संत नामदेव विट्ठल से कहते हैं कि उनका नाम अमृत से भी मधुर है, फिर भी मन उसका स्वाद नहीं लेता: कीर्तन आरंभ होते ही नींद और चंचलता घेर लेती हैं।
संत तुकाराम का नाम-संकीर्तन का अभंग: विट्ठल के गुण गाओ, उनका ध्यान करो और ईंट पर खड़े उन्हें देखो; उनके नाम से मुख मधुर हो जाता है।