मेरे राम – शरण तेरी आया
यह एक भक्ति गीत है जिसमें भगवान राम की शरण में आने से मिलने वाले सुख और शांति का वर्णन किया गया है।
श्लोक
जैसे सूरज की तपिश से जले हुए शरीर को वृक्ष की छाया मिल जाती है, वैसा ही सुख मेरे मन को मिला है, जब से मैं तेरी शरण में आया हूँ, हे मेरे राम।
श्लोक 1
मेरा मन भटका हुआ था, उसे कोई सहारा नहीं मिल रहा था – जैसे लहरों में झूलती नाव को किनारा नहीं मिल रहा हो। उस डगमगाती नाव को किसी ने किनारा दिखाया। वैसा ही सुख मेरे मन को मिला है, जब से मैं तेरी शरण में आया हूँ, हे मेरे राम।
श्लोक 2
हे राघव, तेरी कृपा से आग भी चंदन की तरह शीतल हो जाए। जो रातें अमावस की अँधेरी थीं, वे पूर्णिमा की उज्ज्वल रातें बन जाएँ। जैसे युगों-युगों से प्यासी मरुभूमि को सावन का संदेश मिला, वैसा ही सुख मेरे मन को मिला है, जब से मैं तेरी शरण में आया हूँ, हे मेरे राम।
श्लोक 3
जिस मार्ग की मंजिल तेरा मिलन है, उस पर मैं कदम बढ़ाऊँ। फूलों में, काँटों में, पतझड़ में, बहारों में – मैं कभी डगमगाऊँ नहीं। जैसे भाग्य ने प्यासे प्राणी को जी भरकर अमृत पिलाया, वैसा ही सुख मेरे मन को मिला है, जब से मैं तेरी शरण में आया हूँ, हे मेरे राम।
श्लोक 4
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल
शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल
- मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पृष्ठभूमि
यह एक फ़िल्मी भजन है: इसे शर्मा बंधु ने हिंदी फ़िल्म परिणय (1974) में गाया, जिसके गीतकार रामानंद शर्मा और संगीतकार जयदेव बताए जाते हैं। तब से यह उत्तर भारत में सत्संग और सामूहिक प्रार्थना में गाया जाने वाला लोकप्रिय राम भजन बन गया है। इसका भाव राम-भक्ति परंपरा की शरणागति से जुड़ा है, जिसमें अयोध्या के आदर्श राजकुमार और विष्णु के अवतार भगवान राम की शरण में जाना प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति और मन की शांति का मार्ग माना जाता है।
इस पाठ के विषय में
रचयिता: Ramanand Sharma
क्या आप जानते हैं?
रचना का भाव
यह भजन एक आत्मसमर्पण की गाथा है, जिसमें भक्त श्री राम की शरण में आकर मिलने वाले अपार सुख को सूरज की गर्मी से जलते तन को मिलने वाली पेड़ की छाया जैसा बताता है।
प्राकृतिक उपमाएँ
भजन में चार प्रमुख प्राकृतिक उपमाएँ हैं—तरुवर की छाया (पेड़ की छाया), लहरों में भटकती नाव का किनारा, चंदन की शीतलता, और प्यासी भूमि को सावन (बरसात) का संदेश। ये सभी जीवन की पीड़ा और ईश्वर की शरण में मिलने वाली शांति को दर्शाती हैं।
विरोधाभासों का प्रयोग
कवि ने 'सूरज की गर्मी' और 'तरुवर की छाया', 'अमावस की अँधेरी रात' और 'पूनम की उजली रात', तथा 'प्यासी भूमि' और 'सावन का संदेश' जैसे विरोधाभासों के माध्यम से संकट और उसके समाधान को सजीव बनाया है।
भाषा और शैली
यह भजन सरल हिंदी में रचा गया है, जिसमें दोहराव (जैसे 'मेरे राम' और 'सूरज की गर्मी से...') भक्ति भाव को गहराई देता है और गायन में सहजता लाता है।
आध्यात्मिक संदेश
भजन का मूल संदेश यह है कि जीवन की कठिनाइयों और भटकाव के बाद भी, प्रभु की शरण में आने से मन को वह शांति और सुख मिलता है जो किसी और से नहीं मिल सकता।
फ़िल्मी मूल
यह भजन 1974 की हिंदी फ़िल्म परिणय में शर्मा बंधु ने गाया था; गीत रामानंद शर्मा का और संगीत जयदेव का है। सरल धुन और उपमाओं के कारण यह परदे से निकलकर मंदिरों और सत्संगों तक पहुँचा।
Rama
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