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Embroidered artwork for श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर शतनामावली: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर शतनामावली

श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर शतनामावली

अन्नपूर्णा अष्टोत्तरशतनामावली: शिवप्रिया, अन्न-पोषण की दात्री देवी अन्नपूर्णा के 108 नाम, शिवरहस्य की परम्परा से।

श्लोक

ध्यानम् एवं मंगलाचरण

१०८ नामों के पाठ से पूर्व देव स्वरूप का पावन ध्यान एवं बीज मन्त्र।

श्रीगणेशाय नमः
Shri Ganeshay Namah

श्लोक मंगलाचरण

१०८ पावन नामावली

भगवान के १०८ दिव्य नाम, जिनका 'ॐ' एवं 'नमः' के साथ अर्चन व जप किया जाता है।

ॐ अन्नपूर्णायै नमः
Om Annapurnayai Namah

श्लोक 1

ॐ शिवायै नमः
Om Shivayai Namah

श्लोक 2

ॐ देव्यै नमः
Om Devyai Namah

श्लोक 3

ॐ भीमायै नमः
Om Bhimayai Namah

श्लोक 4

ॐ पुष्ट्यै नमः
Om Pushtyai Namah

श्लोक 5

ॐ सरस्वत्यै नमः
Om Saraswatyai Namah

श्लोक 6

ॐ सर्वज्ञायै नमः
Om Sarvajnyayai Namah

श्लोक 7

ॐ पार्वत्यै नमः
Om Parvatyai Namah

श्लोक 8

ॐ दुर्गायै नमः
Om Durgayai Namah

श्लोक 9

ॐ शर्वाण्यै नमः
Om Sharvanyai Namah

श्लोक 10

ॐ शिववल्लभायै नमः
Om Shivvallabhayai Namah

श्लोक 11

ॐ वेदवेद्यायै नमः
Om Vedavedyayai Namah

श्लोक 12

ॐ महाविद्यायै नमः
Om Mahavidyayai Namah

श्लोक 13

ॐ विद्यादात्र्यै नमः
Om Vidyadatryai Namah

श्लोक 14

ॐ विशारदायै नमः
Om Visharadayai Namah

श्लोक 15

ॐ कुमार्यै नमः
Om Kumaryai Namah

श्लोक 16

ॐ त्रिपुरायै नमः
Om Tripurayai Namah

श्लोक 17

ॐ बालायै नमः
Om Balayai Namah

श्लोक 18

ॐ लक्ष्म्यै नमः
Om Lakshmyai Namah

श्लोक 19

ॐ श्रियै नमः
Om Shriyai Namah

श्लोक 20

ॐ भयहारिण्यै नमः
Om Bhayaharinyai Namah

श्लोक 21

ॐ भवान्यै नमः
Om Bhavanyai Namah

श्लोक 22

ॐ विष्णुजनन्यै नमः
Om Vishnujananyai Namah

श्लोक 23

ॐ ब्रह्मादिजनन्यै नमः
Om Brahmadijananyai Namah

श्लोक 24

ॐ गणेशजनन्यै नमः
Om Ganeshajananyai Namah

श्लोक 25

ॐ शक्त्यै नमः
Om Shaktyai Namah

श्लोक 26

ॐ कुमारजनन्यै नमः
Om Kumarajananyai Namah

श्लोक 27

ॐ शुभायै नमः
Om Shubhayai Namah

श्लोक 28

ॐ भोगप्रदायै नमः
Om Bhogapradayai Namah

श्लोक 29

ॐ भगवत्यै नमः
Om Bhagavatyai Namah

श्लोक 30

ॐ भक्ताभीष्टप्रदायिन्यै नमः
Om Bhaktabhishtapradayinyai Namah

श्लोक 31

ॐ भवरोगहरायै नमः
Om Bhavarogaharayai Namah

श्लोक 32

ॐ भव्यायै नमः
Om Bhavyayai Namah

श्लोक 33

ॐ शुभ्रायै नमः
Om Shubhrayai Namah

श्लोक 34

ॐ परममङ्गलायै नमः
Om Paramamangalayai Namah

श्लोक 35

ॐ भवान्यै नमः
Om Bhavanyai Namah

श्लोक 36

ॐ चञ्चलायै नमः
Om Chanchalayai Namah

श्लोक 37

ॐ गौर्यै नमः
Om Gauryai Namah

श्लोक 38

ॐ चारुचन्द्रकलाधरायै नमः
Om Charuchandrakaladharayai Namah

श्लोक 39

ॐ विशालाक्ष्यै नमः
Om Vishalakshyai Namah

श्लोक 40

ॐ विश्वमात्रे नमः
Om Vishwamatre Namah

श्लोक 41

ॐ विश्ववन्द्यायै नमः
Om Vishwavandyayai Namah

श्लोक 42

ॐ विलासिन्यै नमः
Om Vilasinyai Namah

श्लोक 43

ॐ आर्यायै नमः
Om Aryayai Namah

श्लोक 44

ॐ कल्याणनिलायायै नमः
Om Kalyananilayatayai Namah

श्लोक 45

ॐ रुद्राण्यै नमः
Om Rudranyai Namah

श्लोक 46

ॐ कमलासनायै नमः
Om Kamalasanayai Namah

श्लोक 47

ॐ शुभप्रदायै नमः
Om Shubhapradayai Namah

श्लोक 48

ॐ शुभावर्तायै नमः
Om Shubhavartayai Namah

श्लोक 49

ॐ वृत्तपीनपयोधरायै नमः
Om Vrittapinapayodharayai Namah

श्लोक 50

ॐ अम्बायै नमः
Om Ambayai Namah

श्लोक 51

ॐ संहारमथन्यै नमः
Om Samharamathanyai Namah

श्लोक 52

ॐ मृडान्यै नमः
Om Mridanyai Namah

श्लोक 53

ॐ सर्वमङ्गलायै नमः
Om Sarvamangalayai Namah

श्लोक 54

ॐ विष्णुसंसेवितायै नमः
Om Vishnusamsevitayai Namah

श्लोक 55

ॐ सिद्धायै नमः
Om Siddhayai Namah

श्लोक 56

ॐ ब्रह्माण्यै नमः
Om Brahmapragya Namah (corrected for meter: original 'Brahmannyai' -> 'Brahmapragya' as per verse 'brahmāṇyai') - but to preserve original:

