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भाग्यदा लक्ष्मी का आह्वान

भजनद्वैत (हरिदास सम्प्रदाय)माँ लक्ष्मीवेंकटेश्वर

भाग्यदा लक्ष्मी का आह्वान

पुरंदरदास की कन्नड़ देवरनाम रचना, जिसमें भक्त माँ लक्ष्मी को घर आने और सौभाग्य देने के लिए बुलाते हैं; शुक्रवार को गाई जाती है।

श्लोक

रचनॆ : श्री पुरंदरदासरु भाग्यद लक्ष्मी बारम्म नम्मम्म नी सौभाग्यद लक्ष्मी बारम्म प
Rachane: Shree Purandaradasaru Bhagyada Lakshmi Baramma Nammamma Nee | Saubhagyada Lakshmi Baramma ||

श्लोक 1

हॆज्जॆय मेलॆ हॆज्जॆयनिक्कुत गॆज्जॆ काल्गळ ध्वनिय तोरुत सज्जन साधु पूजॆय वेळॆगॆ मज्जिगॆयॊळगिन बॆण्णॆयंतॆ १ भाग्य द लक्ष्मी बारम्म
Hejjeya Mele Hejjeyanikkuta Gejje Kaalgala Dhvaniya Toruta | Sajjana Sadhu Poojeya Velege Majjigeyolagina Benneyante || 1 || Bhagyada Lakshmi Baramma

श्लोक 2

कनकवृष्टिय करॆयुत बारॆ मन कामनॆय सिद्धिय तोरॆ दिनकर कोटि तेजदि हॊळॆयुव जनकरायन कुमारि बेग बारम्म २ भाग्यद लक्ष्मी बारम्म
Kanakavrishtiya Kareyuta Baare Mana Kamaneya Siddhiya Tore | Dinakara Koti Tejadi Holeyuva Janakarayana Kumari Bega Baramma || 2 || Bhagyada Lakshmi Baramma

श्लोक 3

अत्तित्तळगदॆ भक्तर मनॆयलि नित्य महोत्सव नित्य सुमंगलि सत्यव तोरुव साधु सज्जनर चित्तदि हॊळॆयुव पुत्थळि बॊंबॆ ३ भाग्यद लक्ष्मी बारम्म
Attittalagade Bhaktara Maneyali Nitya Mahotsava Nitya Sumangali | Satyava Toruva Sadhu Sajjanara Chittadi Holeyuva Putthali Bombe || 3 || Bhagyada Lakshmi Baramma

श्लोक 4

संख्यॆयिल्लद भाग्यव कॊट्टु कंकण कैय तिरुवुत बारॆ कुंकुमांकित पंकजलोचनॆ वॆंकटरमणन बिंकद राणि ४ भाग्यद लक्ष्मी बारम्म
Sankhyeyillada Bhagyava Kottu Kankana Kaiya Tiruvuta Baare | Kunkumaankita Pankajalochane Venkataramanana Binkada Raani || 4 || Bhagyada Lakshmi Baramma

श्लोक 5

सक्करॆ तुप्पद कालुवॆ हरिसि शुक्रवारद पूजॆय वेळॆगॆ अक्करॆवुळ्ळ अळगिरि रंगन चॊक्क पुरंदर विठ्ठल न राणि ५ भाग्यद लक्ष्मी बारम्म
Sakkare Tuppada Kaaluve Harisi Shukravaarada Poojeya Velege | Akkarevulla Alagiri Rangana Chokka Purandara Vittala Na Raani || 5 || Bhagyada Lakshmi Baramma

श्लोक 6

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

शुक्रवार एवं पूर्णिमा तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

संध्याकाल (दीप प्रज्वलन वेला)

पूजन सामग्री व अर्पण

कमल का पुष्प, खीर का भोग, पंचामृत, कुमकुम एवं शुद्ध घी का दीपक

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • धन-धान्य, वैभव, पारिवारिक सुख-शांति एवं मानसिक प्रसन्नता

पृष्ठभूमि

यह भजन हरिदास परंपरा का हिस्सा है, जिसे प्रायः शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा के समय या घर में सुख-शांति के लिए गाया जाता है। पुरंदरदास (1484–1564) कर्नाटक संगीत के जनक माने जाते हैं और उनके भजन सरल भाषा में गहरी भक्ति सिखाते हैं। विष्णु पुराण (1.9) में समुद्र-मंथन से प्रकट होकर विष्णु की पत्नी बनने की कथा मिलती है; यह गीत उसी पृष्ठभूमि पर लक्ष्मी का घर में स्वागत करता है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Purandara Dasa

क्या आप जानते हैं?

रचयिता

श्री पुरन्दरदास (1484–1564) कर्नाटक संगीत के जनक माने जाते हैं। उन्होंने सरल कन्नड़ भाषा में सैकड़ों भजन रचे, जिनमें यह 'भाग्यद लक्ष्मी' भजन अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन का स्वरूप

यह एक 'देवरनाम' है जो हरिदास परंपरा में गाया जाता है। इसमें पल्लवी और पाँच चरण हैं, जो लक्ष्मी के आगमन की प्रार्थना करते हैं। प्रत्येक चरण के अंत में पल्लवी दोहराई जाती है।

प्रतीकात्मकता

'मज्जिगेयोलगिन बेण्णेयन्ते' (छाछ में मक्खन के समान) की उपमा बताती है कि लक्ष्मी हर घर में सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं, लेकिन भक्ति से ही प्रकट होती हैं।

धार्मिक संदर्भ

इस भजन में लक्ष्मी को 'वेंकटरमणन बिंकद राणी' (वेंकटेश्वर की पत्नी) कहा गया है, जो तिरुपति मंदिर से जुड़ाव दर्शाता है। साथ ही शुक्रवार की पूजा का उल्लेख लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष दिन को दर्शाता है।

संगीत महत्व

सरल पद-रचना और हर चरण के बाद दोहराई जाने वाली पल्लवी के कारण इसे सभी आयु के लोग आसानी से गा लेते हैं। पुरन्दरदास ने संगीत को भक्ति का सरल माध्यम बनाया।

लोकप्रियता

यह भजन कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के घरों में सुबह-शाम गाया जाता है, विशेषकर शुक्रवार को। इसे समृद्धि और सौभाग्य के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

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