अन्य नाम: Namdev, Namdeo, Bhagat Namdev
भारत का पावन आध्यात्मिक पुनर्जागरण
अद्वैत भक्ति
यह शबद संत रविदास जी द्वारा रचित है, जिसमें वे परमात्मा की महिमा का गुणगान करते हैं और बताते हैं कि वह दीन-दुखियों की रक्षा करते हैं तथा नीच को ऊँचा बनाते हैं।
यह एक पारंपरिक भक्ति गीत (आरती) है जो भगवान राम की स्तुति में गाया जाता है। इसे मंदिरों और घरों में पूजा के अंत में दीपक लेकर घुमाते समय गाते हैं।
यह संग्रह श्री गुरु ग्रंथ साहिब और दशम ग्रंथ से लिए गए विभिन्न प्रकार के भजनों और प्रार्थनाओं का समूह है, जो ईश्वर की स्तुति, उनके गुणों का गान, और उनकी शरण की विनती करते हैं।
आरती के बाद गाई जाने वाली मराठी प्रार्थना: संत नामदेव का 'घालीन लोटांगण', समर्पण के श्लोक, हरे राम महामंत्र और गणपति का 'मोरया' जयघोष।
संत नामदेव महाराज (13वीं–14वीं शताब्दी) का यह अमर अभंग हरिनाम के परम माधुर्य और एक निष्कपट साधक के आंतरिक द्वंद्व को उजागर करता है। प्रभु का नाम अमृत से भी अधिक मधुर है, फिर भी सांसारिक विषय-वासनाओं और आलस्य के कारण यह चंचल मन उसे क्यों नहीं जपता? कीर्तन में बैठते ही नींद आ घेरती है और संतों की जय-जयकार के बीच भी मन जागृत नहीं होता। नामदेव जी श्री विठ्ठल के सम्मुख अपने मन की इस विवशता को रखकर कृपा की याचना करते हैं।
संत नामदेव जी का यह अमर अभंग वारकरी संप्रदाय का आधिकारिक ध्येय-वाक्य (मोटो) है। इसमें नाम-संकीर्तन के रंग में आनंदपूर्वक नाचते हुए संपूर्ण संसार में 'ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने' का पावन संकल्प लिया गया है। नामदेव जी कहते हैं कि संसार के समस्त प्रपंचों को छोड़कर केवल श्रीहरि के नाम का आश्रय लेने से तीनों लोकों का उद्धार हो जाता है।
पंढरपुर के विट्ठल की संध्या आरती, जो परंपरा से संत नामदेव की मानी जाती है; ईंट पर खड़े विट्ठल और वामांग में रखुमाई का गुणगान।
यह एक छोटा भक्ति गीत (अभंग) है, जिसमें संत जनाबाई भगवान विठोबा (विठाबाई) को पंढरपुर की माता के रूप में संबोधित करती हैं और उनसे अपने हृदय में नाचने का आग्रह करती हैं।