श्लोक 57

ॐ सुरसेवितायै नमः
Om Surasevitayai Namah

श्लोक 58

ॐ परमानन्ददायै नमः
Om Paramanandadayai Namah

श्लोक 59

ॐ शान्त्यै नमः
Om Shantyai Namah

श्लोक 60

ॐ परमानन्दरूपिण्यै नमः
Om Paramanandarupinyai Namah

श्लोक 61

ॐ परमानन्दजनन्यै नमः
Om Paramanandajananyai Namah

श्लोक 62

ॐ परायै नमः
Om Parayai Namah

श्लोक 63

ॐ आनन्दप्रदायिन्यै नमः
Om Anandapradayinyai Namah

श्लोक 64

ॐ परोपकारनिरतायै नमः
Om Paropakaraniratayai Namah

श्लोक 65

ॐ परमायै नमः
Om Paramayai Namah

श्लोक 66

ॐ भक्तवत्सलायै नमः
Om Bhaktavatsalayai Namah

श्लोक 67

ॐ पूर्णचन्द्राभवदनायै नमः
Om Poornachandrabhavadanayai Namah

श्लोक 68

ॐ पूर्णचन्द्रनिभांशुकायै नमः
Om Poornachandranibhamshukayai Namah

श्लोक 69

ॐ शुभलक्षणसम्पन्नायै नमः
Om Shubhalakshanasampannayai Namah

श्लोक 70

ॐ शुभानन्दगुणार्णवायै नमः
Om Shubhanandagunarnavayai Namah

श्लोक 71

ॐ शुभसौभाग्यनिलयायै नमः
Om Shubhasaubhagyanilayayai Namah

श्लोक 72

ॐ शुभदायै नमः
Om Shubhadayai Namah

श्लोक 73

ॐ रतिप्रियायै नमः
Om Ratipriyayai Namah

श्लोक 74

ॐ चण्डिकायै नमः
Om Chandikayai Namah

श्लोक 75

ॐ चण्डमथन्यै नमः
Om Chandamathanyai Namah

श्लोक 76

ॐ चण्डदर्पनिवारिण्यै नमः
Om Chandadarpanivarinyai Namah

श्लोक 77

ॐ मार्ताण्डनयनायै नमः
Om Martandanayanayai Namah

श्लोक 78

ॐ साध्व्यै नमः
Om Sadhvayai Namah

श्लोक 79

ॐ चन्द्राग्निनयनायै नमः
Om Chandraganinayanayai Namah

श्लोक 80

ॐ सत्यै नमः
Om Satyai Namah

श्लोक 81

ॐ पुण्डरीकहरायै नमः
Om Pundarikaharayai Namah

श्लोक 82

ॐ पूर्णायै नमः
Om Poornayai Namah

श्लोक 83

ॐ पुण्यदायै नमः
Om Punyadayai Namah

श्लोक 84

ॐ पुण्यरूपिण्यै नमः
Om Punyarupinyai Namah

श्लोक 85

ॐ मायातीतायै नमः
Om Mayateetayai Namah

श्लोक 86

ॐ श्रेष्ठमायायै नमः
Om Shresthamayayai Namah

श्लोक 87

ॐ श्रेष्ठधर्मायै नमः
Om Shresthadharmayai Namah

श्लोक 88

ॐ आत्मवन्दितायै नमः
Om Atmavanditayai Namah

श्लोक 89

ॐ असृष्ट्यै नमः
Om Asrishtyai Namah

श्लोक 90

ॐ सङ्गरहितायै नमः
Om Sangarahitayai Namah

श्लोक 91

ॐ सृष्टिहेतवे नमः
Om Srishtihetave Namah

श्लोक 92

ॐ कपर्दिन्यै नमः
Om Kapardinyai Namah

श्लोक 93

ॐ वृषारूढायै नमः
Om Vrisharoodhayai Namah

श्लोक 94

ॐ शूलहस्तायै नमः
Om Shulahastayai Namah

श्लोक 95

ॐ स्थितिसंहारकारिण्यै नमः
Om Sthitisamharakarinyai Namah

श्लोक 96

ॐ मन्दस्मितायै नमः
Om Mandasmitayai Namah

श्लोक 97

ॐ स्कन्दमात्रे नमः
Om Skandamatre Namah

श्लोक 98

ॐ शुद्धचित्तायै नमः
Om Shuddhachittayai Namah

श्लोक 99

ॐ मुनिस्तुतायै नमः
Om Munistutayai Namah

श्लोक 100

ॐ महाभगवत्यै नमः
Om Mahabhagavatyai Namah

श्लोक 101

ॐ दक्षायै नमः
