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Embroidered artwork for कौसल्या सुप्रजा राम: वेंकटेश्वर सुप्रभातम् का श्लोक: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

कौसल्या सुप्रजा राम

वेंकटेश्वर सुप्रभातम् का श्लोक

कौसल्या सुप्रजा राम

वेंकटेश्वर सुप्रभातम् का श्लोक

वाल्मीकि रामायण का वह श्लोक (१.२३.२) जिससे वेंकटेश्वर सुप्रभातम् आरम्भ होता है: विश्वामित्र प्रभात में बालक राम को जगाते हैं।

श्लोक

कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम्
Kausalya supraja Rama poorva sandhya pravartate Uttishtha narashardoola kartavyam daivamahnikam

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह श्लोक वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड १.२३.२ का है। सरयू तट पर प्रभात में महर्षि विश्वामित्र बालक राम को जगाते हैं: कौसल्या के सुपुत्र राम, प्रातःसन्ध्या आ गई है; हे नरश्रेष्ठ, उठो, देवताओं के प्रति दैनिक कर्तव्य करना है। परम्परा से प्रतिवादि भयंकर अण्णन् (१५वीं शताब्दी, मणवाळ मामुनि के शिष्य) को सुप्रभातम् का रचयिता माना जाता है; इसमें ये शब्द तिरुमला के प्रभु को जगाने का आह्वान बनते हैं और अगली पंक्ति 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द' यह आह्वान वेंकटेश्वर की ओर मोड़ देती है। इस पृष्ठ पर केवल यही एक श्लोक है; पूरा सुप्रभातम्, स्तोत्रम्, प्रपत्ति और मंगलाशासनम् एक लम्बी रचना है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Prativadi Bhayankaram Annan

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क्या आप जानते हैं?

स्रोत

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड १.२३.२। वक्ता राम के पिता नहीं, महर्षि विश्वामित्र हैं: दोनों राजकुमारों को सरयू तट पर लाकर वे प्रभात होते ही उन्हें जगाते हैं।

शब्दार्थ

'कौसल्या सुप्रजा राम' राम को कौसल्या के भाग्यशाली पुत्र के रूप में सम्बोधित करता है। 'नरशार्दूल' का अर्थ 'पुरुषों में सिंह' है और 'दैवमाह्निकम्' देवताओं के प्रति दैनिक कर्तव्य, जैसे प्रातःसन्ध्या।

सुप्रभातम् का आरम्भ क्यों

रचयिता ने इस रामायण-श्लोक को देवता को जगाने के आह्वान के रूप में लिया। अगली पंक्ति 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द' वही आह्वान तिरुमला के वेंकटेश्वर तक ले जाती है।

दैनिक उपयोग

तिरुमला में सुप्रभातम् प्रभात से पहले प्रभु को जगाने के लिए गाया जाता है, और भक्त घरों में दिन की पहली ध्वनि के रूप में इसे सुनते या पढ़ते हैं।

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