जनाबाई का विठोबा-अभंग
यह एक छोटा भक्ति गीत (अभंग) है, जिसमें संत जनाबाई भगवान विठोबा (विठाबाई) को पंढरपुर की माता के रूप में संबोधित करती हैं और उनसे अपने हृदय में नाचने का आग्रह करती हैं।
श्लोक
आओ आओ विठाबाई, मेरी पंढरी की माता।
श्लोक 1
भीमा और चंद्रभागा, तुम्हारे चरणों की गंगा हैं।
श्लोक 2
इन सबके साथ तुम आओ, मेरे रंग में नाचो।
श्लोक 3
मेरा रंग तुम्हारे गुणों में है, ऐसा नामदेव की जनी कहती है।
श्लोक 4
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल
शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल
- मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पृष्ठभूमि
यह एक अभंग है, जो महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय की संत-कवयित्री जनाबाई (१३वीं शताब्दी) द्वारा रचित माना जाता है। वारकरी परंपरा में भगवान विठोबा (पंढरपुर के विट्ठल) की भक्ति और पंढरपुर की यात्रा का विशेष महत्व है। यह अभंग प्रायः भजन या कीर्तन के दौरान गाया जाता है, जिसमें भक्त विठोबा को अपने हृदय-रंग में नाचने का आग्रह करता है।
इस पाठ के विषय में
रचयिता: Sant Janabai
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क्या आप जानते हैं?
कवयित्री और परंपरा
पद के अंतिम चरण 'ह्मणे नामयाची जनी' से रचयिता संत जनाबाई प्रकट होती हैं, जो संत नामदेव (नामा) के घर की सेविका और शिष्या थीं। वारकरी पंथ पंढरपुर के विठोबा की सरल भक्ति पर केंद्रित है, जो जाति या लिंग का भेद नहीं करती।
नदियों का महत्व
पद में भीमा और चंद्रभागा नदियों का उल्लेख है; पंढरपुर में भीमा को चंद्रभागा कहा जाता है और वारकरी परंपरा में यह अत्यंत पवित्र मानी जाती है। जनाबाई कहती हैं कि ये नदियाँ विठोबा के चरणों की गंगा हैं।
'रंगण' का अर्थ
'माझे रंगणीं नाचावें' में 'रंगण' का अर्थ आँगन या क्रीड़ास्थल है; जनाबाई विठोबा से अपने आँगन में आकर नाचने की प्रार्थना करती हैं, जो भक्त और भगवान के घनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।
हस्ताक्षर 'जनी'
पद के अंत में 'ह्मणे नामयाची जनी' आता है; 'नामयाची जनी' का अर्थ है 'नामदेव की जनी', यह जनाबाई की अपनी नाममुद्रा है।
अभंग शैली
यह पद 'अभंग' नामक मराठी काव्य-शैली में है, जिसमें प्रत्येक पंक्ति में निश्चित मात्राएँ होती हैं और अंत में तुक होता है। अभंग वारकरी संतों द्वारा भक्ति-गीतों के लिए प्रयोग किया जाता था, जिन्हें कीर्तन में गाया जाता है। इस पद में चार पंक्तियाँ हैं, जो एक सामान्य अभंग संरचना है।
Vitthal
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