Om Dakshayai Namah

श्लोक 102

ॐ दक्षाध्वरविनाशिन्यै नमः
Om Dakshadhvaravinashinyai Namah

श्लोक 103

ॐ सर्वार्थदात्र्यै नमः
Om Sarvarthadatryai Namah

श्लोक 104

ॐ सावित्र्यै नमः
Om Savitryai Namah

श्लोक 105

ॐ सदाशिवकुटुम्बिन्यै नमः
Om Sadashivakutumbinyai Namah

श्लोक 106

ॐ नित्यसुन्दरसर्वाङ्ग्यै नमः
Om Nityasundarasarvangyai Namah

श्लोक 107

ॐ सच्चिदानन्दलक्षणायै नमः
Om Sachchidanandalakshanayai Namah

श्लोक 108

समापनम् एवं फलश्रुति

पाठ की पूर्णाहुति, ईश्वर को समर्पण एवं माहात्म्य।

इति श्री अन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम्
Iti Shri Annapurnashtottarshatanamavali Sampoornam

श्लोक समापनम्

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:प्रति नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' का सस्वर उच्चारण करें।

पृष्ठभूमि

संस्कृत डॉक्यूमेंट्स इस नामावली को 'अन्नपूर्णाष्टोत्तरशत नामावलिः' के रूप में रखता है, और स्रोत के रूप में ब्रह्मोत्तरखण्ड तथा शिवरहस्य का और संगत स्तोत्रों से 'थोड़े भेद' का उल्लेख करता है; यहाँ की 110 पंक्तियों में से 98 उससे अक्षरशः मिलती हैं। पार्वती का रूप और शिव की सहधर्मिणी अन्नपूर्णा अन्न और पोषण की दात्री के रूप में पूजित हैं। नाम क्र. 1, अन्नपूर्णा, से क्र. 108 तक चलते हैं; पाठ गणेश-नमस्कार से आरंभ और पुष्पिका पर समाप्त होता है, इसीलिए इसमें 110 पंक्तियाँ गिनी जाती हैं। इसे घर और मंदिर की पूजा में अन्न-समृद्धि और क्षुधा-निवारण के लिए पढ़ा जाता है।

क्या आप जानते हैं?

संरचना

108 नामों की नामावली, प्रत्येक ॐ से आरंभ और नमः पर समाप्त। इस पृष्ठ की पंक्ति-सूची में आरंभ का गणेश-नमस्कार और अंत की पुष्पिका भी है, इसलिए कुल 110 प्रविष्टियाँ हैं।

क्रमांकन

स्रोत में हर दसवें नाम (10, 20 से 100 तक) के बाद संख्या छपी है, इसीलिए कुछ प्रविष्टियों में अंक दिखते हैं; नाम स्वयं 1 से 108 तक गिने जाते हैं।

देवताओं की माता

'विष्णुजननी' (क्र. 23), 'ब्रह्मादिजननी' (क्र. 24), 'गणेशजननी' (क्र. 25) और 'कुमारजननी' (क्र. 27) जैसे नाम उन्हें विष्णु, ब्रह्मा आदि देवताओं तथा गणेश और कुमार (स्कन्द) की माता के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

देवी के अनेक रूप

उन्हें सरस्वती, लक्ष्मी, श्री, दुर्गा, पार्वती, भवानी और त्रिपुरा कहकर संबोधित किया गया है, इस प्रकार नामावली सब महादेवियों को सबको अन्न देने वाली एक माता में समेटती है।

पौराणिक कथाओं की गूँज

'दक्षाध्वरविनाशिनी' (क्र. 103) दक्ष-यज्ञ के विनाश की ओर और 'चण्डमथनी' (क्र. 76) चण्ड दैत्य के वध की ओर संकेत करते हैं, जो पुराणों और देवीमाहात्म्य (अध्याय 7) में देवी की कथाएँ हैं।

Devi की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Devi

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