Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली

लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली: देवी लक्ष्मी के 108 नाम, शुक्रवार, वरलक्ष्मी व्रत और दीपावली पर समृद्धि और कृपा के लिए पाठ्य।

श्लोक

१०८ पावन नामावली

भगवान के १०८ दिव्य नाम, जिनका 'ॐ' एवं 'नमः' के साथ अर्चन व जप किया जाता है।

ॐ प्रकृत्यै नमः

श्लोक 1

ॐ विकृत्यै नमः

श्लोक 2

ॐ विद्यायै नमः

श्लोक 3

ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः

श्लोक 4

ॐ श्रद्धायै नमः

श्लोक 5

ॐ विभूतये नमः

श्लोक 6

ॐ सुरभ्यै नमः

श्लोक 7

ॐ परमात्मिकायै नमः

श्लोक 8

ॐ वाचे नमः

श्लोक 9

ॐ पद्मालयायै नमः

श्लोक 10

ॐ पद्मायै नमः

श्लोक 11

ॐ शुचये नमः

श्लोक 12

ॐ स्वाहायै नमः

श्लोक 13

ॐ स्वधायै नमः

श्लोक 14

ॐ सुधायै नमः

श्लोक 15

ॐ धन्यायै नमः

श्लोक 16

ॐ हिरण्मय्यै नमः

श्लोक 17

ॐ लक्ष्म्यै नमः

श्लोक 18

ॐ नित्यपुष्टायै नमः

श्लोक 19

ॐ विभावर्यै नमः

श्लोक 20

ॐ अदित्यै नमः

श्लोक 21

ॐ दित्यै नमः

श्लोक 22

ॐ दीपायै नमः

श्लोक 23

ॐ वसुधायै नमः

श्लोक 24

ॐ वसुधारिण्यै नमः

श्लोक 25

ॐ कमलायै नमः

श्लोक 26

ॐ कान्तायै नमः

श्लोक 27

ॐ कामाक्ष्यै नमः

श्लोक 28

ॐ क्रोधसम्भवायै नमः

श्लोक 29

ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः

श्लोक 30

ॐ बुद्धये नमः

श्लोक 31

ॐ अनघायै नमः

श्लोक 32

ॐ हरिवल्लभायै नमः

श्लोक 33

ॐ अशोकायै नमः

श्लोक 34

ॐ अमृतायै नमः

श्लोक 35

ॐ दीप्तायै नमः

श्लोक 36

ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः

श्लोक 37

ॐ धर्मनिलयायै नमः

श्लोक 38

ॐ करुणायै नमः

श्लोक 39

ॐ लोकमात्रे नमः

श्लोक 40

ॐ पद्मप्रियायै नमः

श्लोक 41

ॐ पद्महस्तायै नमः

श्लोक 42

ॐ पद्माक्ष्यै नमः

श्लोक 43

ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः

श्लोक 44

ॐ पद्मोद्भवायै नमः

श्लोक 45

ॐ पद्ममुख्यै नमः

श्लोक 46

ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः

श्लोक 47

ॐ रमायै नमः

श्लोक 48

ॐ पद्ममालाधरायै नमः

श्लोक 49

ॐ देव्यै नमः

श्लोक 50

ॐ पद्मिन्यै नमः

श्लोक 51

ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः

श्लोक 52

ॐ पुण्यगन्धायै नमः

श्लोक 53

ॐ सुप्रसन्नायै नमः

श्लोक 54

ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः

श्लोक 55

ॐ प्रभायै नमः

श्लोक 56

ॐ चन्द्रवदनायै नमः

श्लोक 57

ॐ चन्द्रायै नमः

श्लोक 58

ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः

श्लोक 59

ॐ चतुर्भुजायै नमः

श्लोक 60

ॐ चन्द्ररूपायै नमः

श्लोक 61

ॐ इन्दिरायै नमः

श्लोक 62

ॐ इन्दुशीतलायै नमः

श्लोक 63

ॐ आह्लादजनन्यै नमः

श्लोक 64

ॐ पुष्ट्यै नमः

श्लोक 65

ॐ शिवायै नमः

श्लोक 66

ॐ शिवङ्कर्यै नमः

श्लोक 67

ॐ सत्यै नमः

श्लोक 68

ॐ विमलायै नमः

श्लोक 69

ॐ विश्वजनन्यै नमः

श्लोक 70

ॐ तुष्ट्यै नमः

श्लोक 71

ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः

श्लोक 72

ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः

श्लोक 73

ॐ शान्तायै नमः

श्लोक 74

ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः

श्लोक 75

ॐ श्रियै नमः

श्लोक 76

ॐ भास्कर्यै नमः

श्लोक 77

ॐ बिल्वनिलयायै नमः

श्लोक 78

ॐ वरारोहायै नमः

श्लोक 79

ॐ यशस्विन्यै नमः

श्लोक 80

ॐ वसुन्धरायै नमः

श्लोक 81

ॐ उदाराङ्गायै नमः

श्लोक 82

ॐ हरिण्यै नमः

श्लोक 83

ॐ हेममालिन्यै नमः

श्लोक 84

