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हनुमान चालीसा

Episode 1 of 13: Hanuman Chalisa. —

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की स्तुति में 40 छंदों का एक भक्ति गीत है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था। इसमें हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि, भक्ति और राम के प्रति समर्पण का गुणगान किया गया है।

हनुमान चालीसा · Sacred Recitation
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श्लोक

मंगलाचरण (दोहा)

चालीसा के पाठ से पूर्व गुरु चरणों की वन्दना एवं मंगलाचरण दोहा।

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि
Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij Manu Mukuru Sudhari Barnaoon Raghubar Bimal Jasu, Jo Dayaku Phal Chari

श्लोक दोहा 1

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार
Buddhiheen Tanu Janike, Sumiraun Pavan-Kumar Bal Buddhi Bidya Dehu Mohin, Harahu Kales Bikar

श्लोक दोहा 2

चालीसा (४० चौपाई)

प्रभु की अपार महिमा, बल, पराक्रम एवं कृपा का गुणगान करती पावन ४० चौपाइयाँ।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
Jai Hanuman Gyan Gun Sagar Jai Kapees Tihun Lok Ujagar

श्लोक 1

राम दूत अतुलित बल धामा अंजनिपुत्र पवनसुत नामा
Ram Doot Atulit Bal Dhama Anjani-Putra Pavansut Nama

श्लोक 2

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी
Mahabeer Bikram Bajrangi Kumati Nivar Sumati Ke Sangi

श्लोक 3

कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुंडल कुंचित केसा
Kanchan Baran Biraj Subesa Kanan Kundal Kunchit Kesa

श्लोक 4

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै काँधे मूँज जनेऊ साजै
Hath Bajra Au Dhwaja Birajai Kandhe Moonj Janeu Saajai

श्लोक 5

संकर सुवन केसरीनंदन तेज प्रताप महा जग बंदन
Sankar Suvan Kesarinandan Tej Pratap Maha Jag Bandan

श्लोक 6

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर
Vidyavan Guni Ati Chatur Ram Kaaj Karibe Ko Aatur

श्लोक 7

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया
Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya Ram Lakhan Sita Man Basiya

श्लोक 8

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा
Sookshma Roop Dhari Siyahin Dikhawa Bikat Roop Dhari Lank Jarawa

श्लोक 9

भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सँवारे
Bheem Roop Dhari Asur Sanhare Ramchandra Ke Kaaj Sanware

श्लोक 10

लाय सजीवन लखन जियाये श्रीरघुबीर हरषि उर लाये
Laaye Sajeevan Lakhan Jiyaye Shri Raghubeer Harashi Ur Laaye

श्लोक 11

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई
Raghupati Keenhi Bahut Badai Tum Mam Priya Bharatahi Sam Bhai

श्लोक 12

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
Sahas Badan Tumharo Jas Gavain As Kahi Shripati Kanth Lagavain

श्लोक 13

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा
Sanakadik Brahmadi Muneesa Narad Sarad Sahit Aheesa

श्लोक 14

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
Jam Kuber Digpal Jahan Te Kabi Kobid Kahi Sake Kahan Te

श्लोक 15

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा
Tum Upkar Sugreevahin Keenha Ram Milaye Raj Pad Deenha

श्लोक 16

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना लंकेस्वर भए सब जग जाना
Tumharo Mantra Bibheeshan Mana Lankeshwar Bhaye Sab Jag Jana

श्लोक 17

जुग सहस्र जोजन पर भानू लील्यो ताहि मधुर फल जानू
Jug Sahasra Jojan Par Bhaanu Leelyo Taahi Madhur Phal Jaanu

श्लोक 18

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahin Jaladhi Laanghi Gaye Acharaj Naahin

श्लोक 19

दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
Durgam Kaaj Jagat Ke Jete Sugam Anugrah Tumhre Tete

श्लोक 20

राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे
Ram Duare Tum Rakhware Hot Na Aagya Binu Paisare

श्लोक 21

सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रच्छक काहू को डर ना
Sab Sukh Lahai Tumhari Sarna Tum Rachhak Kaahu Ko Dar Na

श्लोक 22

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक तें काँपै
Aapan Tej Samharo Aapai Teenon Lok Haank Te Kaampai

श्लोक 23

भूत पिसाच निकट नहिं आवै महाबीर जब नाम सुनावै
Bhoot pisaach nikat nahin aavai Mahabeer jab naam sunaavai

श्लोक 24

नासै रोग हरै सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा
Naasai rog harai sab peera Japat nirantar Hanumat beera

श्लोक 25

संकट तें हनुमान छुड़ावै मन क्रम बचन ध्यान जो लावै
Sankat te Hanuman chhudaavai Man kram bachan dhyaan jo laavai

श्लोक 26

सब पर राम तपस्वी राजा तिन के काज सकल तुम साजा
Sab par Ram tapasvee raaja Tin ke kaaj sakal tum saaja

श्लोक 27

और मनोरथ जो कोई लावै सोई अमित जीवन फल पावै
Aur manorath jo koyi laavai Soyi amit jeevan phal paavai

श्लोक 28

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा
Chaaron jug partaap tumhaara Hai parsiddh jagat ujiyaara

श्लोक 29

साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे
Saadhu sant ke tum rakhvaare Asur nikandan Ram dulaare

श्लोक 30

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता
Ashta siddhi nau nidhi ke daata As bar deen Jaanaki maata

