हिन्दू धर्म
अभंग
वारकरी संतों तुकाराम, नामदेव और एकनाथ द्वारा श्री विट्ठल की भक्ति में रचित मराठी अभंग — मूल पाठ और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
अ (निश्चेष्ट) + भंग (टूटना = जो खंडित न हो)मराठी (वारकरी संत परंपरा)
अखंड, अविनाशी भक्ति-गीत — महाराष्ट्र के वारकरी संतों (ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम) द्वारा पंढरपुर के भगवान विट्ठल के प्रति समर्पित अमर रचनाएँ, जो जाति-पांति के भेद को मिटाकर विशुद्ध प्रेम का उद्घोष करती हैं।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
ओवी एवं अभंग छंद
लघु, लयबद्ध पंक्तियाँ जो सामूहिक पद-यात्रा में सहज गाई जा सकें, और अंत में संत का प्रामाणिक हस्ताक्षर (जैसे 'तुका म्हणे')।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
तीर्थयात्री पद-गीत (Pilgrim Processional Antiphons)समतावादी पदयात्री का गान
यूरोप की 'कैमिनो डे सैंटियागो' तीर्थयात्रा के उन सामूहिक भजनों के समान, जिन्हें राजा और रंक सब मिलकर गाते हुए ईश्वर की ओर बढ़ते हैं।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:पंढरपुर की प्रसिद्ध 'वारी' पदयात्रा का प्राण, जहाँ लाखों वारकरी ताल-मृदंग की थाप पर नाचते-गाते विट्ठल का नाम लेते हैं।