ॐ धनधान्यकर्यै नमः

श्लोक 85

ॐ सिद्धये नमः

श्लोक 86

ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः

श्लोक 87

ॐ शुभप्रदायै नमः

श्लोक 88

ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः

श्लोक 89

ॐ वरलक्ष्म्यै नमः

श्लोक 90

ॐ वसुप्रदायै नमः

श्लोक 91

ॐ शुभायै नमः

श्लोक 92

ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः

श्लोक 93

ॐ समुद्रतनयायै नमः

श्लोक 94

ॐ जयायै नमः

श्लोक 95

ॐ मङ्गलदेव्यै नमः

श्लोक 96

ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः

श्लोक 97

ॐ विष्णुपत्न्यै नमः

श्लोक 98

ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः

श्लोक 99

ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः

श्लोक 100

ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः

श्लोक 101

ॐ देव्यै नमः

श्लोक 102

ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः

श्लोक 103

ॐ नवदुर्गायै नमः

श्लोक 104

ॐ महाकाल्यै नमः

श्लोक 105

ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः

श्लोक 106

ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः

श्लोक 107

ॐ भुवनेश्वर्यै नमः

श्लोक 108

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

फलश्रुति
शुभ दिन व तिथि

शुक्रवार एवं पूर्णिमा तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

संध्याकाल (दीप प्रज्वलन वेला)

पूजन सामग्री व अर्पण

कमल का पुष्प, खीर का भोग, पंचामृत, कुमकुम एवं शुद्ध घी का दीपक

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभफलश्रुति
  • धन-धान्य, वैभव, पारिवारिक सुख-शांति एवं मानसिक प्रसन्नता
पाठ विधि सुझाव:प्रति नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' का सस्वर उच्चारण करें।

पृष्ठभूमि

संस्कृत डॉक्यूमेंट्स इस नामावली को 'लक्ष्म्यष्टोत्तरशत नामावलिः 1' के रूप में छापता है और किसी ग्रंथ को स्रोत नहीं बताता; यहाँ के 108 में से 103 नाम उससे मिलते हैं। क्रमांक 1 से 108 तक के ये नाम विष्णुपत्नी लक्ष्मी की स्तुति करते हैं, जो पुराणों के अनुसार समुद्र-मंथन से कमल पर आसीन प्रकट हुईं (नाम क्र. 45 और 94)। भक्ति में वे केवल धन नहीं, अष्टलक्ष्मी की अष्टविध संपदा का रूप हैं; शुक्रवार, वरलक्ष्मी व्रत और दीपावली पर कमल-पुष्प और कुंकुम से इनका पाठ होता है।

क्या आप जानते हैं?

क्षीरसागर से प्राकट्य

नाम क्र. 94 'समुद्रतनया' और नाम क्र. 45 'पद्मोद्भवा' समुद्र-मंथन के उस क्षण की याद दिलाते हैं जब महालक्ष्मी कमल पर प्रकट हुईं और उन्होंने श्रीहरि विष्णु को ही अपना शाश्वत स्वामी चुना।

अष्टलक्ष्मी का व्यापक स्वरूप

नाम क्र. 85 'धनधान्यकरी' अष्टलक्ष्मी की अष्टविध संपदा की ओर संकेत करता है: आदि, धन, धान्य, गज, संतान, धैर्य, विजय और विद्या लक्ष्मी।

नारायण के हृदय में वास

नाम क्र. 99 'नारायणसमाश्रिता' विष्णु के वक्षःस्थल पर लक्ष्मी के निवास की याद दिलाता है, जो शक्ति और शक्तिमान के अभिन्न संबंध को दर्शाता है।

बिल्व वृक्ष में निवास

'बिल्वनिलया' नाम उस पावन रहस्य को प्रकट करता है जिसमें माँ लक्ष्मी का वास बिल्व पत्र और बिल्व वृक्ष में माना गया है, जो शिव और विष्णु की उपासना का पावन सेतु है।

आंतरिक दरिद्रता का नाश

'दारिद्र्यनाशिनी' नाम केवल भौतिक अभाव को ही नहीं मिटाता, बल्कि मन की संकीर्णता, असंतोष और लोभ रूपी आध्यात्मिक दरिद्रता को भी समूल नष्ट कर देता है।

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