Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली

विश्वसार तन्त्र से भगवती दुर्गा के 108 नाम, जो 'ॐ सत्यै नमः' से आरम्भ होते हैं और महिषासुर, शुम्भ आदि पर उनकी विजय का स्मरण कराते हैं।

श्लोक

१०८ पावन नामावली

भगवान के १०८ दिव्य नाम, जिनका 'ॐ' एवं 'नमः' के साथ अर्चन व जप किया जाता है।

ॐ सत्यै नमः

श्लोक 1

ॐ साध्व्यै नमः

श्लोक 2

ॐ भवप्रीतायै नमः

श्लोक 3

ॐ भवान्यै नमः

श्लोक 4

ॐ भवमोचन्यै नमः

श्लोक 5

ॐ आर्यायै नमः

श्लोक 6

ॐ दुर्गायै नमः

श्लोक 7

ॐ जयायै नमः

श्लोक 8

ॐ आद्यायै नमः

श्लोक 9

ॐ त्रिनेत्रायै नमः

श्लोक 10

ॐ शूलधारिण्यै नमः

श्लोक 11

ॐ पिनाकधारिण्यै नमः

श्लोक 12

ॐ चित्रायै नमः

श्लोक 13

ॐ चण्डघण्टायै नमः

श्लोक 14

ॐ महातपायै नमः

श्लोक 15

ॐ मनरूपायै नमः

श्लोक 16

ॐ बुद्ध्यै नमः

श्लोक 17

ॐ अहङ्कारायै नमः

श्लोक 18

ॐ चित्तरूपायै नमः

श्लोक 19

ॐ चितायै नमः

श्लोक 20

ॐ चित्यै नमः

श्लोक 21

ॐ सर्वमन्त्रमय्यै नमः

श्लोक 22

ॐ सत्तायै नमः

श्लोक 23

ॐ सत्यानन्दस्वरूपिण्यै नमः

श्लोक 24

ॐ अनन्तायै नमः

श्लोक 25

ॐ भाविन्यै नमः

श्लोक 26

ॐ भाव्यायै नमः

श्लोक 27

ॐ भव्यायै नमः

श्लोक 28

ॐ अभव्यायै नमः

श्लोक 29

ॐ सदागत्यै नमः

श्लोक 30

ॐ शाम्भव्यै नमः

श्लोक 31

ॐ देवमात्रे नमः

श्लोक 32

ॐ चिन्तायै नमः

श्लोक 33

ॐ रत्नप्रियायै नमः

श्लोक 34

ॐ सदायै नमः

श्लोक 35

ॐ सर्वविद्यायै नमः

श्लोक 36

ॐ दक्षकन्यायै नमः

श्लोक 37

ॐ दक्षयज्ञविनाशिन्यै नमः

श्लोक 38

ॐ अपर्णायै नमः

श्लोक 39

ॐ अनेकवर्णायै नमः

श्लोक 40

ॐ पाटलायै नमः

श्लोक 41

ॐ पाटलावत्यै नमः

श्लोक 42

ॐ पट्टाम्बरपरीधानायै नमः

श्लोक 43

ॐ कलमञ्जीररञ्जिन्यै नमः

श्लोक 44

ॐ अमेयविक्रमायै नमः

श्लोक 45

ॐ क्रूरायै नमः

श्लोक 46

ॐ सुन्दर्यै नमः

श्लोक 47

ॐ सुरसुन्दर्यै नमः

श्लोक 48

ॐ वनदुर्गायै नमः

श्लोक 49

ॐ मातङ्ग्यै नमः

श्लोक 50

ॐ मतङ्गमुनिपूजितायै नमः

श्लोक 51

ॐ ब्राह्म्यै नमः

श्लोक 52

ॐ माहेश्वर्यै नमः

श्लोक 53

ॐ ऐन्द्र्यै नमः

श्लोक 54

ॐ कौमार्यै नमः

श्लोक 55

ॐ वैष्णव्यै नमः

श्लोक 56

ॐ चामुण्डायै नमः

श्लोक 57

ॐ वाराह्यै नमः

श्लोक 58

ॐ लक्ष्म्यै नमः

श्लोक 59

ॐ पुरुषाकृत्यै नमः

श्लोक 60

ॐ विमलायै नमः

श्लोक 61

ॐ उत्कर्षिण्यै नमः

श्लोक 62

ॐ ज्ञानायै नमः

श्लोक 63

ॐ क्रियायै नमः

श्लोक 64

ॐ नित्यायै नमः

श्लोक 65

ॐ बुद्धिदायै नमः

श्लोक 66

ॐ बहुलायै नमः

श्लोक 67

ॐ बहुलप्रेमायै नमः

श्लोक 68

ॐ सर्ववाहनवाहनायै नमः

श्लोक 69

ॐ निशुम्भशुम्भहनन्यै नमः

श्लोक 70

ॐ महिषासुरमर्दिन्यै नमः

श्लोक 71

ॐ मधुकैटभहन्त्र्यै नमः

श्लोक 72

ॐ चण्डमुण्डविनाशिन्यै नमः

श्लोक 73

ॐ सर्वासुरविनाशायै नमः

श्लोक 74

ॐ सर्वदानवघातिन्यै नमः

श्लोक 75

ॐ सर्वशास्त्रमय्यै नमः

श्लोक 76

ॐ सत्यायै नमः

श्लोक 77

ॐ सर्वास्त्रधारिण्यै नमः

श्लोक 78

ॐ अनेकशस्त्रहस्तायै नमः

श्लोक 79

ॐ अनेकास्त्रधारिण्यै नमः

