Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली

भगवान विष्णु के 108 नामों की नामावली, जगत्पालक नारायण की स्तुति; एकादशी, गुरुवार और प्रातः प्रार्थना में तुलसी दल के साथ पाठ्य।

श्लोक

१०८ पावन नामावली

भगवान के १०८ दिव्य नाम, जिनका 'ॐ' एवं 'नमः' के साथ अर्चन व जप किया जाता है।

ॐ विष्णवे नमः

श्लोक 1

ॐ लक्ष्मीपतये नमः

श्लोक 2

ॐ कृष्णाय नमः

श्लोक 3

ॐ वैकुण्ठाय नमः

श्लोक 4

ॐ गरुडध्वजाय नमः

श्लोक 5

ॐ परब्रह्मणे नमः

श्लोक 6

ॐ जगन्नाथाय नमः

श्लोक 7

ॐ वासुदेवाय नमः

श्लोक 8

ॐ त्रिविक्रमाय नमः

श्लोक 9

ॐ दैत्यान्तकाय नमः

श्लोक 10

ॐ मधुरिपवे नमः

श्लोक 11

ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः

श्लोक 12

ॐ सनातनाय नमः

श्लोक 13

ॐ नारायणाय नमः

श्लोक 14

ॐ पद्मनाभाय नमः

श्लोक 15

ॐ हृषीकेशाय नमः

श्लोक 16

ॐ सुधाप्रदाय नमः

श्लोक 17

ॐ माधवाय नमः

श्लोक 18

ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः

श्लोक 19

ॐ स्थितिकर्त्रे नमः

श्लोक 20

ॐ परात्पराय नमः

श्लोक 21

ॐ वनमालिने नमः

श्लोक 22

ॐ यज्ञरूपाय नमः

श्लोक 23

ॐ चक्रपाणये नमः

श्लोक 24

ॐ गदाधराय नमः

श्लोक 25

ॐ उपेन्द्राय नमः

श्लोक 26

ॐ केशवाय नमः

श्लोक 27

ॐ हंसाय नमः

श्लोक 28

ॐ समुद्रमथनाय नमः

श्लोक 29

ॐ हरये नमः

श्लोक 30

ॐ गोविन्दाय नमः

श्लोक 31

ॐ ब्रह्मजनकाय नमः

श्लोक 32

ॐ कैटभासुरमर्दनाय नमः

श्लोक 33

ॐ श्रीधराय नमः

श्लोक 34

ॐ कामजनकाय नमः

श्लोक 35

ॐ शेषशायिने नमः

श्लोक 36

ॐ चतुर्भुजाय नमः

श्लोक 37

ॐ पाञ्चजन्यधराय नमः

श्लोक 38

ॐ श्रीमते नमः

श्लोक 39

ॐ शार्ङ्गपाणये नमः

श्लोक 40

ॐ जनार्दनाय नमः

श्लोक 41

ॐ पीताम्बरधराय नमः

श्लोक 42

ॐ देवाय नमः

श्लोक 43

ॐ सूर्यचन्द्रविलोचनाय नमः

श्लोक 44

ॐ मत्स्यरूपाय नमः

श्लोक 45

ॐ कूर्मतनवे नमः

श्लोक 46

ॐ क्रोडरूपाय नमः

श्लोक 47

ॐ नृकेसरिणे नमः

श्लोक 48

ॐ वामनाय नमः

श्लोक 49

ॐ भार्गवाय नमः

श्लोक 50

ॐ रामाय नमः

श्लोक 51

ॐ बलिने नमः

श्लोक 52

ॐ कल्किने नमः

श्लोक 53

ॐ हयाननाय नमः

श्लोक 54

ॐ विश्वम्भराय नमः

श्लोक 55

ॐ शिशुमाराय नमः

श्लोक 56

ॐ श्रीकराय नमः

श्लोक 57

ॐ कपिलाय नमः

श्लोक 58

ॐ ध्रुवाय नमः

श्लोक 59

ॐ दत्तत्रेयाय नमः

श्लोक 60

ॐ अच्युताय नमः

श्लोक 61

ॐ अनन्ताय नमः

श्लोक 62

ॐ मुकुन्दाय नमः

श्लोक 63

ॐ दधिवामनाय नमः

श्लोक 64

ॐ धन्वन्तरये नमः

श्लोक 65

ॐ श्रीनिवासाय नमः

श्लोक 66

ॐ प्रद्युम्नाय नमः

श्लोक 67

ॐ पुरुषोत्तमाय नमः

श्लोक 68

ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः

श्लोक 69

ॐ मुरारातये नमः

श्लोक 70

ॐ अधोक्षजाय नमः

श्लोक 71

ॐ ऋषभाय नमः

श्लोक 72

ॐ मोहिनीरूपधारिणे नमः

श्लोक 73

ॐ सङ्कर्षणाय नमः

श्लोक 74

ॐ पृथवे नमः

श्लोक 75

ॐ क्षीराब्धिशायिने नमः

श्लोक 76

ॐ भूतात्मने नमः

श्लोक 77

ॐ अनिरुद्धाय नमः

श्लोक 78

ॐ भक्तवत्सलाय नमः

श्लोक 79

ॐ नराय नमः

श्लोक 80

ॐ गजेन्द्रवरदाय नमः

श्लोक 81

ॐ त्रिधाम्ने नमः

श्लोक 82

ॐ भूतभावनाय नमः

श्लोक 83

ॐ श्वेतद्वीपसुवास्तव्याय नमः

