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Embroidered artwork for हरि सुन्दर नन्द मुकुन्दा: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

हरि सुन्दर नन्द मुकुन्दा

हरि सुन्दर नन्द मुकुन्दा

यह भजन भगवान कृष्ण के विभिन्न नामों और स्वरूपों की प्रशंसा करता है। इसमें उनके सुन्दर रूप, नन्द के पुत्र होने, गोकुल के प्रिय होने और रासलीला जैसी लीलाओं का गुणगान किया गया है।

श्लोक

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 1

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 2

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 3

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 4

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 5

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 6

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 7

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 8

वन्माली मुरलीधारी गोवर्धन गिरिवर्धारी
Vanmali Murlidhari Govardhan Girivardhari

श्लोक 9

वन्माली मुरलीधारी गोवर्धन गिरिवर्धारी नित नित कर माखन चोरी गोपी मन हारी
Vanmali Murlidhari Govardhan Girivardhari Nit Nit Kar Makhan Chori Gopi Man Hari

श्लोक 10

आओ रे गाओ रे गोकुल के प्यारे आओ रे कान्हा रे गोकुल के प्यारे
Aao Re Gaao Re Gokul Ke Pyare Aao Re Kanha Re Gokul Ke Pyare

श्लोक 11

आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे
Aao Re Nacho Re Raas Rachao Re Gaao Re Nacho Re Raas Rachao Re

श्लोक 12

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 13

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 14

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 15

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 16

हे मोर मुकुट गिरधारी कान्हा पीताम्भर धारी
Hey Mor Mukut Girdhari Kanha Pitambar Dhari

श्लोक 17

हे मोर मुकुट गिरधारी कान्हा पीताम्भर धारी गोपियाँ संग रास रचाये मोहन मुरली धारी
Hey Mor Mukut Girdhari Kanha Pitambar Dhari Gopiyan Sang Raas Rachaye Mohan Murlidhari

श्लोक 18

आओ रे आओ रे मोहन गिरधारी आओ रे कान्हा रे हे कृष्णा मुरारी
Aao Re Aao Re Mohan Girdhari Aao Re Kanha Re Hey Krishna Murari

श्लोक 19

आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे
Aao Re Nacho Re Raas Rachao Re Gaao Re Nacho Re Raas Rachao Re

श्लोक 20

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 21

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 22

हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ
Hari Keshav Hari Govind Hari Narayan Hari Om

श्लोक 23

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 24

हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ
Hari Sundar Nand Mukunda Hari Narayan Hari Om

श्लोक 25

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला

पूजन सामग्री व अर्पण

तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति

पृष्ठभूमि

यह भजन हिंदू धर्म की समृद्ध वैष्णव परंपरा का अंग है, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों, विशेषकर कृष्ण की भक्ति पर केंद्रित है। इसे प्रायः मंदिरों, घरों या सामुदायिक सभाओं में कीर्तन (प्रश्नोत्तर शैली का भक्ति-गायन) के रूप में गाया जाता है। 'हरि', 'केशव' और 'गोविंद' जैसे नामों की आवृत्ति इसकी बनावट को ऐसी बनाती है कि हर कोई साथ गा सके। ये नाम विष्णु सहस्रनाम में गिनाए गए विष्णु-नामों में हैं, और इनके कीर्तन की महिमा भागवत पुराण (12.3.51) में गाई गई है। गीत में गोकुल का बचपन, माखन-प्रेम और गोपियों के साथ रास जैसी कृष्ण-लीलाओं की झलक भी है। इसकी अनेक रिकॉर्डिंग हैं, पर मूल रचयिता सत्यापित नहीं हो सका, इसलिए किसी का नाम नहीं दिया गया।

क्या आप जानते हैं?

रचना और संरचना

इस भजन में "हरि" शब्द का बार-बार प्रयोग हुआ है, जो भगवान विष्णु और कृष्ण के लिए प्रयोग होता है। प्रत्येक पंक्ति के अंत में "हरि नारायण हरि ॐ" मंत्र की तरह दोहराया गया है, जो भजन को ध्यान और जप के लिए उपयुक्त बनाता है।

कृष्ण के नामों का अर्थ

"सुंदर नंद मुकुंदा" का अर्थ है सुंदर, नंद के पुत्र, और मुकुंद (मुक्ति देने वाले)। "केशव" का अर्थ है सुंदर केश वाले, और "गोविंद" का अर्थ है गौओं के स्वामी। ये नाम कृष्ण के विभिन्न गुणों और लीलाओं को दर्शाते हैं।

लीलाओं का चित्रण

भजन में कृष्ण की प्रमुख लीलाओं का उल्लेख है - "वन्माली मुरलीधारी" (वनमाला और मुरली धारण करने वाले), "गोवर्धन गिरिवर्धारी" (गोवर्धन पर्वत उठाने वाले), "माखन चोरी" (मक्खन चुराने वाले), और "गोपी मन हारी" (गोपियों के मन को हरने वाले)।

रासलीला और आह्वान

"आओ रे गाओ रे" और "नाचो रे रास रचाओ रे" पंक्तियाँ भक्तों को कृष्ण के प्रति प्रेम और उत्सव में शामिल होने का आह्वान करती हैं। यह रासलीला के प्रति समर्पण और आनंद को दर्शाता है।

गिरधारी और मोर मुकुट

"मोर मुकुट गिरधारी" कृष्ण के मोर पंख के मुकुट और गोवर्धन धारण करने वाले रूप का वर्णन करता है। "पीताम्बर धारी" पीले वस्त्र धारण करने वाले का संकेत है। यह कृष्ण की प्रतिमा का प्रमुख रूप है।

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