स्तोत्र
आदित्यहृदयस्तोत्रम्
आदित्यहृदयस्तोत्रम् वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड (१०५वें सर्ग) में वर्णित ३१ श्लोकों का परम पावन सूर्य स्तोत्र है। जब रावण के विरुद्ध भीषण युद्ध में भगवान श्रीराम थककर चिंतामग्न खड़े थे, तब महर्षि अगस्त्य ने उन्हें समस्त देवताओं के आत्मा, जगन्नेत्र और पाप-ताप नाशक भगवान सूर्य की यह आराधना सिखाई थी, जिसके जप से श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की।
31 verses