Bharat Devotion
Embroidered artwork for ष्रि ःअनुमद् ऱक्श ष्तोत्रम्: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

ष्रि ःअनुमद् ऱक्श ष्तोत्रम्

ष्रि ःअनुमद् ऱक्श ष्तोत्रम्

यह संस्कृत स्तोत्र है जिसमें हनुमान जी के नामों से सिर से पैर तक शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। भक्त इसे सुरक्षा, दीर्घायु और सुख-शांति के लिए पढ़ते हैं।

श्लोक

प्रणम्य श्रीगणेशं च श्रीरामं मारुतिं तथा रक्षामिमां पठेत्प्राज्ञः श्रद्धाभक्ति समन्वितः
Pranamya Shree Ganesham Cha Shree Ramam Marutim Tatha Rakshaam-imaam Pathet-praagyah Shraddha-bhakti Samanvitah

श्लोक 1

शिरो मे हनुमान् पातु भालं पवननन्दनः आञ्जनेयो दृशौ पातु रामचन्द्रप्रियश्रुती
Shiro Me Hanuman Paatu Bhaalam Pavana-nandanah Aanjaneyo Drishau Paatu Ramachandra-priya-shruti

श्लोक 2

घ्राणं पातु महावीरो मुखं लक्ष्मणप्राणदः जिह्वां मनोजवः पातु कण्ठं पातु जितेन्द्रियः
Ghraanam Paatu Mahaveero Mukham Lakshmana-praanadah Jihvaam Manojavaah Paatu Kantham Paatu Jitendriyah

श्लोक 3

स्कन्धौ महाबली पातु भुजौ सङ्कटमोचनः करौ विश्वम्भरः पातु हृदयं सर्वशक्तिमान्
Skandhau Mahabali Paatu Bhujau Sankat-mochanah Karau Vishvambharah Paatu Hridayam Sarva-shaktimaan

श्लोक 4

मध्यं पातु महातेजाः नाभिं सागरलङ्घनः रामदूतः कटी पातु सक्थिनी राक्षसेन्द्रजित्
Madhyam Paatu Mahatejaah Naabhim Saagar-langhanah Ramadutah Kati Paatu Sakthini Rakshasendrajit

श्लोक 5

ऊरू पुच्छबलः पातु भीमगर्वापहारकः जानुनी श्रीप्रदः पातु जङ्घे लङ्काप्रदाहकः
Uroo Puchha-balah Paatu Bheem-garva-apahaarakah Jaanuni Shree-pradah Paatu Janghe Lanka-pradaahakah

श्लोक 6

पादौ श्रीरामभक्तश्च सूर्यमण्डलभक्षकः हनुमान् पातु मे कायं मकरध्वज जन्मदः
Paadau Shree Ram-bhaktash-cha Surya-mandala-bhakshakah Hanumaan Paatu Me Kaayam Makaradhwaj Janmadah

श्लोक 7

एतां रुद्रबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् सदीर्घायुसुखी पुत्री बलवान् बुद्धिमान् भवेत्
Etaam Rudra-balopetaam Rakshaam Yah Sukriti Pathet Sa Deerghaayu-sukhi Putri Balavaan Buddhimaan Bhavet

श्लोक 8

इति श्रीरामरक्षास्तोत्रमनुश्रुत्य श्रीसीतारामशर्मणा
Iti Shree Ramaraksha-stotram-anushrutya Shree Sita-rama-sharmana

श्लोक 9

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

मंगलवार एवं शनिवार

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल अथवा संध्या समय

पूजन सामग्री व अर्पण

सिंदूर, चमेली का तेल, तुलसी माला, बूंदी/लड्डू एवं पान का बीड़ा

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • अपार बल, साहस, भयमुक्ति एवं नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा

पृष्ठभूमि

यह स्तोत्र राम भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे प्रायः सुबह या विशेष पूजा के समय पढ़ा जाता है। माना जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से शारीरिक और मानसिक सुरक्षा मिलती है, साथ ही बुद्धि और बल की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से हनुमान जी के प्रति समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक सरल साधन है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Sitarama Sharma

क्या आप जानते हैं?

रचयिता

स्तोत्र की पुष्पिका के अनुसार इसकी रचना श्रीसीताराम शर्मा ने की, जिन्होंने श्रीरामरक्षा स्तोत्र को सुनकर इसे रचा। यह स्तोत्र रामरक्षा की शैली में हनुमान जी की रक्षा के लिए है।

संरचना

यह एक कवच स्तोत्र है, जिसमें शरीर के प्रत्येक अंग की सुरक्षा हनुमान जी के विभिन्न रूपों और नामों से माँगी गई है। यह क्रम सिर से पैर तक चलता है।

विशेषता

इस स्तोत्र में हनुमान जी के अनेक पराक्रमी नामों का उल्लेख है, जैसे सूर्यमण्डलभक्षक (जिन्होंने सूर्य को निगल लिया था) और मकरध्वजजन्मद (मकरध्वज के पिता)।

फलश्रुति

यह स्तोत्र पढ़ने वाले को दीर्घायु, सुख, संतान, बल और बुद्धि प्रदान करता है। कहा गया है कि इसमें रुद्र (शिव) का भी बल समाहित है।

लोकप्रियता

यह स्तोत्र हनुमान भक्तों में अत्यंत प्रचलित है और प्रतिदिन पाठ किया जाता है, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को।

Hanuman की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Hanuman

Hanuman के सभी पाठ देखें →

हिन्दू धर्म से और

सभी देखें

संबंधित शिक्षाएं

एक ही शिक्षा, विभिन्न परंपराओं में प्रतिध्वनित