीकवचम् मार्कण्डेय पुराण से उद्धृत मां नवदुर्गा का पावन कवच, जो साधक को सभी भयों और विपत्तियों से सुरक्षित रखता है। | सभी देखें |
सहस्रनाम (सहस्र पावन नामावलियां)5 पावन रचनाएं | परमात्मा के एक सहस्र (१,०००) दिव्य नामों और अनंत गुणों का सस्वर जप, जो मन को एकाग्र कर सर्व-व्यापकता का अनुभव कराता है। | ⭐सर्वश्रेष्ठ सहस्रनाम श्री विष्णु सहस्रनाम — ध्यान श्लोकशान्ताकारं भुजगशयनं महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट, जीवन में शांति और मुक्ति प्रदान करने वाली महास्तुति। | सभी देखें |
कथा एवं उद्भव गाथा (पावन पौराणिक आख्यान)22 पावन रचनाएं | रामायण, महाभारत और पुराणों की प्रेरक कथाएं एवं स्तोत्रों के दिव्य उद्भव के आख्यान, जो धर्म और समर्पण का रहस्य समझाते हैं। | ⭐पावन उद्भव गाथा हनुमान चालीसा का पावन उद्भव: तुलसीदास जी का समर्पणश्री हनुमान चालीसा प्राकट्य कथा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा कारागार में ४० दिनों तक अनन्य शरणागति से हनुमान चालीसा की रचना और संकटमोचन की कृपा की गाथा। | सभी देखें |
पवित्र तीर्थ एवं धाम (दिव्य तीर्थ स्थल एवं परिक्रमा)26 पावन रचनाएं | भारतवर्ष के परम पावन तीर्थों एवं धामों का विस्तृत परिचय — द्वादश ज्योतिर्लिंग, चार धाम, पंच केदार एवं पवित्र परिक्रमा पथ। | ⭐द्वादश ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग: नाम, स्थान एवं माहात्म्यसौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् भारत भर में प्रतिष्ठित भगवान शिव के १२ पावन ज्योतिर्लिंग, जो महादेव के दिव्य प्रकाश और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण कराते हैं। | सभी देखें |
धार्मिक ज्ञान एवं परंपराएं (भक्ति, संस्कार एवं प्रतीक)30 पावन रचनाएं | भक्ति आंदोलन, पावन प्रतीकों (रुद्राक्ष, तुलसी, शंख) और सनातन धर्म के दैनिक संस्कारों के आध्यात्मिक महत्व का विवेचन। | ⭐भक्ति आंदोलन भक्ति आंदोलन: प्रेम, समता और शरणागतिभक्ति द्राविड़ ऊपजी, लाए रामानंद समूचे भारत में जन-जन के हृदय को परमात्मा के प्रेम से जोड़ने वाले संतों और उनकी अमर भक्ति परंपरा का इतिहास। | सभी देखें |
आध्यात्मिक दर्शन (वेदान्त एवं दार्शनिक विचार)8 पावन रचनाएं | आत्मा, परब्रह्म, अद्वैत और मोक्ष के रहस्यों का उद्घाटन करने वाले महान दार्शनिक विचार और उपदेश। | ⭐सनातन धर्म धर्म: कर्तव्य, सदाचार एवं ब्रह्मांडीय नियमधारयति इति धर्मः संसार और मानव समाज को धारण करने वाले सत्य, न्याय और कर्तव्य के शाश्वत नियम। | सभी देखें |
रविवार
पूजित देव: सूर्य देव एवं गायत्री माता · शुक्ल पक्ष अष्टमी
आरोग्य, आत्मबल, तेज एवं गायत्री ध्यान हेतु भगवान सूर्य देव को समर्पित पावन दिन।
आरोग्य, आत्मबल, तेज एवं गायत्री ध्यान हेतु भगवान सूर्य देव को समर्पित पावन दिन।
मधुर अवधी एवं सरल हिंदी चौपाइयों में रचित चालीस छंदों का पावन स्तुति संग्रह। भक्तजन संकट-निवारण, आत्मबल और भगवत्कृपा की प्राप्ति हेतु इनका नित्य पाठ करते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह पावन चालीसा भय, संकट एवं विघ्नों को दूर कर भक्तों में असीम साहस, निष्ठा और आत्मबल का संचार करती है।
प्राचीन ऋषियों, महाकवियों एवं आदि शंकराचार्य द्वारा रचित दिव्य संस्कृत स्तुतियां। ये छंद परमात्मा के दिव्य स्वरूप, करुणा एवं महिमा का सस्वर गुणगान करते हैं।
भगवान सदाशिव के नटराज स्वरूप और आनंद ताण्डव का सजीव, छंदोबद्ध एवं शक्तिवर्धक संस्कृत गान।
पवित्र वैदिक ऋचाएं और बीज मंत्र जो मन को शांत करते हैं, बुद्धि को प्रखर बनाते हैं और साधक को आत्म-चेतना से जोड़ते हैं।
