कभी राम बनके कभी श्याम बनके
यह एक भक्ति गीत है जिसमें भक्त प्रभु से विनती करता है कि वे कभी राम के रूप में और कभी श्याम (कृष्ण) के रूप में आएं, और साथ ही शिव, विष्णु और गणपति जैसे अन्य दिव्य रूपों में भी प्रकट हों।
श्लोक
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 1
आप राम के रूप में आइए, सीता जी को साथ लेकर और धनुष हाथ में लेकर, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 2
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 3
आप कृष्ण के रूप में आइए, राधा जी को साथ लेकर और मुरली हाथ में लेकर, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 4
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 5
आप शिव के रूप में आइए, गौरा जी को साथ लेकर और डमरू हाथ में लेकर, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 6
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 7
आप विष्णु के रूप में आइए, लक्ष्मी जी को साथ लेकर और चक्र हाथ में लेकर, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 8
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 9
आप गणपति के रूप में आइए, रिद्धि और सिद्धि को साथ लेकर, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 10
कभी राम के रूप में और कभी कृष्ण के रूप में आइए, हे प्रभु, आइए।
श्लोक 11
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
सोमवार एवं प्रदोष काल
प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्याकालीन प्रदोष वेला
बिल्वपत्र, गंगाजल, भस्म, धतूरा एवं श्वेत पुष्प
- आत्मिक शांति, समस्त पापों का नाश एवं अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
पृष्ठभूमि
यह एक लोकप्रिय हिंदू भक्ति गीत (भजन) है, जो प्रायः कीर्तन या भजन-संध्या में सामूहिक रूप से गाया जाता है। यह भाव मनाता है कि एक ही परम ईश्वर राम, कृष्ण, शिव, विष्णु और गणेश जैसे अनेक प्रिय रूपों में प्रकट हो सकते हैं, हर रूप अपनी शक्ति और विशिष्ट वस्तु के साथ। यह विचार ऋग्वेद (1.164.46, 'एक सत् को विद्वान अनेक नामों से कहते हैं') और भगवद्गीता (4.7-8) में गूँजता है। इसे प्रायः प्रश्नोत्तर शैली में गाया जाता है, जिसमें अगुआ हर पद गाता है और मंडली टेक दोहराती है। कविता कोश में यह बिना रचनाकार के पारंपरिक भजन के रूप में है, और कोई रचयिता सत्यापित नहीं हो सका, इसलिए नाम नहीं दिया गया।
क्या आप जानते हैं?
भजन की संरचना
यह भजन एक ही परमात्मा को अलग-अलग रूपों में पुकारता है – राम, श्याम (कृष्ण), शिव, विष्णु और गणपति। हर अंतरे में उस देवता की पत्नी और विशेष अस्त्र-शस्त्र का उल्लेख है, जो भक्त को साकार रूप में दर्शन देने की प्रार्थना है।
एकता का संदेश
‘कभी राम बनके कभी श्याम बनके’ की पंक्ति सिखाती है कि सभी देवता एक ही परम सत्ता के विभिन्न स्वरूप हैं। भजन संप्रदायों के भेद को मिटाकर भक्ति की एकता पर बल देता है।
प्रमुख देवता व उनके प्रतीक
राम के साथ सीता और धनुष, कृष्ण के साथ राधा और मुरली, शिव के साथ गौरा (पार्वती) और डमरू, विष्णु के साथ लक्ष्मी और चक्र, तथा गणपति के साथ रिद्धि-सिद्धि का उल्लेख है। ये प्रतीक भक्तों को दृश्य ध्यान में सहायता करते हैं।
लोकप्रियता और प्रयोग
यह भजन उत्तर भारत में आरती, कीर्तन और सत्संगों में बहुत प्रचलित है। इसकी सरल हिंदी भाषा और मधुर दोहराव इसे हर उम्र के भक्तों के लिए सहज बना देता है।
Shiva
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