श्री अन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामावली
अन्नपूर्णादेव्याः अष्टोत्तरशतनाम्नां सङ्कलनम् एतत्। भक्त्या पठितं सत् अन्नपूर्णादेवीप्रसादकम् भवति।
पद्यानि
ध्यानम् मङ्गलाचरणं च
अष्टोत्तरशतनामजपात् पूर्वं भगवत्स्वरूपस्य ध्यानं बीजमन्त्रश्च।
श्रीगणेशः देवः
श्लोकः मंगलाचरण
अष्टोत्तरशतनामावली
भगवतः १०८ पावननामानि, यैः प्रणवपूर्वकं नमः-अन्तेन च अर्चनं जप्यते।
अन्नपूर्णा देवी
श्लोकः 1
शिवा देवी
श्लोकः 2
देवी
श्लोकः 3
भीमा देवी
श्लोकः 4
पुष्टि देवी
श्लोकः 5
सरस्वती देवी
श्लोकः 6
सर्वज्ञा देवी
श्लोकः 7
पार्वती देवी
श्लोकः 8
दुर्गा देवी
श्लोकः 9
शर्वाणी देवी
श्लोकः 10
शिववल्लभा देवी
श्लोकः 11
वेदवेद्या देवी
श्लोकः 12
महाविद्या देवी
श्लोकः 13
विद्यादात्री देवी
श्लोकः 14
विशारदा देवी
श्लोकः 15
कुमारी देवी
श्लोकः 16
त्रिपुरा देवी
श्लोकः 17
बाला देवी
श्लोकः 18
लक्ष्मी देवी
श्लोकः 19
श्री देवी
श्लोकः 20
भयहारिणी देवी
श्लोकः 21
भवानी देवी
श्लोकः 22
विष्णुजननी देवी
श्लोकः 23
ब्रह्मादिजननी देवी
श्लोकः 24
गणेशजननी देवी
श्लोकः 25
शक्ति देवी
श्लोकः 26
कुमारजननी देवी
श्लोकः 27
शुभा देवी
श्लोकः 28
भोगप्रदा देवी
श्लोकः 29
भगवती देवी
श्लोकः 30
भक्ताभीष्टप्रदायिनी देवी
श्लोकः 31
भवरोगहरा देवी
श्लोकः 32
भव्या देवी
श्लोकः 33
शुभ्रा देवी
श्लोकः 34
परममङ्गला देवी
श्लोकः 35
भवानी देवी
श्लोकः 36
चञ्चला देवी
श्लोकः 37
गौरी देवी
श्लोकः 38
चारुचन्द्रकलाधरा देवी
श्लोकः 39
विशालाक्षी देवी
श्लोकः 40
विश्वमाता देवी
श्लोकः 41
विश्ववन्द्या देवी
श्लोकः 42
विलासिनी देवी
श्लोकः 43
आर्या देवी
श्लोकः 44
कल्याणनिलया देवी
श्लोकः 45
रुद्राणी देवी
श्लोकः 46
कमलासना देवी
श्लोकः 47
शुभप्रदा देवी
श्लोकः 48
शुभावर्ता देवी
श्लोकः 49
वृत्तपीनपयोधरा देवी
श्लोकः 50
अम्बा देवी
श्लोकः 51
संहारमथनी देवी
श्लोकः 52
मृडानी देवी
श्लोकः 53
सर्वमङ्गला देवी
श्लोकः 54
विष्णुसंसेविता देवी
श्लोकः 55
सिद्धा देवी
श्लोकः 56
ब्रह्माणी देवी
श्लोकः 57
सुरसेविता देवी
श्लोकः 58
परमानन्ददा देवी
श्लोकः 59
शान्ति देवी
श्लोकः 60
परमानन्दरूपिणी देवी
श्लोकः 61
परमानन्दजननी देवी
श्लोकः 62
परा देवी
श्लोकः 63
