अमृताहुनी गोड नाम तुझे देवा — संत नामदेव अभंग
संत नामदेव महाराज (13वीं–14वीं शताब्दी) का यह अमर अभंग हरिनाम के परम माधुर्य और एक निष्कपट साधक के आंतरिक द्वंद्व को उजागर करता है। प्रभु का नाम अमृत से भी अधिक मधुर है, फिर भी सांसारिक विषय-वासनाओं और आलस्य के कारण यह चंचल मन उसे क्यों नहीं जपता? कीर्तन में बैठते ही नींद आ घेरती है और संतों की जय-जयकार के बीच भी मन जागृत नहीं होता। नामदेव जी श्री विठ्ठल के सम्मुख अपने मन की इस विवशता को रखकर कृपा की याचना करते हैं।
श्लोक
हे प्रभु, आपका पवित्र नाम अमृत से भी अधिक मीठा है! फिर हे केशव, मेरा यह चंचल मन उसे प्रेमपूर्वक क्यों नहीं जपता?
श्लोक 1
हे पंढरी के राजा विठ्ठल, मुझे बताओ कि मैं इस मन का क्या उपाय करूं? आपका वह मनमोहक दिव्य रूप मेरे ध्यान में क्यों नहीं ठहरता?
श्लोक 2
जैसे ही मैं प्रभु के कीर्तन में बैठता हूं, आलस्य और नींद मुझे लूट लेती है; और मेरा मन संसार के क्षणभंगुर विषय-भोगों में उलझा रहता है।
श्लोक 3
हरि के दास संतजन मिलकर हरिनाम की महिमा का गगनभेदी जयघोष करते हैं; फिर भी नामदेव कहते हैं कि यह नाम मेरे इस कठोर चित्त में उतरता ही नहीं!
श्लोक 4
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल
शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल
- मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पृष्ठभूमि
संत नामदेव (1270–1350) वारकरी संप्रदाय के प्राण हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र से लेकर पंजाब तक भगवन्नाम का प्रचार किया। उनके 61 पद सिखों के पवित्र ग्रंथ 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' में आदरपूर्वक सम्मिलित हैं। नामदेव जी की भक्ति बालसुलभ और सख्य भाव की है, जहां भक्त ईश्वर से कोई पर्दा नहीं रखता। अपनी नींद, मन के भटकाव और कमजोरियों को विठ्ठल के सामने खुलकर रख देना ही नामदेव की सरलता है। भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के शास्त्रीय गायन ने इस अभंग को अमर बना दिया है।
इस पाठ के विषय में
रचयिता: Sant Namdev
क्या आप जानते हैं?
प्रभु के सम्मुख निष्कपट भाव
नामदेव महाराज कीर्तन में नींद आने और मन के सांसारिक भटकाव को विठ्ठल के सामने निडरता से स्वीकार करते हैं, जो एक सच्चे साधक की सरलता को दर्शाता है।
अमृत से भी बढ़कर नाम
संतों ने हरिनाम को देवलोक के अमृत से भी श्रेष्ठ माना है, क्योंकि अमृत केवल देह की आयु बढ़ाता है, जबकि भगवन्नाम भवबंधन से मुक्ति प्रदान करता है।
पंडित भीमसेन जोशी का अमर गायन
यह अभंग पंडित भीमसेन जोशी द्वारा गाए गए सर्वाधिक लोकप्रिय संतवाणी पदों में से एक है।
Vitthal
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