हनुमत् स्मरण श्लोक
हनुमान जी के स्मरण से मिलने वाले आठ गुणों का श्लोक: बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, आरोग्य, सजगता और वाक्पटुता।
श्लोक
श्री हनुमान जी के स्मरण मात्र से मनुष्य को बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, रोगों से मुक्ति, आलस्य-रहितता तथा वाणी की पटुता प्राप्त होती है।
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
मंगलवार एवं शनिवार
प्रातःकाल अथवा संध्या समय
सिंदूर, चमेली का तेल, तुलसी माला, बूंदी/लड्डू एवं पान का बीड़ा
- अपार बल, साहस, भयमुक्ति एवं नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा
पृष्ठभूमि
यह श्लोक रामायण के पाँचवें काण्ड (काण्ड 5) सुन्दरकाण्ड के पारायण से पहले पढ़े जाने वाले ध्यान श्लोकों में 'मनोजवं मारुततुल्यवेगम्' श्लोक के साथ आता है। यह पारायण परंपरा में जुड़ा हुआ मंगल पाठ है, वाल्मीकि रामायण की पंक्ति नहीं, और इसके रचयिता अज्ञात हैं। भक्त इसे प्रातःकाल, अध्ययन, कार्य या परीक्षा से पहले अलग से भी पढ़ते हैं और हनुमान जी के उन्हीं गुणों की प्रार्थना करते हैं जो रामायण में दिखते हैं।
क्या आप जानते हैं?
आठ वरदान
श्लोक में बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, आरोग्य, अजाड्य (जड़ता का अभाव) और वाक्पटुता, इन आठ गुणों का उल्लेख है, जो हनुमान जी के स्मरण मात्र से प्राप्त होने वाले बताए गए हैं।
पाठ का स्थान
यह श्लोक सुन्दरकाण्ड पारायण से पहले पढ़े जाने वाले ध्यान श्लोकों में मिलता है। यह उस परंपरा का मंगल पाठ है और इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।
स्मरण की साधना
'हनुमत् स्मरणात्' का अर्थ है हनुमान जी के स्मरण से। भक्ति परंपरा में प्रेमपूर्वक स्मरण सबसे सरल उपासनाओं में गिना जाता है, इसलिए श्लोक किसी विधि की नहीं, केवल स्मरण की बात करता है।
जो गुण वे स्वयं दिखाते हैं
रामायण में हनुमान जी समुद्र लाँघते हैं, सीता जी को खोजते हैं और हर सभा में नपे-तुले शब्दों में बोलते हैं। भक्त इस श्लोक में उन्हीं गुणों की प्रार्थना करते हैं।
'अजाड्यम्' का भाव
अजाड्य का अर्थ है जड़ता या आलस्य का अभाव, यानी सजग और स्वच्छ मन। इसी कारण विद्यार्थी अध्ययन से पहले इसका पाठ करते हैं।
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