आनन्दप्रदायिनी देवी
श्लोकः 64
परोपकारनिरता देवी
श्लोकः 65
परमा देवी
श्लोकः 66
भक्तवत्सला देवी
श्लोकः 67
पूर्णचन्द्राभवदना देवी
श्लोकः 68
पूर्णचन्द्रनिभांशुका देवी
श्लोकः 69
शुभलक्षणसम्पन्ना देवी
श्लोकः 70
शुभानन्दगुणार्णवा देवी
श्लोकः 71
शुभसौभाग्यनिलया देवी
श्लोकः 72
शुभदा देवी
श्लोकः 73
रतिप्रिया देवी
श्लोकः 74
चण्डिका देवी
श्लोकः 75
चण्डमथनी देवी
श्लोकः 76
चण्डदर्पनिवारिणी देवी
श्लोकः 77
मार्ताण्डनयना देवी
श्लोकः 78
साध्वी देवी
श्लोकः 79
चन्द्राग्निनयना देवी
श्लोकः 80
सती देवी
श्लोकः 81
पुण्डरीकहरा देवी
श्लोकः 82
पूर्णा देवी
श्लोकः 83
पुण्यदा देवी
श्लोकः 84
पुण्यरूपिणी देवी
श्लोकः 85
मायातीता देवी
श्लोकः 86
श्रेष्ठमाया देवी
श्लोकः 87
श्रेष्ठधर्मा देवी
श्लोकः 88
आत्मवन्दिता देवी
श्लोकः 89
असृष्टा देवी
श्लोकः 90
सङ्गरहिता देवी
श्लोकः 91
सृष्टिहेतुः देवी
श्लोकः 92
कपर्दिनी देवी
श्लोकः 93
वृषारूढा देवी
श्लोकः 94
शूलहस्ता देवी
श्लोकः 95
स्थितिसंहारकारिणी देवी
श्लोकः 96
मन्दस्मिता देवी
श्लोकः 97
स्कन्दमाता देवी
श्लोकः 98
शुद्धचित्ता देवी
श्लोकः 99
मुनिस्तुता देवी
श्लोकः 100
महाभगवती देवी
श्लोकः 101
दक्षा देवी
श्लोकः 102
दक्षाध्वरविनाशिनी देवी
श्लोकः 103
सर्वार्थदात्री देवी
श्लोकः 104
सावित्री देवी
श्लोकः 105
सदाशिवकुटुम्बिनी देवी
श्लोकः 106
नित्यसुन्दरसर्वाङ्गी देवी
श्लोकः 107
सच्चिदानन्दलक्षणा देवी
श्लोकः 108
समापनम् फलश्रुतिश्च
पाठस्य समाप्तिः, ईश्वरार्पणं फलप्राप्तिश्च।
इति श्री अन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा
श्लोकः समापनम्
Worship Guidelines & Chanting Benefits (Phalashruti)
प्रतिदिनं अथवा शुभतिथौ
ब्राह्मे मुहूर्ते सन्ध्याकाले च
घृतदीपः, धूपः, शुद्धपुष्पं, जलं च
- मानसिकशान्तिः, आत्मोन्नतिः, मङ्गलमयवातावरणम्
पृष्ठभूमिः
इदं स्तोत्रं शाक्तपरम्परायाम् अन्नपूर्णादेवीपूजायाम् प्रयुज्यते। अष्टोत्तरशतनामावलिः इति प्रसिद्धम्। अस्य पठनं देवीप्रसादार्थं क्रियते।
ज्ञातव्य-विशेषः
श्लोकसंख्या
अत्र समग्रे स्तोत्रे १०८ नामानि सन्ति, येषाम् अन्तिमं नाम
Devi
हिन्दूधर्मःतः अधिकम्
सर्वं पश्यतसम्बद्धशिक्षाः
सैव शिक्षा, विविधपरम्परासु प्रतिध्वनिता
