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अच्युतं केशवं

अच्युतं केशवं

विष्णु, राम और कृष्ण के पवित्र नामों की माला; अच्युताष्टकम् के श्लोक 1 का लोकप्रिय भजन-रूप, नाम-स्मरण के लिए।

श्लोक

अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं रामनारायणं जानकीवल्लभम् श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे
Achyutam Keshavam Krishna Damodaram Ram Narayanam Janaki Vallabham Shridharam Madhavam Gopika Vallabham Janaki Nayakam Ramachandram Bhaje

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला

पूजन सामग्री व अर्पण

तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति

पृष्ठभूमि

यह श्लोक वैष्णव परंपरा का एक प्रसिद्ध स्तुति-मंत्र है, जो भगवान विष्णु के विभिन्न नामों और रूपों का स्मरण करता है। यह प्रायः प्रातःकालीन प्रार्थना, ध्यान या नाम-जप के समय पढ़ा जाता है, और भक्ति-परंपरा में इसे 'नाम-स्मरण' का सशक्त माध्यम माना जाता है। इसका उपयोग व्यक्तिगत उपासना और सामूहिक भजन-कीर्तन दोनों में होता है। यह श्लोक अच्युताष्टकम् स्तोत्र के श्लोक 1 का लोकप्रिय गेय रूप है, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य की रचना मानती है। छपे पाठ (sanskritdocuments.org) की पहली पंक्ति 'रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्' है, जबकि भजन में यह पंक्ति बदलकर गाई जाती है; दूसरी पंक्ति दोनों में एक ही है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Adi Shankaracharya · शास्त्रीय दार्शनिक-संत · 8वीं शताब्दी ईस्वी, कालडी (केरल)

केरल के कालडी में जन्मे दार्शनिक एवं संन्यासी, जिन्हें अद्वैत वेदांत (अद्वैत दर्शन) को व्यवस्थित करने तथा भारत भर में चार मठों की स्थापना करने का श्रेय दिया जाता है। उपनिषदों एवं ब्रह्मसूत्रों पर अपनी टीकाओं के साथ-साथ, उन्होंने विभिन्न देवताओं की स्तुति में शास्त्रीय संस्कृत में अनेक भक्ति स्तोत्र रचे।

क्या आप जानते हैं?

द्वादश नामों का संकलन

इस श्लोक में भगवान के बारह प्रमुख नामों का उल्लेख है – अच्युत, केशव, कृष्ण, दामोदर, रामनारायण, जानकीवल्लभ, श्रीधर, माधव, गोपिकावल्लभ, जानकीनायक और रामचन्द्र। ये नाम विष्णु के विभिन्न रूपों और लीलाओं को एक साथ स्मरण कराते हैं।

राम और कृष्ण का समन्वय

श्लोक में 'रामनारायण' और 'जानकीवल्लभ' जैसे नाम भगवान राम की ओर संकेत करते हैं, जबकि 'गोपिकावल्लभ' और 'माधव' कृष्ण की ओर। यह दोनों अवतारों की एकता और उनकी दिव्यता को एक साथ प्रस्तुत करता है।

'वल्लभ' और 'नायक' शब्दों का महत्व

'जानकीवल्लभ' (सीता के प्रिय), 'गोपिकावल्लभ' (गोपियों के प्रिय) और 'जानकीनायक' (सीता के स्वामी) जैसे नाम भगवान के प्रेम और समर्पण के संबंध को दर्शाते हैं। ये शब्द भक्ति भाव को उजागर करते हैं।

स्रोत और रूप

यह श्लोक अच्युताष्टकम् (आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित आठ श्लोकों का स्तोत्र) के श्लोक 1 का गेय रूप है, जो पूजा-पाठ और कीर्तन में प्रायः गाया जाता है। इसकी सरलता और नामों की पुनरावृत्ति इसे कंठस्थ करने में सहायक बनाती है।

अर्थ और भाव

'भजे' का अर्थ है 'मैं भजता हूँ' – यह श्लोक भक्त की ओर से भगवान के विभिन्न रूपों के प्रति समर्पण और स्मरण की अभिव्यक्ति है। प्रत्येक नाम भगवान के किसी गुण या लीला को स्मरण कराता है, जैसे 'अच्युत' (अविनाशी), 'केशव' (सुंदर केशों वाले), 'दामोदर' (रस्सी से बंधे हुए) आदि।

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