ऋग्वेद का शिरोमणि मंत्र, जो सविता (परम प्रकाश) का ध्यान कर हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करने की दिव्य प्रार्थना करता है।
पूजा-अर्चना के अंत में कपूर और घी की ज्योति से आरती उतारते हुए गाए जाने वाले उल्लासपूर्ण भक्ति गीत, जो हृदय को कृतज्ञता से भर देते हैं।
समस्त भारतवर्ष और विश्वभर में गूंजने वाली सर्वप्रिय आरती, जो प्रभु के शरणागत होकर जीवन के संताप हरने की करुण पुकार है।
आठ पावन श्लोकों में निबद्ध मधुर संस्कृत रचनाएं, जिनकी संगीतमय लय और भाव-प्रवणता मन को सहज ही भक्ति-रस में डुबो देती है।
महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा विरचित यह अनुपम स्तुति भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और स्वरूप को परम मधुर बताती है।
सत्य, निष्काम कर्म और आत्म-साक्षात्कार के अमर उपदेश, जो जीवन के द्वंद्वों में मनुष्य को कर्तव्य-निष्ठा और आत्म-शांति की राह दिखाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का वह अमर संदेश जो कर्म को ही पूजा मानकर फल की चिंता से मुक्त रहने की परम सीख देता है।
मीराबाई, सूरदास, कबीर और वारकरी संतों की वह रसपूर्ण वाणी, जो शास्त्रीय नियमों से परे सीधे हृदय के प्रेम से परमात्मा को पुकारती है।
संत नामदेव जी का वह पावन उद्घोष जिसमें कीर्तन के रंग में रंगकर संपूर्ण जगत में ज्ञान की ज्योति जलाने का संकल्प है।
पारंपरिक पूजा का प्रामाणिक एवं सुगम मार्गदर्शन — सामग्री सूची से लेकर आचमन, दीप प्रज्ज्वलन, षोडशोपचार पूजन और आरती तक।
सत्यस्वरूप भगवान श्री सत्यनारायण की गृह-पूजा की सरल एवं शास्त्रोक्त विधि, जो परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा और तीज-त्योहारों पर पढ़ी जाने वाली पावन कथाएं, जो व्रत के आध्यात्मिक महत्व और निष्ठा का बोध कराती हैं।
प्रत्येक पक्ष की एकादशी को उपवास और हरि-स्मरण करने की विधि, महत्व और आत्म-शुद्धि का आध्यात्मिक रहस्य।
शरीर के प्रत्येक अंग, इंद्रिय और दिशा की रक्षा हेतु ईश्वरीय कृपा का आवाहन करने वाले प्राचीन एवं सिद्ध रक्षा-स्तोत्र।
मार्कण्डेय पुराण से उद्धृत मां नवदुर्गा का पावन कवच, जो साधक को सभी भयों और विपत्तियों से सुरक्षित रखता है।
परमात्मा के एक सहस्र (१,०००) दिव्य नामों और अनंत गुणों का सस्वर जप, जो मन को एकाग्र कर सर्व-व्यापकता का अनुभव कराता है।
महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट, जीवन में शांति और मुक्ति प्रदान करने वाली महास्तुति।
रामायण, महाभारत और पुराणों की प्रेरक कथाएं एवं स्तोत्रों के दिव्य उद्भव के आख्यान, जो धर्म और समर्पण का रहस्य समझाते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा कारागार में ४० दिनों तक अनन्य शरणागति से हनुमान चालीसा की रचना और संकटमोचन की कृपा की गाथा।
भारतवर्ष के परम पावन तीर्थों एवं धामों का विस्तृत परिचय — द्वादश ज्योतिर्लिंग, चार धाम, पंच केदार एवं पवित्र परिक्रमा पथ।
भारत भर में प्रतिष्ठित भगवान शिव के १२ पावन ज्योतिर्लिंग, जो महादेव के दिव्य प्रकाश और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण कराते हैं।
भक्ति आंदोलन, पावन प्रतीकों (रुद्राक्ष, तुलसी, शंख) और सनातन धर्म के दैनिक संस्कारों के आध्यात्मिक महत्व का विवेचन।
समूचे भारत में जन-जन के हृदय को परमात्मा के प्रेम से जोड़ने वाले संतों और उनकी अमर भक्ति परंपरा का इतिहास।
आत्मा, परब्रह्म, अद्वैत और मोक्ष के रहस्यों का उद्घाटन करने वाले महान दार्शनिक विचार और उपदेश।
संसार और मानव समाज को धारण करने वाले सत्य, न्याय और कर्तव्य के शाश्वत नियम।
