Bharat Devotion
Embroidered artwork for नाचूं कीर्तनाचे रंगीं — संत नामदेव अभंग: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

नाचूं कीर्तनाचे रंगीं — संत नामदेव अभंग

नाचूं कीर्तनाचे रंगीं — संत नामदेव अभंग

संत नामदेव जी का यह अमर अभंग वारकरी संप्रदाय का आधिकारिक ध्येय-वाक्य (मोटो) है। इसमें नाम-संकीर्तन के रंग में आनंदपूर्वक नाचते हुए संपूर्ण संसार में 'ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने' का पावन संकल्प लिया गया है। नामदेव जी कहते हैं कि संसार के समस्त प्रपंचों को छोड़कर केवल श्रीहरि के नाम का आश्रय लेने से तीनों लोकों का उद्धार हो जाता है।

श्लोक

नाचूं कीर्तनाचे रंगीं ज्ञानदीप लावूं जगीं
Nachu kirtanache rangi, dnyanadeep lavu jagi

श्लोक 1

सर्व सांडूनी व्यापार एक विठ्ठलचि धरूं
Sarva sanduni vyapara, eka vitthallachi dharu

श्लोक 2

भाव भक्ति अंतरीं वाचे गाऊं श्रीहरी
Bhava bhakti antari, vache ga-u shri-hari

श्लोक 3

नामा म्हणे आम्ही हरिनामाचे वाचक नामें तिन्ही लोक उद्धरिले
Nama mhane amhi harinamache vachaka, name tinhi loka uddharile

श्लोक 4

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

संत नामदेव (1270–1350 ई.) वारकरी संप्रदाय के आधारस्तंभ और संत ज्ञानेश्वर के अभिन्न सखा थे। उन्होंने कीर्तन परंपरा को अखिल भारतीय स्वरूप दिया और उत्तर भारत तथा पंजाब तक विट्ठल-भक्ति का संदेश पहुँचाया। सिख धर्म के पवित्र 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' में भी उनके 61 पद समाहित हैं। 'नाचूं कीर्तनाचे रंगीं' वारकरी आंदोलन की चेतना है, जिसने भक्ती को आनंद, समता और ज्ञान का समन्वित पथ बनाया।

क्या आप जानते हैं?

वारकरी संप्रदाय का ध्येय-मंत्र

'नाचूं कीर्तनाचे रंगीं, ज्ञानदीप लावूं जगीं' पंक्ति महाराष्ट्र के असंख्य मंदिरों, पताकाओं और वारकरी दिंडी का आधिकारिक आदर्श वाक्य है।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान

संत नामदेव की भक्ति-चेतना की व्यापकता के कारण सिख गुरुओं ने उनके ६१ पदों को सम्मानपूर्वक 'भगत नामदेव जी' के नाम से गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित किया।

कीर्तन का सामर्थ्य

नामदेव महाराज ने सिद्ध किया कि कीर्तन और भगवन्नाम के माध्यम से बिना किसी बाह्य आडंबर के परमात्मा की प्रत्यक्ष अनुभूति संभव है।

Vitthal की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Vitthal

Vitthal के सभी पाठ देखें →

हिन्दू धर्म से और

सभी देखें