श्लोक 84

ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः

श्लोक 85

ॐ भगवते नमः

श्लोक 86

ॐ शङ्करप्रियाय नमः

श्लोक 87

ॐ नीलकान्ताय नमः

श्लोक 88

ॐ धराकान्ताय नमः

श्लोक 89

ॐ वेदात्मने नमः

श्लोक 90

ॐ बादरायणाय नमः

श्लोक 91

ॐ भागीरथीजन्मभूमिपादपद्माय नमः

श्लोक 92

ॐ सतां प्रभवे नमः

श्लोक 93

ॐ स्वभुवे नमः

श्लोक 94

ॐ विभवे नमः

श्लोक 95

ॐ घनश्यामाय नमः

श्लोक 96

ॐ जगत्कारणाय नमः

श्लोक 97

ॐ अव्ययाय नमः

श्लोक 98

ॐ बुद्धावताराय नमः

श्लोक 99

ॐ शान्तात्मने नमः

श्लोक 100

ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः

श्लोक 101

ॐ दामोदराय नमः

श्लोक 102

ॐ विराड्रूपाय नमः

श्लोक 103

ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः

श्लोक 104

ॐ आदिदेवाय नमः

श्लोक 105

ॐ देवदेवाय नमः

श्लोक 106

ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः

श्लोक 107

ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः

श्लोक 108

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

फलश्रुति
शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभफलश्रुति
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:प्रति नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' का सस्वर उच्चारण करें।

पृष्ठभूमि

विष्णु के 108 नामों की यह नामावली एकादशी व्रत, गुरुवार की विष्णु पूजा और तुलसी दल सहित प्रातः प्रार्थना में पढ़ी जाती है। नाम उसी क्रम में हैं जिसमें संस्कृत डॉक्यूमेंट्स की '108 Names of Vishnu 2' सूची है, जो परम्परा से व्यास को श्रेय दी जाती है; यह किसी एक ग्रंथ का अंश नहीं, वैष्णव स्तोत्र-साहित्य की पारम्परिक नामावली है। क्रमांक 1 से 108 तक के नाम नारायण को जीवन के अंतर्यामी धारक के रूप में दिखाते हैं।

क्या आप जानते हैं?

'विष्णु' शब्द की वैदिक व्युत्पत्ति

'विष्' धातु से बने 'विष्णु' नाम का अर्थ है 'सर्वव्यापक'। जो परमात्मा सृष्टि के प्रत्येक अणु-परमाणु और अनंत आकाशगंगाओं में समान रूप से व्याप्त हैं, वही विष्णु हैं।

कौस्तुभ मणि का रहस्य (नाम ६९)

समुद्र मंथन से प्रकट हुई दिव्य कौस्तुभ मणि श्रीवत्स चिह्न के साथ भगवान विष्णु के वक्षःस्थल पर सुशोभित है, जो समस्त मुक्त जीवों की विशुद्ध और निष्पाप चेतना का प्रतीक है।

'दामोदर' नाम का वात्सल्य भाव (नाम १०२)

माता यशोदा ने बालकृष्ण को प्रेम की रस्सी (दाम) से उदर पर बांध दिया था। यह लीला दर्शाती है कि जो परमात्मा तप और योग से नहीं बंधते, वे केवल निष्कपट प्रेम और भक्ति से बंध जाते हैं।

'यज्ञो वै विष्णुः' (नाम २३ यज्ञरूप)

शतपथ ब्राह्मण के अनुसार 'यज्ञ ही साक्षात् विष्णु हैं'। लोक कल्याण के लिए किया गया प्रत्येक निस्वार्थ कर्म भगवान श्रीहरि को ही समर्पित होता है।

'प्रह्लादपरिपालक' का अमर विश्वास (नाम 107)

नृसिंह अवतार की स्मृति दिलाने वाला यह नाम भक्त प्रह्लाद की रक्षा का स्मरण कराता है; भगवद्गीता (9.31) भी यही आश्वासन देती है: 'न मे भक्तः प्रणश्यति' (मेरे भक्त का कभी नाश नहीं होता)।

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