Bharat Devotion

भगवान विट्ठल

अन्य नाम: Vithoba, Panduranga, Pandharinath, Vitthala, Hari

पंढरपुर और वारकरी भक्ति परंपरा के परम आराध्य देव, जो भक्त पुंडलिक के प्रेम में ईंट पर समचरण खड़े होकर कटि पर हाथ रखे अपने भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।

अभंग

संत चोखामेळा के सुपुत्र संत कर्ममेळा (14वीं शताब्दी) का यह अभंग भारतीय भक्ति साहित्य में सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान का अत्यंत साहसी और ऐतिहासिक दस्तावेज है। तत्कालीन जातिगत भेदभाव और छुआछूत के कारण समाज द्वारा बहिष्कृत किए जाने और जूठन खाने की विवशता पर कर्ममेळा सीधे भगवान विठ्ठल से प्रश्न करते हैं। 'हे लक्ष्मीपति, क्या आपको हमारी यह हीन दशा नहीं दिखती? हमारे घर में प्रेमपूर्वक दही-चावल खाने वाले आप अब कैसे मुंह फेर सकते हैं?' यह अभंग सिद्ध करता है कि सच्ची भक्ति में ईश्वर और भक्त के बीच कोई कृत्रिम सामाजिक दीवार नहीं हो सकती।

4 verses