यह एक छोटा भक्ति गीत (अभंग) है, जिसमें संत जनाबाई भगवान विठोबा (विठाबाई) को पंढरपुर की माता के रूप में संबोधित करती हैं और उनसे अपने हृदय में नाचने का आग्रह करती हैं।