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Embroidered artwork for घालीन लोटांगण : आरती के बाद की मराठी प्रार्थना: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

घालीन लोटांगण

आरती के बाद की मराठी प्रार्थना

घालीन लोटांगण

आरती के बाद की मराठी प्रार्थना

आरती के बाद गाई जाने वाली मराठी प्रार्थना: संत नामदेव का 'घालीन लोटांगण', समर्पण के श्लोक, हरे राम महामंत्र और गणपति का 'मोरया' जयघोष।

श्लोक

घालीन लोटांगण वंदीन चरण डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे प्रेमें आलिंगीन आनंद पूजन भावे ओवाळिन म्हणे नामा
Ghalin Lotangan Vandin Charan Dolyani Pahin Roop Tujhe Premen Aalingin Anand Poojan Bhave Owalin Mhane Nama

श्लोक 1

त्वमेव माता पिता त्वमेव त्वमेव बन्धु: सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव
Tvameva Mata Pita Tvameva Tvameva Bandhu Sakha Tvameva Tvameva Vidya Dravinam Tvameva Tvameva Sarvam Mama Devadeva

श्लोक 2

कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा बुध्यात्मना वा प्रकृति स्वभावात् करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेती समर्पयामि
Kayena Vacha Manasendriyairva Budhyatmana Va Prakriti Swabhavat Karomi Yadyat Sakalam Parasmai Narayanayeti Samarpayami

श्लोक 3

अच्युतं केशवं राम नारायणम् कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिं श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभम् जानकीनायकं रामचंद्रं भजे
Achyutam Keshavam Ram Narayanam Krishnadamodaram Vasudevam Harim Shridharam Madhavam Gopikavallabham Janakinayakam Ramachandram Bhaje

श्लोक 4

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
Hare Ram Hare Ram Ram Ram Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare

श्लोक 5

मंगलमुर्ती मोरया गणपतिबाप्पा मोरया
Mangal Murti Morya Ganpati Bappa Morya

श्लोक 6

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

'घालीन लोटांगण वंदीन चरण' महाराष्ट्र के घरों और मंदिरों में आरती के समापन पर गाया जाने वाला मराठी प्रार्थना-क्रम है; शिरडी की सायंकालीन धूप आरती में भी यह आता है। इसका पहला पद वारकरी संत नामदेव (लगभग 1270–1350) के नाम से जुड़ा है, जिनका नाम 'म्हणे नामा' में आता है। इसके बाद प्रचलित संस्कृत श्लोक आते हैं: ईश्वर को माता-पिता-बंधु मानने का समर्पण-श्लोक, सब कर्म नारायण को अर्पित करने वाला भागवत पुराण का श्लोक, विष्णु-कृष्ण के नामों का स्तोत्र, हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र और गणपति का 'मंगलमूर्ती मोरया' जयघोष। घरों में क्रम थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए यह एक भक्ति-क्रम है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं।

क्या आप जानते हैं?

नामदेव का पद

पहला पद वारकरी परंपरा के आद्य स्वर संत नामदेव (लगभग 1270–1350) के नाम से जुड़ा मराठी अभंग है, जिसमें 'म्हणे नामा' उनका हस्ताक्षर है। इसमें भक्त लोटांगण करके चरण वंदन करता है, प्रभु का रूप देखता है और प्रेम से आरती उतारता है।

त्वमेव माता पिता त्वमेव

पद 2 में ईश्वर को माता, पिता, बंधु, सखा, विद्या और धन कहा गया है। इसे प्रायः भगवद्गीता या विष्णु सहस्रनाम का समझ लिया जाता है, पर इसका स्रोत विवादित है और इसे अक्सर पांडव गीता से जोड़ा जाता है।

सब कर्मों का समर्पण

पद 3 भागवत पुराण (11.2.36) का श्लोक है, जिसमें शरीर, वाणी, मन, इंद्रिय, बुद्धि और स्वभाव से किए सब कर्म नारायण को अर्पित किए जाते हैं। यह कर्मयोग का सार है।

विष्णु-कृष्ण के नाम

पद 4 अच्युताष्टकम् का श्लोक है, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य से जोड़ती है। इसमें अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव आदि नाम आते हैं; 'दामोदर' यशोदा की रस्सी से बंधे कृष्ण का स्मरण कराता है।

हरे कृष्ण महामंत्र

पद 5 कलि-सन्तरण उपनिषद् का सोलह शब्दों का महामंत्र है, जिसे चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) ने व्यापक रूप से प्रचारित किया। परंपरा इसे कलियुग में मुक्ति का सबसे सरल साधन मानती है।

मंगलमूर्ती मोरया

समापन का यह जयघोष गणेश को मंगलमूर्ति के रूप में पुकारता है; 'मोरया' का संबंध चिंचवड के गाणपत्य संत मोरया गोसावी और मोरगाँव से जोड़ा जाता है। गणेश चतुर्थी और हर मांगलिक आरंभ पर महाराष्ट्र में यह गूँजता है।

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