श्लोक 80

ॐ कुमार्यै नमः

श्लोक 81

ॐ एककन्यायै नमः

श्लोक 82

ॐ कैशोर्यै नमः

श्लोक 83

ॐ युवत्यै नमः

श्लोक 84

ॐ यत्यै नमः

श्लोक 85

ॐ अप्रौढायै नमः

श्लोक 86

ॐ प्रौढायै नमः

श्लोक 87

ॐ वृद्धमात्रे नमः

श्लोक 88

ॐ बलप्रदायै नमः

श्लोक 89

ॐ महोदर्यै नमः

श्लोक 90

ॐ मुक्तकेश्यै नमः

श्लोक 91

ॐ घोररूपायै नमः

श्लोक 92

ॐ महाबलायै नमः

श्लोक 93

ॐ अग्निज्वालायै नमः

श्लोक 94

ॐ रौद्रमुख्यै नमः

श्लोक 95

ॐ कालरात्र्यै नमः

श्लोक 96

ॐ तपस्विन्यै नमः

श्लोक 97

ॐ नारायण्यै नमः

श्लोक 98

ॐ भद्रकाल्यै नमः

श्लोक 99

ॐ विष्णुमायायै नमः

श्लोक 100

ॐ जलोदर्यै नमः

श्लोक 101

ॐ शिवदूत्यै नमः

श्लोक 102

ॐ कराल्यै नमः

श्लोक 103

ॐ अनन्तायै नमः

श्लोक 104

ॐ परमेश्वर्यै नमः

श्लोक 105

ॐ कात्यायन्यै नमः

श्लोक 106

ॐ सावित्र्यै नमः

श्लोक 107

ॐ प्रत्यक्षायै नमः

श्लोक 108

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

फलश्रुति
शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभफलश्रुति
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:प्रति नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' का सस्वर उच्चारण करें।

पृष्ठभूमि

संस्कृत डॉक्यूमेंट्स इस 108 नामों की आवली को विश्वसार तंत्र से उद्धृत श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामावली के रूप में रखता है, जो 'ॐ सत्यै नमः, ॐ साध्व्यै नमः' से आरम्भ होती है (नाम 1-108)। यह नवरात्रि और दुर्गा पूजा का प्रमुख अंग है। मान्यता है कि लाल पुष्पों या बिल्वपत्रों से इन नामों का जप करने से घोर से घोर संकट भी टल जाते हैं।

क्या आप जानते हैं?

'अपर्णा' नाम का रहस्य

भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई घोर तपस्या में माता पार्वती ने अन्न-जल के साथ सूखे पत्ते (पर्ण) खाना भी छोड़ दिया था, जिससे उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा।

सप्तमातृका स्वरूप

ब्राह्मी, माहेश्वरी, ऐन्द्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुण्डा और वाराही, ये सात क्रमागत नाम सप्तमातृकाओं का वर्णन करते हैं, जो दर्शाते हैं कि समस्त देवताओं की शक्तियां मां जगदम्बा में ही समाहित हैं।

'दुर्गा' शब्द के पाँच अक्षर

एक परम्परागत व्याख्या के अनुसार 'द' दैत्यनाशक, 'उ' विघ्ननाशक, 'र' रोगनाशक, 'ग' पापनाशक और 'आ' भयनाशक है; इस प्रकार 'दुर्गा' नाम सब ओर से रक्षा करने वाला है।

'शिवदूती' का प्रसंग

'शिवदूती' नाम देवी महात्म्य के उस प्रसंग का स्मरण कराता है जिसमें देवी ने स्वयं भगवान शिव को अपना दूत बनाकर शुम्भ-निशुम्भ के पास भेजा था।

देवी महात्म्य की प्रतिध्वनि

महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहन्त्री, चण्डमुण्डविनाशिनी और निशुम्भशुम्भहनन जैसे नाम देवी महात्म्य के युद्धों का स्मरण कराते हैं, इसलिए यह नामावली उनकी विजयों का संक्षिप्त पुनर्कथन है।

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