Bharat Devotion
Embroidered artwork for मम रामः श्रीरामसमर्पणस्य आनन्दः: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

मम रामः श्रीरामसमर्पणस्य आनन्दः

मम रामः श्रीरामसमर्पणस्य आनन्दः

इदं भजनं वर्णयति यत् भक्तः श्रीरामे सम्पूर्णं समर्पयन् गम्भीरं शान्तिं सुखं च अनुभवति। अत्र उपमानानि यथा—तीव्रातपे छाया, तटं प्राप्ता नौका, निर्जले वृष्टिः—दिव्याश्रयस्य आनन्दं व्यञ्जयन्ति।

पद्यानि

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया, ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया मेरे राम सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
Jaise Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko Mil Jaaye Taruvar Ki Chhaya, Aisa Hi Sukh Mere Man Ko Mila Hai, Main Jab Se Sharan Teri Aaya. Mere Ram... Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko Mil Jaaye Taruvar Ki Chhaya...

श्लोकः 1

भटका हुआ मेरा मन था कोई, मिल ना रहा था सहारा लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा मिल ना रहा हो किनारा इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया, ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया मेरे राम सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
Bhatka Hua Mera Man Tha Koi, Mil Na Raha Tha Sahara. Lahron Se Lagi Hui Naav Ko Jaise Mil Na Raha Ho Kinara. Mil Na Raha Ho Kinara. Is Ladkhadati Hui Naav Ko Jo Kisi Ne Kinara Dikhaya, Aisa Hi Sukh Mere Man Ko Mila Hai, Main Jab Se Sharan Teri Aaya. Mere Ram... Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko Mil Jaaye Taruvar Ki Chhaya...

श्लोकः 2

शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी जो थी अमावस अँधेरी युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया मेरे राम सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
Sheetal Bane Aag Chandan Ke Jaisi Raghav Kripa Ho Jo Teri. Ujyali Poonam Ki Ho Jaaye Raatein Jo Thi Amavas Andheri. Jo Thi Amavas Andheri. Yug Yug Se Pyaasi Marubhumi Ne Jaise Saawan Ka Sandes Paaya. Aisa Hi Sukh Mere Man Ko Mila Hai, Main Jab Se Sharan Teri Aaya. Mere Ram... Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko Mil Jaaye Taruvar Ki Chhaya...

श्लोकः 3

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ मैं ना कबी डगमगाऊ पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया मेरे राम सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
Jis Raah Ki Manzil Tera Milan Ho Us Par Kadam Main Badhaoon. Phoolon Mein Khaaron Mein Patjhad Baharon Mein Main Na Kabhi Dagmagaoon. Main Na Kabhi Dagmagaoon. Paani Ke Pyaase Ko Takdeer Ne Jaise Jee Bhar Ke Amrit Pilaya. Aisa Hi Sukh Mere Man Ko Mila Hai, Main Jab Se Sharan Teri Aaya. Mere Ram... Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko Mil Jaaye Taruvar Ki Chhaya...

श्लोकः 4

Worship Guidelines & Chanting Benefits (Phalashruti)

Auspicious Day

प्रतिदिनं अथवा शुभतिथौ

Best Time (Muhurta)

ब्राह्मे मुहूर्ते सन्ध्याकाले च

Sacred Offerings

घृतदीपः, धूपः, शुद्धपुष्पं, जलं च

Spiritual Benefits (Phalashruti)
  • मानसिकशान्तिः, आत्मोन्नतिः, मङ्गलमयवातावरणम्

पृष्ठभूमिः

इदं भजनं श्रीरामकेन्द्रितभक्तिपरम्परायाः अन्तर्गतम्, यत्र श्रीरामः अयोध्यायाः धार्मिकराजा विष्णोः अवतारः च मन्यते। उत्तरभारते सामूहिकभजनसत्रेषु व्यक्तिगतप्रार्थनायां च लोकप्रियम्। हिन्दीभाषायाः सरलं हार्दिकं च भक्तिमार्गं प्रतिबिम्बयति, यः ईश्वरे प्रेमसम्पूर्णसमर्पणं चान्तर्‌शान्तेः मार्गत्वेन गौरवयति। रचयिता अज्ञातः, किन्तु मौखिकपरम्परया अर्वाचीनभजनसङ्ग्रहेषु सुलभः।

अस्य पाठस्य विषये

रचयिता: Ramanand Sharma

ज्ञातव्य-विशेषः

आश्रयः सार्वभौमः विषयः

भजनस्य केन्द्रीया कल्पना — उच्चशक्तौ शरणागतिः — भक्तिपरम्परायाः आधारस्तम्भः, यत्र समर्पणं प्रेम्णः मोक्षस्य च परमं कार्यं मन्यते।

प्रकृतिः उपमारूपेण

श्लोकाः सजीवप्राकृतिकप्रतिमाः — तीव्रातपे वृक्षच्छाया, तीरं प्राप्ता नौका, शुष्कक्षितौ वर्षा — प्रयुञ्जते, दिव्यानुग्रहस्य अमूर्तं संप्रत्ययं मूर्तं दैनन्दिनजीवने च सम्बद्धं कर्तुम्।

नौका तीरं च

भ्रममाणायाः नौकायाः तीरप्राप्तेः प्रतिमा भारतीयभक्तिकाव्ये उत्कृष्टा उपमा, दिव्यमार्गदर्शनेन आत्मनः भ्रमदुःखाभ्यां सुरक्षाप्रयोजनयोः प्रति यात्रां प्रतीकयति।

तमसः प्रकाशम्

'अमावास्या' (अमावास्यरात्रिः) 'पूर्णिमा' (पौर्णिमा) इति परिवर्तनं आध्यात्मिकपरिवर्तनस्य प्रतीकम् — अज्ञाननिराशाभ्यां स्पष्टतानन्दयोः गतिः, भक्तिगीतेषु सामान्यः बिम्बः।

स्थैर्यस्य प्रतिज्ञा

अन्तिमश्लोकः कृतज्ञतायाः शपथं प्रति परिवर्तते — पुष्पेषु कण्टकेषु वा, वसन्ते शरदि वा, अचलः भक्तिमार्गे चलितुम् — जीवनस्य सर्वऋतुषु विश्वासे भक्तस्य प्रतिबद्धतां प्रतिबिम्बयति।

ध्रुवपदस्य शक्तिः

पुनरावृत्तं ध्रुवपदं 'मम रामः' (मम रामः) देवतां वैयक्तिकं करोति, गीतं केवलं प्रार्थनां न अपितु घनिष्ठसंवादं करोति, भक्तिचलनस्य लक्षणं यत् ईश्वरेण सह वैयक्तिकप्रेममयसम्बन्धं बलयति।

Rama सम्पूर्णा स्तुतिः पाठाश्च

Rama

Rama सर्वं पश्यतु →

हिन्दूधर्मःतः अधिकम्

सर्वं पश्यत

सम्बद्धशिक्षाः

सैव शिक्षा, विविधपरम्परासु प्रतिध्वनिता