Bharat Devotion
Embroidered artwork for सीता राम भजन: जाहि विधि राखे राम: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

सीता राम भजन

जाहि विधि राखे राम

सीता राम भजन

जाहि विधि राखे राम

यह एक सरल और मधुर भजन है जो हमें सिखाता है कि जीवन में जो कुछ भी हो, हमें श्रीराम पर भरोसा रखना चाहिए और उनकी इच्छा के अनुसार चलना चाहिए। इसमें 'सीता राम' नाम का जप करते हुए हर परिस्थिति में संतोष और समर्पण का संदेश दिया गया है।

श्लोक

सीता राम सीता राम सीताराम कहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Seeta Ram Seeta Ram Seetaram Kahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 1

मुख में हो राम नाम राम सेवा हाथ में नहिं तू अकेला प्यारे राम तेरे साथ में विधि का विधान जान हानि लाभ सहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Mukh Mein Ho Ram Naam Ram Seva Haath Mein Nahin Tu Akela Pyaare Ram Tere Saath Mein Vidhi Ka Vidhaan Jaan Haani Laabh Sahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 2

किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा होगा प्यारे वही जो श्री रामजी को भायेगा फल आशा त्याग शुभ काम करते रहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Kiya Abhimaan To Phir Maan Nahin Paayega Hoga Pyaare Wahi Jo Shree Ramji Ko Bhaayega Phal Aasha Tyaag Shubh Kaam Karte Rahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 3

ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Zindagi Ki Dor Saump Haath Deenaanaath Ke Mahlon Mein Raakhe Chahe Jhompdi Mein Vaas De Dhanyavaad Nirvivaad Ram Ram Kahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 4

आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे नाता एक रामजी से दूजा नाते तोड़ दे साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Aasha Ek Ramji Se Dooji Aasha Chhod De Naata Ek Ramji Se Dooja Naate Tod De Saadhu Sang Ram Rang Ang Ang Rangiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 5

सीता राम सीता राम सीताराम कहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये सीता राम सीता राम सीताराम कहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
Seeta Ram Seeta Ram Seetaram Kahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye Seeta Ram Seeta Ram Seetaram Kahiye Jaahi Vidhi Raakhe Ram Taahi Vidhi Rahiye

श्लोक 6

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह भजन भारतीय भक्ति परंपरा से जुड़ा है, जहाँ भगवान राम और माता सीता की आराधना की जाती है। इसे अक्सर राम नाम के स्मरण और आध्यात्मिक जागरण के लिए गाया जाता है। इस भजन का कोई निश्चित रचयिता या सटीक समय नहीं बताया जाता, पर यह उत्तर भारत में रामभक्तों द्वारा प्रिय रूप से गाया जाने वाला एक लोकप्रिय भजन है। इसे सुबह की प्रार्थना, सत्संग या रामनवमी जैसे त्योहारों पर सुनाया या गाया जा सकता है। इसका समर्पण-भाव तुलसीदास के रामचरितमानस की भावना से मेल खाता है, पर यह भजन उस ग्रंथ का अंश नहीं है और इसके रचयिता का नाम प्रमाणित नहीं है।

क्या आप जानते हैं?

मुख्य संदेश

यह भजन पूर्ण समर्पण और ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करने की शिक्षा देता है। हर बार आने वाली पंक्ति 'जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये' का अर्थ है—राम जैसे भी रखें, वैसे ही रहना चाहिए। यह गीता के 'निष्काम कर्म' और 'प्रसाद बुद्धि' के सिद्धांत को सरल शब्दों में समझाता है।

रचना की संरचना

यह भजन पाँच छोटे छंदों (verses) में बँटा है। पहला और आखिरी छंद 'सीता राम' के जप से शुरू होता है, जो भजन को एक मंडलाकार (circular) रूप देता है। बीच के तीन छंद अहंकार, आशा और नातों को त्यागने की बात करते हैं।

सीता राम का महत्व

भजन की शुरुआत और अंत में 'सीता राम' का नाम आता है। यह केवल राम का नाम नहीं, बल्कि सीता और राम को एक साथ जोड़ता है—जो भक्ति में प्रेम और शक्ति दोनों का प्रतीक है। वैष्णव परंपरा में इसे 'सीताराम' कहकर संबोधित करना आम है।

सरल भाषा और सामान्य जीवन के उदाहरण

इस भजन में संस्कृत या कठिन शब्द नहीं हैं। 'महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे' जैसी पंक्तियाँ सीधे गरीब-अमीर के जीवन से जुड़ती हैं। यह हर वर्ग के श्रोता को यह समझाने का प्रयास है कि राम की मर्जी में ही भलाई है।

अहंकार और फल की आशा छोड़ने का आग्रह

दूसरे और तीसरे छंद में कहा गया है कि अभिमान करने से मान नहीं मिलता, और जो राम को भाएगा वही होगा। 'फल आशा त्याग शुभ काम करते रहिये'—यह गीता के 'मा फलेषु कदाचन' का ही सीधा अनुवाद है। इस प्रकार भजन शास्त्र और लोक दोनों को एक करता है।

Rama की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Rama

Rama के सभी पाठ देखें →

हिन्दू धर्म से और

सभी देखें