Bharat Devotion
Embroidered artwork for नको देवराया अंत आतां पाहूं — संत कान्होपात्रा अभंग: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

नको देवराया अंत आतां पाहूं — संत कान्होपात्रा अभंग

नको देवराया अंत आतां पाहूं — संत कान्होपात्रा अभंग

संत कान्होपात्रा का यह अभंग अनन्य शरणागति और आर्त पुकार की अमर पराकाष्ठा है। एक भीषण संकट की घड़ी में, जब उन्हें बलपूर्वक ले जाने का प्रयास हुआ, तब कान्होपात्रा ने पंढरपुर के मंदिर में शरण लेकर विट्ठल के श्रीचरणों में सिर रखकर यह प्रार्थना की—'हे देवराज! अब मेरी अंतिम परीक्षा मत लो; तुम्हारे बिना मेरे प्राण तड़प रहे हैं।' भगवान विट्ठल ने उनकी पुकार सुनकर उन्हें अपने श्रीचरणों में सदा के लिए समाहित कर लिया।

श्लोक

नको देवराया अंत आतां पाहूं प्राण हा सर्वथा फुटों पाहे
Nako devaraya anta atam pahum, prana ha sarvatha phutom pahe

श्लोक 1

जळावेगळी मासोळी जैसा तळमळी तैसा मी बापुडी तळमळत
Jalavegali masoli jaisa talamali, taisa mi bapudi talamalata

श्लोक 2

तुजविण कोण सोडवी संकटीं धांव घालीं भेटी जगज्जीवना
Tujavina kona sodavi sankatim, dhamva ghalim bheti jagajjivana

श्लोक 3

कान्होपात्रा म्हणे चरणीं ठेविला माथा संकटांत आतां तारीं मज
Kanhopatra mhane charanim thevila matha, sankatamta atam tarim maja

श्लोक 4

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

संत कान्होपात्रा (15वीं शताब्दी) मंगळवेढा की प्रसिद्ध नर्तकी श्यामा की पुत्री थीं। अपूर्व सुंदरी होने के बाद भी उनका मन केवल भगवान विट्ठल के चरणों में रमता था। एक महान संकट के समय, जब उन्हें बलपूर्वक ले जाने का प्रयास हुआ, तो वे भागकर पंढरपुर मंदिर के गर्भगृह में पहुँचीं। विट्ठल की प्रतिमा के सम्मुख यह अभंग गाते हुए उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। पंढरपुर मंदिर परिसर में ही उनकी समाधि है, जहाँ आज भी एक पवित्र वृक्ष उनकी भक्ति की गवाही देता है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Sant Kanhopatra

क्या आप जानते हैं?

मंदिर के भीतर समाधि

संत कान्होपात्रा एकमात्र ऐसी भक्त हैं जिनकी समाधि पंढरपुर के मुख्य मंदिर परिसर के भीतर पवित्र तरटी वृक्ष के पास स्थित है।

जल बिन मछली की उपमा

द्वितीय पद में 'जळावेगळी मासोळी' (जल के बिना तड़पती मछली) का दृष्टांत ईश्वर-वियोग की असह्य वेदना को मार्मिक रूप से प्रकट करता है।

नारी गरिमा और भक्ति की विजय

कान्होपात्रा का जीवन इस बात का अमर प्रमाण है कि सच्ची भक्ति किसी भी सांसारिक शक्ति या उत्पीड़न के आगे कभी नहीं झुकती।

Vitthal की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Vitthal

Vitthal के सभी पाठ देखें →

हिन्दू धर्म से और

सभी देखें