पंढरपुर के विट्ठल की संध्या आरती, जो परंपरा से संत नामदेव की मानी जाती है; ईंट पर खड़े विट्ठल और वामांग में रखुमाई का गुणगान।
संत नामदेव का ‘नाचू कीर्तनाचे रंगी’: कीर्तन के आनंद में नृत्य करो, संसार में ज्ञान का दीप जलाओ, और केवल नाम ही सबका उद्धार करे।