नाचूं कीर्तनाचे रंगीं — संत नामदेव अभंग
संत नामदेव जी का यह अमर अभंग वारकरी संप्रदाय का आधिकारिक ध्येय-वाक्य (मोटो) है। इसमें नाम-संकीर्तन के रंग में आनंदपूर्वक नाचते हुए संपूर्ण संसार में 'ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने' का पावन संकल्प लिया गया है। नामदेव जी कहते हैं कि संसार के समस्त प्रपंचों को छोड़कर केवल श्रीहरि के नाम का आश्रय लेने से तीनों लोकों का उद्धार हो जाता है।
श्लोक
हम प्रेमपूर्वक कीर्तन के दिव्य रंग में मग्न होकर नाचेंगे और संपूर्ण संसार में ज्ञान का ज्योतिर्मय दीपक प्रज्वलित करेंगे।
श्लोक 1
संसार के समस्त व्यर्थ प्रपंचों और चिंताओं को त्यागकर हम केवल एक प्रभु विट्ठल का ही अनन्य आश्रय ग्रहण करेंगे।
श्लोक 2
हृदय में निर्मल भाव और उत्कट भक्ति धारण करके हम अपनी वाणी से निरंतर श्रीहरि का गुणगान करेंगे।
श्लोक 3
संत नामदेव कहते हैं कि हम तो केवल श्रीहरि के पावन नाम का निरंतर पाठ करने वाले दास हैं; और इस पावन नाम ने ही तीनों लोकों का उद्धार किया है।
श्लोक 4
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल
शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल
- मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पृष्ठभूमि
संत नामदेव (1270–1350 ई.) वारकरी संप्रदाय के आधारस्तंभ और संत ज्ञानेश्वर के अभिन्न सखा थे। उन्होंने कीर्तन परंपरा को अखिल भारतीय स्वरूप दिया और उत्तर भारत तथा पंजाब तक विट्ठल-भक्ति का संदेश पहुँचाया। सिख धर्म के पवित्र 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' में भी उनके 61 पद समाहित हैं। 'नाचूं कीर्तनाचे रंगीं' वारकरी आंदोलन की चेतना है, जिसने भक्ती को आनंद, समता और ज्ञान का समन्वित पथ बनाया।
इस पाठ के विषय में
रचयिता: Sant Namdev
क्या आप जानते हैं?
वारकरी संप्रदाय का ध्येय-मंत्र
'नाचूं कीर्तनाचे रंगीं, ज्ञानदीप लावूं जगीं' पंक्ति महाराष्ट्र के असंख्य मंदिरों, पताकाओं और वारकरी दिंडी का आधिकारिक आदर्श वाक्य है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान
संत नामदेव की भक्ति-चेतना की व्यापकता के कारण सिख गुरुओं ने उनके ६१ पदों को सम्मानपूर्वक 'भगत नामदेव जी' के नाम से गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित किया।
कीर्तन का सामर्थ्य
नामदेव महाराज ने सिद्ध किया कि कीर्तन और भगवन्नाम के माध्यम से बिना किसी बाह्य आडंबर के परमात्मा की प्रत्यक्ष अनुभूति संभव है।
Vitthal
हिन्दू धर्म से और
सभी देखेंसंबंधित शिक्षाएं
एक ही शिक्षा, विभिन्न परंपराओं में प्रतिध्वनित
