जग में सुन्दर है दो नाम – राम और कृष्ण की महिमा
यह एक भक्तिगीत है जो भगवान राम और कृष्ण के दिव्य नामों की सुंदरता और शक्ति का गुणगान करता है। इसमें बताया गया है कि दोनों नामों का जप कैसे भक्तों को प्रेम, शांति और सुख प्रदान करता है।
श्लोक
संसार में दो नाम सुंदर हैं - चाहे तुम कृष्ण कहो या राम। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 1
एक ब्रज में माखन चुराते हैं, एक भीलनी के बेर खाते हैं। दोनों प्रेम भाव से भरे अनोखे कार्य करते हैं। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 2
एक पापी कंस को मारते हैं, एक दुष्ट रावण का संहार करते हैं। दोनों दीनों के दुःख हरते हैं और बल के धाम हैं। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 3
एक हृदय में प्रेम बढ़ाते हैं, एक ताप और संताप मिटाते हैं। दोनों सुख के सागर हैं और सब काम पूर्ण करने वाले हैं। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 4
एक राधिका के संग शोभित होते हैं, एक जानकी के साथ विराजमान हैं। चाहे तुम सीताराम कहो या राधेश्याम बोलो। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 5
संसार में दो नाम सुंदर हैं - चाहे तुम कृष्ण कहो या राम। राम-राम-राम बोलो, श्याम-श्याम-श्याम बोलो।
श्लोक 6
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि
प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला
तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन
- परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति
पृष्ठभूमि
यह भजन हिंदू भक्ति परंपरा का हिस्सा है, विशेष रूप से उत्तर भारत में राम और कृष्ण के प्रति समर्पित संतों और कवियों की शैली से जुड़ा है। इसे अक्सर सत्संगों, मंदिरों और घरों में सामूहिक रूप से गाया जाता है। यह सरल, दोहराव वाला ढाँचा आम लोगों को आसानी से याद करने और भक्ति में लीन होने में मदद करता है। इसका कोई एक निश्चित रचयिता नहीं है, बल्कि यह लोकप्रिय मौखिक परंपरा से फैला एक अज्ञात रचना है। इसमें स्मरण की गई लीलाएँ वाल्मीकि रामायण (अरण्यकाण्ड, सर्ग 74, जहाँ शबरी राम का स्वागत करती हैं) और भागवत पुराण (स्कंध 10, अध्याय 8–9 में माखन-चोरी और अध्याय 44 में कंस-वध) में वर्णित हैं; यह गीत स्वयं एक लोकप्रिय भक्ति-रचना है जिसके रचयिता ज्ञात नहीं हैं।
क्या आप जानते हैं?
भजन का स्वरूप
यह एक लोकप्रिय भक्ति गीत है जो प्रभु राम और प्रभु कृष्ण के नामों की महिमा का गुणगान करता है। हर अंतरे (verse) में दोनों भगवानों की लीलाओं की तुलना की गई है और अंत में 'बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम' का सामूहिक जप करने का आग्रह किया गया है। यह भजन अक्सर कीर्तनों और सत्संगों में गाया जाता है।
लीलाओं का समानांतर चित्रण
भजन में राम और कृष्ण दोनों के जीवन की प्रसिद्ध घटनाओं को एक साथ रखा गया है। जहाँ कृष्ण ब्रज में माखन चुराते हैं, वहीं राम भीलनी शबरी के जूठे बेर खाते हैं। कृष्ण कंस का वध करते हैं तो राम रावण का संहार। यह दर्शाता है कि दोनों ही भक्तों के प्रति प्रेम और असुरों के प्रति संहारक भाव रखते हैं।
प्रेम और शक्ति के केंद्र
दोनों भगवानों को 'बल के धाम' और 'सुख के सागर' कहा गया है। कृष्ण हृदय में प्रेम बढ़ाते हैं जबकि राम ताप-संताप (दुख-कष्ट) मिटाते हैं। इस प्रकार भजन उनके शक्ति और करुणा के दिव्य गुणों को उजागर करता है, जो भक्तों के सभी काम (इच्छाएँ) पूर्ण करते हैं।
राधा-कृष्ण और सीता-राम का युगल
भजन के चौथे अंतरे में कहा गया है कि कृष्ण राधिका के संग शोभित होते हैं और राम जानकी (सीता) के संग विराजमान हैं। यहीं से 'राधेश्याम' और 'सीताराम' नामों की व्युत्पत्ति हुई है। इस प्रकार भजन इन युगलों की अभिन्नता को रेखांकित करता है।
नाम जप का महत्व
हर अंतरे के बाद दोहराए जाने वाले 'बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम' से स्पष्ट है कि यह भजन नाम-संकीर्तन (नाम जप) पर बल देता है। भक्ति परंपरा में नाम जप को कलियुग में मोक्ष का सरल मार्ग माना गया है। इस भजन के माध्यम से भक्त राम और कृष्ण दोनों के नामों का एक साथ आनंद ले सकते हैं।
Krishna
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