श्लोक 31

राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा
Ram rasaayan tumhare paasa Sada raho Raghupati ke daasa

श्लोक 32

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै
Tumhare bhajan Ram ko paavai Janam janam ke dukh bisraavai

श्लोक 33

अंत काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई
Ant kaal Raghubar pur jaayi Jahaan janma Haribhakt kahaayi

श्लोक 34

और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्ब सुख करई
Aur devata chitt na dharayi Hanumat seyi sarb sukh karayi

श्लोक 35

संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
Sankat katai mitai sab peera Jo sumirai Hanumat balbeera

श्लोक 36

जै जै जै हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरु देव की नाईं
Jai Jai Jai Hanuman Gosaain Kripa karahu guru dev ki naain

श्लोक 37

जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बंदि महा सुख होई
Jo sat baar paath kar koyi Chhootahi bandi maha sukh hoyi

श्लोक 38

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा
Jo yah padhai Hanuman Chaleesa Hoye siddhi saakhee Gaureesa

श्लोक 39

तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय महँ डेरा
Tulaseedaas sada Hari chera Keejai naath hriday mahan dera

श्लोक 40

समापन दोहा

प्रभु से हृदय में सदा निवास करने की पावन प्रार्थना एवं चालीसा की पूर्णाहुति।

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप
Pavantanay sankat haran mangal moorati roop Ram Lakhan Seeta sahit hriday basahu sur bhoop

श्लोक दोहा

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

मंगलवार एवं शनिवार

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल अथवा संध्या समय

पूजन सामग्री व अर्पण

सिंदूर, चमेली का तेल, तुलसी माला, बूंदी/लड्डू एवं पान का बीड़ा

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • अपार बल, साहस, भयमुक्ति एवं नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा
पाठ विधि सुझाव:संकल्प सिद्धि हेतु 11 अथवा 40 दिनों तक नित्य 1 से 11 बार पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

पृष्ठभूमि

यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो 16वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध संत और कवि थे। 'हनुमान चालीसा' का अर्थ है 'हनुमान जी के चालीस (40) पद्य'। इसे प्रायः प्रतिदिन सुबह-शाम पढ़ा जाता है, खासकर मंगलवार और शनिवार को। यह भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसे मानसिक शांति, शक्ति और संकटों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है। यह रामचरितमानस की परंपरा से जुड़ा हुआ है और भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा का वर्णन करता है।

कथा और महिमा

परंपरा है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने दिल्ली में ४० दिन के कारावास में, चमत्कार न दिखाकर केवल श्रीराम पर भरोसा रखते हुए चालीसा रची।

पूरी कथा पढ़ें →

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Goswami Tulsidas · मध्यकालीन भक्ति कवि-संत · 16वीं शताब्दी, अवध एवं वाराणसी

संस्कृत एवं अवधी भाषा के कवि-संत, जो रामायण की अवधी पुनर्रचना रामचरितमानस के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। परंपरा के अनुसार वाराणसी में बसने से पूर्व उन्होंने वर्षों कठिनाई एवं भटकन का सामना किया, जहाँ उन्होंने हनुमान चालीसा एवं विनय पत्रिका सहित अपनी अधिकांश अन्य प्रमुख रचनाएं राम एवं हनुमान को भक्ति-अर्पण के रूप में रचीं।

क्या आप जानते हैं?

रचयिता

तुलसीदास, 16वीं शताब्दी के महान कवि और संत, जिन्होंने रामचरितमानस की रचना की। हनुमान चालीसा उनकी अमर कृति है, जो अवधी भाषा में लिखी गई है।

संरचना

'चालीसा' का अर्थ है चालीस — इसमें 40 चौपाइयाँ हैं, जिनके पहले दो दोहे और अंत में एक दोहा है। कुल मिलाकर 43 पद, जो एक सरल और लयबद्ध छंद में बंधी हैं।

विषयवस्तु

इसमें वाल्मीकि रामायण की प्रमुख घटनाओं का स्मरण है — सीता जी के सामने सूक्ष्म रूप धारण करना और विकट रूप में लंका दहन (चौपाई 9, सुंदरकांड), प्रभु की मुद्रिका मुख में रखकर समुद्र लाँघना (चौपाई 19), तथा संजीवनी लाकर लक्ष्मण को जीवित करना (चौपाई 11, युद्धकांड)। सुग्रीव को राम से मिलाना (चौपाई 16) और विभीषण का हनुमान जी का मंत्र मानकर लंकेश्वर बनना (चौपाई 17) भी वर्णित है।

हनुमान जी के गुण

चालीसा हनुमान जी को ज्ञान और गुणों का सागर कहती है और उनके स्वरूप का वर्णन करती है — कंचन वर्ण, कानों में कुंडल, घुंघराले केश — तथा हाथ में वज्र और ध्वजा। उन्हें अष्ट सिद्धि और नौ निधि का दाता कहा गया है, जो वरदान उन्हें जानकी माता ने दिया (चौपाई 31)।

पाठ का फल

अंतिम चौपाइयाँ कहती हैं कि श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करने वाला बंधन से मुक्त होता है, उसके कष्ट दूर होते हैं और उसे सब सुख मिलते हैं। भूत-पिशाच, रोग और संकटों से रक्षा तथा प्रभु श्रीराम की कृपा पाने के लिए इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है।

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