एक संक्षिप्त अज्ञात-कर्तृक गणेश श्लोक 'अगजानन पद्मार्कं', जिसमें भक्त गजानन, एकदंत प्रभु का दिन-रात ध्यान करते हैं।
हनुमान जी के स्मरण से मिलने वाले आठ गुणों का श्लोक: बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, आरोग्य, सजगता और वाक्पटुता।
शिव की स्तुति का एक संस्कृत श्लोक: कपूर के समान गौर, करुणा के अवतार, जो भवानी सहित हृदय-कमल में सदा विराजते हैं।
'मनोजवं मारुततुल्यवेगं': हनुमानजी को मन और वायु जैसा वेगवान, जितेन्द्रिय और श्रीराम का दूत बताने वाला श्लोक।
गणेश जी की प्रिय प्रार्थना: वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्यों के तेज वाले देव, मेरे सब कार्य सदा निर्विघ्न करें।