संत कान्होपात्रा की पूर्ण समर्पण की प्रार्थना: वे विट्ठल से अब और परीक्षा न लेने की विनती करती हैं, उनके चरणों में शीश रखती हैं, और परंपरा स्मरण करती है कि वे उन्हीं में विलीन हो गईं।
संत मुक्ताबाई का ‘ताटी उघडा ज्ञानेश्वरा’: अपने भाई ज्ञानदेव से झोंपड़ी का द्वार खोलने की विनती, यह सिखाते हुए कि सच्चा संत संसार के ताने करुणा से सहता है।