राम का वनवास तथा विजयी वापसी
स्कन्द पुराण में वर्णित फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी की पावन कथा, जिसमें महर्षि बकदालभ्य के उपदेश से भगवान श्रीराम ने लंका विजय और समुद्र पार करने हेतु यह व्रत किया था।
राजकुमार राम और समता का दिव्य गुण
विष्णु, राम और कृष्ण के पवित्र नामों की माला; अच्युताष्टकम् के श्लोक 1 का लोकप्रिय भजन-रूप, नाम-स्मरण के लिए।
यह एक सरल और मधुर भजन है जो भगवान राम की महिमा का गुणगान करता है और उन्हें जगत के पालनहार, अंतर्यामी और सबके स्वामी के रूप में प्रस्तुत करता है।
यह एक भक्तिगीत है जो भगवान राम और कृष्ण के दिव्य नामों की सुंदरता और शक्ति का गुणगान करता है। इसमें बताया गया है कि दोनों नामों का जप कैसे भक्तों को प्रेम, शांति और सुख प्रदान करता है।
यह एक भक्ति गीत है जिसमें भक्त प्रभु से विनती करता है कि वे कभी राम के रूप में और कभी श्याम (कृष्ण) के रूप में आएं, और साथ ही शिव, विष्णु और गणपति जैसे अन्य दिव्य रूपों में भी प्रकट हों।
यह एक भजन है जिसमें तुलसीदास के 'रामचरितमानस' से चुने गए अमर दोहे शामिल हैं, जिनके बीच में एक ही मंत्र-सा 'राम सिया राम सिया राम जय जय राम' का पुनरावर्तन होता है। यह भक्तों को राम-सीता के प्रति समर्पण और विश्वास में डूबने का अवसर देता है।
यह प्रसिद्ध स्तोत्र भगवान श्रीराम की स्तुति में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचा गया है। इसमें राम के रूप, गुण और पराक्रम का वर्णन करते हुए उनसे भक्ति और कृपा की प्रार्थना की गई है।
श्रीराम के 108 नामों का स्तोत्र, जो रामायण को काण्ड-क्रम से स्मरण कराता है, साथ में राम, सीता और हनुमान की प्रार्थनाएँ।
यह एक सरल और मधुर भजन है जो हमें सिखाता है कि जीवन में जो कुछ भी हो, हमें श्रीराम पर भरोसा रखना चाहिए और उनकी इच्छा के अनुसार चलना चाहिए। इसमें 'सीता राम' नाम का जप करते हुए हर परिस्थिति में संतोष और समर्पण का संदेश दिया गया है।
यह एक भक्ति गीत है जिसमें भगवान राम की शरण में आने से मिलने वाले सुख और शांति का वर्णन किया गया है।
आदित्यहृदयम्: वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड के 31 श्लोक, जिनमें ऋषि अगस्त्य रणभूमि में राम को सूर्य की स्तुति सिखाते हैं।
यह एक पारंपरिक भक्ति गीत (आरती) है जो भगवान राम की स्तुति में गाया जाता है। इसे मंदिरों और घरों में पूजा के अंत में दीपक लेकर घुमाते समय गाते हैं।
रामायण ग्रंथ की ही आरती: देवताओं और ऋषियों द्वारा गाई उसकी महिमा, शास्त्रों का सार और कलियुग के दोषों का हरण।
यह एक भक्ति स्तोत्र है जिसमें भगवान श्री राम के गुणों, लीलाओं और महिमा का वर्णन किया गया है। इसे पढ़ने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और भक्ति की प्राप्ति होती है।
यह स्तोत्र भगवान के उन अलौकिक एवं अद्भुत अवतारों की स्तुति करता है जो मानव रूप में रहते हुए भी दिव्य शक्तियों को प्रकट करते हैं। इसमें भगवान राम और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्त भाव से उनकी महिमा गाई गई है।
यह एक भक्ति स्तोत्र है जिसमें भगवान हनुमान के पराक्रम, रामभक्ति, ज्ञान और आशीर्वाद का वर्णन है। इसे सद्गुरु श्री त्यागराज स्वामी की शिष्या पुष्पा ने रचा है।
लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली: देवी लक्ष्मी के 108 नाम, शुक्रवार, वरलक्ष्मी व्रत और दीपावली पर समृद्धि और कृपा के लिए पाठ्य।
भगवान राम के १०८ नाम, ॐ और नमः के साथ, जो रामायण में उनके कर्मों और परमात्मा के रूप में उनके स्वरूप का स्मरण कराते हैं।
बुधकौशिक का ३८ श्लोकों का रक्षा-स्तोत्र, जो सम्पूर्ण शरीर को राम की रक्षा में सौंपता है और राम नाम को सहस्रनाम के तुल्य बताकर समाप्त होता है।
यह एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। इसमें हनुमान जी के गुणों, रामभक्ति और राम नाम के महिमा का वर्णन है।
यह आठ श्लोकों का एक भजन है जो भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों, विशेषकर श्रीकृष्ण और श्रीराम, की स्तुति करता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से भक्त की इच्छाएँ पूरी होती हैं और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।